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तोला टमड़न कोन बचन मा ?
तीनलोक चउदहो भुवन मा
जोगी साधू तापस तन मा।
गुरुपन माँझा अउ लघुपन मा
गोठ बात विग्यान बचन मा ।
झगरा झाँसा के अरझन मा ।
जिभिया के फरकन थिरकन मा ।
प्रकृति भर बगरे जड़पन मा ।
सब चेतन के हलन चलन मा ।
रीस दुख अड़कन भड़कन मा ।
बुधियारा के चालचलन मा ।
अड़हा के व्यवहार बरन मा ।
मया दया अउ दुख तड़पन मा ।
राग रोग रग रग बगरन मा ।।
अमरित धरसा गोड़ धरन मा ।
तोर मोरपन के मिंझरन मा ।
हान लाभ जय बिजय चरन मा ।
इन्द्रिय तन्तु बिषय छुअन मा ।
कारन कारज जगत भुवन मा ।
कटकटात चिंतन के वन मा ।
आगम निगम पुरान रटन मा ।
रसरसहा जर ताप बिघन मा ।
विजय वाध्य थिरकन नरतन मा ।
दुर्घट तर्क बितर्क करन मा ।
अकल तत्व छिन भर दरसन मा
रस रंझाझर बुड़े भवन मा ।
शोक बियाकुल जग कुटियन मा ।
कस्तूरी धरके भटकन मा।
बेरा के रटफट चटकन मा ।
परम पुरुख तँय जब कन-कन मा।
तोला टमड़न कोन बचन मा ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१४/०२/२०
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