Sunday, 21 April 2024

कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

मैं अगोरा के डिपरा में बारौं दीया।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

भादो भदरात हे, मेघ लोरियात हे।
मोर आँखी में अँधियार अउ छात हे।।
मोला ठोलत बोलत सब गड़ी अउ गिंया।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।
मैं अगोरा के डिपरा में बारौं दीया।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

फाग फगुनात हे, आमा मउरात हे ।
मोला तो तोर बिन नइ कुछु भात हे। ।
मैं मरत हौं कलप के हे तलफत जिया।।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।
मैं अगोरा के डिपरा में बारौं दीया।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

अब टूटत साँस हे, जब छूटत आस हे।
काय गौंतरिहा मनखे के बिसवास हे।।
खेल पर हाथ हे पुतरी जिनगी तिया।।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।
मैं अगोरा के डिपरा में बारौं दीया।
कब तैं आबे पिया, कब तैं आबे पिया।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

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