सोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।
[ २१ मात्रिक,१४-७ यति चरणांत लघु लघु]
लाललाला लाललाला, लाललाला
जब जनमही फेर मरही, तोर चोला।।
फकत चौरासी घुमरही, तोर चोला।।
काय धरही तब उबरही, तोर चोला।
सोच कइसे भव उतरही, तोर चोला।।
नरक भोगत छटपटावत, तोर चोला।
जुग जनम ले दुःख पावत, तोर चोला।।
रोज दिन दिन हे खियावत, तोर चोला।।
दुखनगर में दिन पहावत, तोर चोला।।
कहाँ चटके गति गनाये, तोर चोला।
रीस भरके तमतमाये, तोर चोला।।
लोभ लिपसा में मोहाये, तोर चोला।
सोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
लाललाला लाललाला, लाललाला
जब जनमही फेर मरही, तोर चोला।।
फकत चौरासी घुमरही, तोर चोला।।
काय धरही तब उबरही, तोर चोला।
सोच कइसे भव उतरही, तोर चोला।।
नरक भोगत छटपटावत, तोर चोला।
जुग जनम ले दुःख पावत, तोर चोला।।
रोज दिन दिन हे खियावत, तोर चोला।।
दुखनगर में दिन पहावत, तोर चोला।।
कहाँ चटके गति गनाये, तोर चोला।
रीस भरके तमतमाये, तोर चोला।।
लोभ लिपसा में मोहाये, तोर चोला।
सोच काबर प्रभु बनाये, तोर चोला।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
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