बहुरिया (घनाक्षरी)
भिनसरहा ले उठ घर ला बहार झार पोछ लीप छरा छींच डारथे बहुरिया।
घर अँगना सँवार ओढ़ना काँच पखार झटकुन नहा खोर डारथे बहुरिया ।
चुक ले पहिर ओढ़ अउ मुड़ कान कोर माँग में सेंदुर रेख पारथे बहुरिया।
चरचर ले सुघर एड़ी भर के माहुर लिख दुनो गोड़ ला सिंगारथे बहुरिया।
दई देवता सुमर सरधा भरे घुमर कुलदेबी आरती उतारथे बहुरिया।
घुटका घाले सुघर, चूरी पैजन बजात रँधनी के खोली ला सँभारथे बहुरिया।
दनन दनन राँध भात साग रोटी पीठा बाँट पोरस के किरवारथे बहुरिया।
सास में दाई ससुर में ददा के रूप देख उही अनुसार बेवहारथे बहुरिया।
ननद ला गिंया गड़ी देवर ला भाई कस जान के
मया के मधु झारथे बहुरिया।।
पति के पिरित में समाय सब सुख बीजा पाँव पर चरन पखारथे बहुरिया।
तुलसी के चौरा में संझा के बेरिया सुघर रिगबिग दियना ला बारथे बहुरिया।
देवता कुरिया दीया राखके अँजोरा पाट, माथ टेक देव ला पुकारथे बहुरिया।
बेटवा तो एके कुल तारथे सँभारथे अउ दुनो कुल बोहथे अउ तारथे बहुरिया।।
शोभामोहन भारत के रतन तिरिया ला सरधा ले धोकर जोहारथे बहुरिया।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Tuesday, 26 March 2024
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