Sunday, 2 June 2024

कोन सदा रहिथे कन कन मा

/कोन सदा रहिथे कन कन मा 


ए जगती तल के कन-कन मा । 


पाना मन के हलन चलन मा ।। 


संझा नदिया के दरपन मा । 


केसर छींचत नभ के तन मा।। 


कोन सदा रहिथे कन कन मा...... 


बड़े बिहनिया ओस झरन मा । 


भुँइया चूमत सुरुज किरन मा ।। 


मन मा मधुरस मया घुरन मा । 


अँगना चाँदन चँउक पुरन मा ।। 


कोन सदा रहिथे कन-कन मा ...... 


सागर नदियाँ लहर-लहर मा । 


कोन बसे हे सबो डहर मा ।। 


चोला ठाठ रचे पिंजर मा । 


परिया धनहा जतर-कतर मा ।। 


कोन बसे सुख के संचरन मा। 


कोन सदा रहथे कन कन मा ।। 


बादर के भड़-भड़ गरजन मा । 


डारा-पाना के झुमरन मा ।। 


जीव जगत गोला घुमरन मा । 


संत गुनी मन के सुमरन मा ।। 


लुकछिप सपटे खुसर अगन मा । 


कोन सदा रहिथे कन कन मा । 


टाटा-टउवा चलन-फिरन मा। 


सुख-दुख लहरा उठन-गिरन मा।। 


पार बाँधथे घाट तिरन मा । 


मरन मोटावन अउ खिरन मा।। 


रहत लोहाटी अउ कंचन मा । 


कोन सदा रहिथे कन कन मा ।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव

१४/०१/२०२० 

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