सगा सगाने गाँव में, अपन आप झन भूल ।
येती वोती देख झन, सब ए सेम्हर फूल।
खेलत खावत दिन कटत, सुतत सुतत अउ रात।
हीरा माटी में मिलत, कुछु कहि तौ कँझात।।
दही लेवना असन मन, पथरा होगे देख ।
पर ला बद्दी देत हे, कोन मेटही लेख।।
सुख के नगरी हे कहाँ, खोजत जग दिन रात।
मन थिराय बिन फेर तो, बनै नहीं कुछु बात।।
जीयत जागत तक हवै, ये संसारी प्रीत।
सुतत साठ समसान में, लेगत गाहीं गीत।।
बिन पानी के बुड़त हे, घाट बँधाये नाव।
कइसे होबे पार अउ, जाबे तैं घर गाँव।।
माया मतलावत हिया, धर धर सुंदर नाम।
जग ठकुराइन देख तो, मिलन न देवत राम।।
चिंतामणि चिंता हरे, खोजत आगे द्वार।
भलमानुस अब तो अपन, फरिका चिटिक उघार।।
कोन सुनै काला कहौं, बिरहा दुखः अपार।
एक डहर साजन गली, एक डहर संसार।।
हीरा मूठा भर उठा, कूहा ला झन जोड़।
कुछु नइ जाही संग में, दू गज तीखा छोड़।।
फकत पिया के रूप ला, देखौ नैन उघार।
का देखौ अउ आन ला, का देखौं संसार।।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Tuesday, 26 March 2024
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संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
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