Sunday, 21 April 2024

खेत खार चल सिला बीने।खेत खार चल सिला बीने।

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

हीरा मोती मनि झरे हे।

अन्न कुँवारी सोन परे हे।।

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

भुँइया के भंडार भरे हे, 
ईश्वर हर उपकार करे हे, 

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

टुकना धर ले टुकनी धर ले
सोन सुरर लें ओंटी भर ले।। 

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

ओरिया बंदनवार बाँधबो, 
धान कूट के खीर राँधबो, 

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

गुरुबारी बर गुँथबो झालर, 
बिन के लाबो ओली भरभर,

मुठिया फरा दुधफरा चीला।
राँध के खाबो माई पिल्ला।। 

खेत खार चल सिला बीने।
खेत खार चल सिला बीने।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...