Sunday, 2 June 2024

छत्तीसगढ़ी सावन पावस गीत



*कब आबे तैं बोल लहरिया* (राग मल्हार) 


बरसत बादर करिया-करिया।

जल बुँदियन छलकात गगरिया ।।

बरसत बादर....१/ 


दूबी जामत ले बरसत हे । 


छान्ही परवा तरी धँसत हे ।।

खेत जोताय नइ इक हरिया ।

कब आबे तैं बोल लहरिया ।

बरसत बादर ...२ 


2/

सरी कोठ भर उपकत रेला ।

सोग लगत हे देखत तेला ।।

आँसू ढ़रकत फिजत अँचरिया।

कब आबे तै बोल लहरिया ।। 


बरसत बादर ...३ 


गरजन घुमरन सुनके बादर ।

अंडा साँप फूटत भुँइया भर।।

छलकत बहकत नदिया तरिया ।

कब आबे तैं बोल लहरिया ।। 


बरसत बादर ...४/ 


नभ मा बगुला पाँत उड़ावत ।

अउ भुँइया के जीव जुड़ावत ।।

मोरे मन धनहा हे परिया।

कब आबे तैं बोल लहरिया।।

बरसत बादर. ..५/ 


बइठ बरेंडी कँउवा बोलत ।

गियाँ गड़ी मन हाँसत ठोलत।।

रहन धराये हे सुख लरिया।

कब आबे तैं बोल लहरिया ।।

बरसत बादर..६/ 


लउकत बिजुरी देख डरत हौं ।

तोर बिगन दिन रात मरत हौं ।।

बज्र असन हे कटत उमरिया ।

कब आबे तैं बोल लहरिया ।।

बरसत बादर..७/ 


जब अंतस पीरा नइ जाने।

रहिते छेल्ला काबर लाने।।

डार मोहनी भगा उढ़रिया ।

कब आबे तैं बोल लहरिया ।।

बरसत बादर ..८/ 


शोभामोहन 


१७/०२/२०


२/


●देखौ सावन के दिन आगे (राग मल्हार)● 


  


देखौ सावन के दिन आगे 


  


छरियावत हावय सबके मति।सुंदर फूलत फूल सबो कति।। 


मधु लूटे बर भ्रमर झपागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


इन्द्र बजावत दफड़ा माँदर।करिया करिया घपटे बादर।। 


लागत अँगना छान्ही छागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


देख मयूरा छतरा पाँखी।हवय दिखावत सुंदर झाँकी।। 


नृत्य करत लागत पगलागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


उमड़त गरजत घुमरत चमचम।बूँद गिरत हे छमछम छमछम।। 


लउकत बिजली प्रान कँपागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


बादर भुँइया छुवे परत हे।सत्ती जाये असन करत हे।। 


बूँद चूहत पाना फरियागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


छोटे नदिया पार उदेलत।चारो कोती पानी ठेलत।। 


धरनी सुखद सरग कस लागे।देखौ सावन के दिन आगे।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 


२२/०५/२०२१



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