घनाक्षरी
बन ले अवध आगे राम सीता लछमन,
ओरी ओरी दीया तुम बारौ मोरे गुँइया ।
फुलकँसिया लोटा में गंगाजल भरि लानौ,
तीनो मुरति पाँ पखारौ मोरे गुँइया।
कंचन के थार में कलसा सवाँर लानौ,
ओरी पारी आरती उतारौ मोरे गुँइया ।
चंदन मलागर के तिलक लगावौ माथे,
पाँव परि परि के जोहारौ मोरे गुँइया।
शोभामोहन
बर तरी खड़े हे बरतिया धुन
उत्ती मूड़ा ले आत हिय पहुना,
बुड़ती में धूर उड़ियात।
सुन सुन संदेस पिरित भरे,
जीव अउ तन सुख पात।।
अँगना आवत साठ पानी ओइछहूँ,
उँचहा पिढुलिया बइठार।
टीका टिपक फूल चाँउर छिंच के,
परघाहूँ आरती उतार।।
देश सेवा प्रन घर गाँव छोड़े,
झगरन्ता गे बजनीखार।
देश के नाम ऊँच कर आवत,
कोरी कोरी बैरी पछार।।
आनीबानी जेवन परुसिहौं मैं रुच रुच,
घर आही मोरे भरतार।
आँखी ओरवाँती चुहत टप टप,
ब इठे हौं करके सिंगार।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
-
गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
-
सैनिक के गोसइन के बिरहा पिंउरी धोवाये गवन कराये चलदेस तभो हें हस लगथे, निकले होबे छोड़त मन। पिंउरी धोवाये गवन कराये, रूप झुलत उही नैन सजन...
-
बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...
No comments:
Post a Comment