राम भजन पांडुलिपि
देह खिरै जग घूमत-घामत, रूप बचै न बचै सुघराई।
मान बचै न गुमान बचै सुन, ज्ञान बचै न बचै चतुराई।
बाप बचै न धिया सुत साजन, मातु बचै न बचै सग भाई।
तेन घड़ी बस एक सहायक, छाहित रूप बचै रघुराई।
शोभामोहन
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे
(कलाधर छंद)
लोभ हे न मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाय रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रोग हे न शोक हे न जेवनी न बाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
कोहे न द्रोह हे न छोह हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
गेह के न मेह के न देह के गुलाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे।।
रंग चंग संग लोभ हे न
तामझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाम रूप में बुड़े गुनान झीमझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाव गाँव भेव हे न जेब में छदाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ना जनास हे झड़ी झकोर जाड़ घाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
विश्व बियाप्त दुःख सुःख में लगे बिराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शांत चित्तवृत्ति हे जिहाँ रमे अराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शोभामोहन
13/05/2023
दसपदी राम स्तुति
चरण कमल रघुनायक, सुखदायक है।
नख शिख रुचिर ललाम जय जय राम लला।।१।।
सुर नर ऋषि मुनि सेवत, सुख लेवत है।
शरण तरण भव पार, जय जय राम लला।।२।।
अटल अमल जगवंदित, विधि रंजित हे।
प्रबल सबल अविकार जय जय राम लला।३।।
धरम-करम शुभ धारक, अरि घालक हे।
अखिल भुवन करतार जय जय राम लला।।४।।
भजन विरत बिसरे तन, जन संतन हे।
नवल धवल भर भाव, जय जय राम लला।।५।।
मुकुट वसन अति सुंदर हे, मणि मंदिर हे।
करषत लटकत हार, जय जय राम लला।।६।।
झनक कनक मणि करधनी, ध्वनि मोहक हे।
जय जय अवध भुवाल जय जय राम लला।।७।।
तरुण अरुण पद कोमल,धुति उज्जवल हे।
जय जय नयन विशाल, जय जय राम लला।।८।।
शशि सम मुखमणि उज्जवल, बाहू बल है।
जय जय उर वनमाल जय जय राम लला।।९।।
दसन वसन रविमंड़ित, जगपंड़ित हे।
तिलक रघुकुल भाल, जय जय राम लला।।१०।।
शोभामोहन श्रीवास्तव ट
२८/०८/२०२२
तोर भरोसा गाड़ी राजा राम हे ।
अब चाहे कर मोला पार।
चाहे कहूँ नरक मा डार।।
मरे जिये ले मोला नइ कुछु काम हे।
तोर भरोसा गाड़ी राजा राम हे।।
सब में बसे स्वरूप तुम्हार।
तभो कहूँ नइ पावत पार ।
जानिस ओकर चोला चारोधाम हे।।
तोर भरोसा गाड़ी राजा राम हे।
शोभामोहन पार गोहार।
कलकुत करथे कर जोहार।।
साँस साँस मा लेवत तोरे नाम हे।
तोर भरोसा गाड़ी राजा राम हे ।।
शोभामोहन
०२/११/२०२०
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
हो गया विश्व राममय आज।(श्रृंगार छंद)
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
हो गया विश्व राममय आज।
गये प्रभु मंदिर मध्य विराज।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
हुआ अनुपम मंदिर निर्माण।
आज जन जन के पुलकित प्राण।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
जहाँ जन्मे थे प्रभुवर राम।
दिव्य अति अवधपुरी सुखधाम।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
सजा है घर घर वंदन वार।
रंगोली चौंक बने घर द्वार।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
लगी भक्तों की सघन कतार।
हो रही चहुँदिशि जयजयकार।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
चढ़ावा चढ़ा रहे धनवान।
मंत्र पढ़ रहे वेद विद्वान।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
हृदय का झंकृत है हर तार।
गा रहे हरिगुन सब परिवार।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
बज रहे झालर घंटा शंख।
पा रहे दर्शन राजा रंक।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
गा रहे कवि नित मंगलगान।
शुभ घड़ी राम प्रतिष्ठा प्राण।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
मिट गये उर के सब संताप।
दुष्ट भी कर रहे हैं हरि जाप।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
किया था बाबर ने विध्वंस।
पाँच सदियों तक झेले दंश।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
मिट गये लड़ लड़ कितने वीर।
अवध सरयू नदिया के तीर।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
बड़े गौरव का क्षण है आज।
किया प्रभु भक्तों ने प्रभु काज।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
किसी ने रामकाज के हेत।
केश कर दिये श्याम से सेत।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
अनगिनत गोली झेले वक्ष।
अडिग रहकर मंदिर के पक्ष।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
राम के लिए दिये तन त्याग।
अमर हो गये सभी धनभाग।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
रामद्रोही मुख मलिन अतीव।
हिल गयी सत्तासुख की नीव।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
भक्त दृगजल से करकर स्नान।
कर रहे हैं मुक्त हस्त से दान।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
कवित्री कवि कर स्तुति गान।
प्रसंशारत रघुवर भगवान।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
सनातन गौरव का उत्थान।
देख हैं चकित विश्व विद्वान।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
हुआ जब सब विवाद का अंत।
मुदित अति हर्षित सज्जन संत।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
सभी को दर्शन की है आस।
मिलेंगे प्रभु जी है विश्वास।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
शोभामोहन श्रीवास्तव
मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वितीया
विक्रम संवत २०८०
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे
(कलाधर छंद)
लोभ हे मोह हे न शोक हे न काम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ज्ञान के गुमान हे न हीनमान ध्यान हे।।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रात प्रात मध्यकाल दिव्य नाम प्रान हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
भक्ति भाव ले भरे भुलाये रूप चाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
प्रीत में पगाय हे अनाम हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
रोग हे न शोक हे न जेवनी न बाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
कोहे न द्रोह हे न छोह हे अकाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
गेह के न मेह के न देह के गुलाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे।।
रंग चंग संग लोभ हे न
तामझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाम रूप में बुड़े गुनान झीमझाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
नाव गाँव भेव हे न जेब में छदाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
ना जनास हे झड़ी झकोर जाड़ घाम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
विश्व बियाप्त दुःख सुःख में लगे बिराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शांत चित्तवृत्ति हे जिहाँ रमे अराम हे।
तेन शुद्ध चेत में बिराजमान राम हे। ।
शोभामोहन
13/05/2023
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
आराध्य तुम्हारे शंभु विष्णु।
जग में तुम हो सबसे सहिष्णु।
लेकिन तुम अब बन राम कृष्णु।।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
अब फुफकारो बन शेषनाग।
वक्षस्थल में धधकाओ आग।
धोने कलंक के कठिन दाग।।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
जागा है पुण्यों का प्रताप।
अवसर आया चल द्वार आप।
सुन युग परिवर्तन कदम चाप।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
सुन सिसकी पावन गंग धार।
खंडित मंदिर की सुन पुकार।
माँ का आँचल जब तार तार।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
तुम महाकाल के रूप धार।
पशुवृत्ति का करने संहार।
करने कुठार से कठिन वार।
जागो रे मेरे प्यारे, माँ भारती के लाल।
शोभामोहन
पाटन
०१/०१/२०२२
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
-
गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
-
सैनिक के गोसइन के बिरहा पिंउरी धोवाये गवन कराये चलदेस तभो हें हस लगथे, निकले होबे छोड़त मन। पिंउरी धोवाये गवन कराये, रूप झुलत उही नैन सजन...
-
बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...
No comments:
Post a Comment