Saturday, 2 March 2024

तरंग शेखर छन्दसोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।

तरंग शेखर छन्द
सोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।

[ २१ मात्रिक,१४-७ यति चरणांत लघु लघु]
                
लाललाला लाललाला, लाललाला

जब जनमही फेर मरही, तोर चोला।।
फकत चौरासी घुमरही, तोर चोला।।
काय धरही तब उबरही, तोर चोला।
सोच कइसे भव उतरही, तोर चोला।।

नरक भोगत छटपटावत, तोर चोला।
जुग जनम ले दुःख पावत, तोर चोला।।
रोज दिन दिन हे खियावत, तोर चोला।।
दुखनगर में दिन पहावत, तोर चोला।।

कहाँ चटके गति गनाये, तोर चोला।
रीस भरके तमतमाये, तोर चोला।।
लोभ लिपसा में मोहाये, तोर चोला।
सोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...