होली खेलत घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!!
होली खेलत घनश्याम!!!!!
भर भर के मारत पिचकारी।
रंगत चुनरिया लहँगा सारी।।
धूम मचे ब्रजधाम!!!!! ब्रजधाम!!!!!! ब्रजधाम!!!!!!
होली खेलत घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!!
होली खेलत घनश्याम!!!!!
झारा झारा आके ग्वाला।
रंग लगावत हे गोपाला।।
सुंदर छबि अभिराम!!!!!!!
धूम मचे ब्रजधाम!!!!! ब्रजधाम!!!!!! ब्रजधाम!!!!!!
होली खेलत घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!!
हरियर पिंयर गुलाबी लाली।
रधिया मुँह कर दिस बनमाली।।
रंगना वोकर काम!!!!
धूम मचे ब्रजधाम!!!!! ब्रजधाम!!!!!! ब्रजधाम!!!!!!
होली खेलत घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!! घनश्याम!!!!!
शोभामोहन श्रीवास्तव
चइत अंधियारी पाख साते
पिंगल संवत्सर विक्रम संवत २०८०
शुभस्थान-महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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