छत्तीसगढ़ी भजन
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
गुननिधि आये धरम बचाये, राखे ऋखिन कुटीर हो, मोरे राम रमैया।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
दरसन पावत तेन रिझावत, पट पीताम्बर चीर हो, मोरे राम रमैया ।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
मोती माला रूप निराला, कुलकत भगत शरीर हो, मोरे राम रमैया ।
रबिकुल भानू सबजग जानू, असनांदत नदी नीर हो, मोरे राम रमैया ।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
बालकपन में जूझत रन में, तान चलावत तीर हो, मोरे राम रमैया।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
राम अउ लखन दँउड़त रनबन, देवत संतन धीर हो, मोरे रमैया।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
रकसा आवत बिघन मतावत, कस टोरत रनधीर हो, मोरे राम रमैया ।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
पापी मारे दूर खेदारे, मंडप जग्य अभीर हो, मोरे राम रमैया ।
पापी सपटत भगतन लपटत, लकठावत रघुबीर हो, मोरे राम रमैया ।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
मुच मुच हाँसत अरिदल पासत, हेरत बान तुणीर हो, मोरे राम रमैया ।
सबले बड़े रनबीर हो, मोरे राम रमैया।
हँस धनु तानत सब प्रभु जानत, लड़त कछोरा भीर हो, मोरे राम रमैया।।
बन बन गिंजरत सब सन मिंझरत, दरसन देत अधीर हो, मोरे राम रमैया।
जगदुख टारे धरम पधारे, धरे प्रभु मनुख शरीर हो, मोरे राम रमैया।
शोभामोहन श्रीवास्तव
चइत अंजोरी पाख तीज
क्रोधी संवत्सर
विक्रम संवत 2081
शुभ स्थान महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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