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हो गया विश्व राममय आज।(श्रृंगार छंद)
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हो गया विश्व राममय आज।
गये प्रभु मंदिर मध्य विराज।।
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हुआ अनुपम मंदिर निर्माण।
आज जन जन के पुलकित प्राण।।
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जहाँ जन्मे थे प्रभुवर राम।
दिव्य अति अवधपुरी सुखधाम।।
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सजा है घर घर वंदनवार।
रंगोली चौंक बने घर द्वार।।
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लगी भक्तों की सघन कतार।
हो रही चहुँदिशि जयजयकार।।
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चढ़ावा चढ़ा रहे धनवान।
मंत्र पढ़ रहे वेद विद्वान।।
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हृदय का झंकृत है हर तार।
गा रहे हरिगुन सब परिवार।।
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बज रहे झालर घंटा शंख।
पा रहे दर्शन राजा रंक।।
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गा रहे कवि नित मंगलगान।
शुभ घड़ी राम प्रतिष्ठा प्राण।।
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मिट गये उर के सब संताप।
दुष्ट भी कर रहे हैं हरि जाप।।
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किया था बाबर ने विध्वंस।
पाँच सदियों तक झेले दंश।।
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मिट गये लड़ लड़ कितने वीर।
अवध सरयू नदिया के तीर।।
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बड़े गौरव का क्षण है आज।
किया प्रभु भक्तों ने प्रभु काज।।
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किसी ने रामकाज के हेत।
केश कर दिये श्याम से सेत।।
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अनगिनत गोली झेले वक्ष।
अडिग रहकर मंदिर के पक्ष।।
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राम के लिए दिये तन त्याग।
अमर हो गये सभी धनभाग।।
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रामद्रोही मुख मलिन अतीव।
हिल गयी सत्तासुख की नीव।।
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भक्त दृगजल से करकर स्नान।
कर रहे हैं मुक्त हस्त से दान।।
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कवित्री कवि कर स्तुति गान।
प्रसंशारत रघुवर भगवान।।
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सनातन गौरव का उत्थान।
देख हैं चकित विश्व विद्वान।।
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हुआ जब सब विवाद का अंत।
मुदित अति हर्षित सज्जन संत।।
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सभी को दर्शन की है आस।
मिलेंगे प्रभु जी है विश्वास।।
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शोभामोहन श्रीवास्तव
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वितीया
विक्रम संवत २०८०
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शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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