Saturday, 27 April 2024

बोट डारहू सोच के

बोट डारहू सोच के

राजपाठ करहूँ कहै, हमर देश ला चान।
घोटाला में हे फँसे, अब तो वोकर प्रान।।

अन्ना ला सन्ना डरिस, बन्ना बने लतेल।
तन्ना नन्ना आज हो, देख ओइलगे जेल।।

भ्रष्टाचार मिटाय बर, पागा बाँधिस जेन।
मूड़ गोड़ छबड़ाय हे, लद्दी चिखला तेन।।

अउ झन उपजै केजरी, अउ झन अन्ना आय।
भ्रष्टाचारी चोरहा, सबके नाव बुताय।।

लबरा भेट्ठा चोरहा, बदगे हवैं मितान।
बोट डारहू सोच के, तब तो हे कल्यान।।

जे चुनाव में ठाढ़ हे, वोकर देखौ चाल।
ठोक बजा ठिन्ना चुनौ, खेदौ नटवर लाल।।

हमर देश ला चान के, सोचै करहूँ राज।
पोल खुलत बेंडा गइस, तभो चिटिक नइ लाज।।

कोरी खरिखा चोरहा, भ्रष्ट देश गद्दार ।
एक मंच में हें खड़े, कर लौ बने चिन्हार।।

जीते जेन चुनाव ला, बाँटत चिन्ह चिन्ह नोट।
ब्याज समेत वसूलहीं, सोंच समझ दौ बोट।

परलोखिया चंडाल के, झुंड जात हे जेल।
आंदोलन करवाय के, बंद होत सब खेल।। 

शोभामोहन 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...