६/
नाम देवता का रखें, करे राक्षसी काम।
बदले रंग सियार यूँ, आप हुए बदनाम।।
७/
नष्ट फसल को कर रहे, उगकर खरपतवार।।
अब किसान को चाहिए, करे उचित उपचार।।
८/
सूअर के बच्चे कहे, गाय हमे तू पोस।
बछड़ा बिलखे भूख से, किस्मत अपनी कोस।।
९/
टिड्डे हरे सफेद की, जोड़ी बनी अनूप।
बिन विवेक बिन ज्ञान के, चले अंधेरे कूप।।
१०/
कौवे सारे कोसते, मृत्यु मनाते चील।।
मगर शेर सरमस्त तो, सबको करे जलील।।
११/
बिल्ली बोली शेर से, क्रोधित होकर आज ।
अब से वन में आपका, नहीं चलेगा राज।।
१२/
कौवे कोसे रातदिन, मौत मनाये चील।।
मगर शेर तो शेर है, सबको करे जलील।।
१३/
१४/
मुफतलाल ने देश को, लगा दिया है रोग।
चींटी चिड़िया भी हँसे, देख बिकाऊ लोग।।
१५/
बनिये लूट बजार के, किये नगद व्यापार।।
खड़े बिकाऊ लोग जब, बिकने को तैयार।
१६/
करे मलाई चट सफा, फिर भी रहे उदास।
इस प्रजाति की बिल्लियाँ, हैं भारत के पास।।
१७/
बिकने को तैयार जब, जगह-जगह पर लोग।
सस्ता सौदा देख के, चतुर करे संजोग।।
१८/
कोयल हैं वनवास में, कौंवे गाते गीत ।
कई दशक से चल रही, अब खलती यह रीत।।
१९/
रहे मयूरी कैद में, करे बंदरिया नाच।
२०/
सरकारी अनुदान खा, लेते नहीं डकार।
अवसरवादी भेंड़िये, झूठे ठग मक्कार ।।
२१/
सूअर उल्लू के लिए, रो ले तूँ घड़ियाल।
खतरनाक यह खेल है, नहीं बचेगें बाल।।
२२/
घर वालो से दुश्मनी, बाहर वाले यार।
२३/
देशविरोधी भेंड़िये, पानी पी दिन रात।
माल मलीदा ठूँस के, करें फालतू बात।।
२४/
नागनाथ नाराज हैं, साँपनाथ हैरान।
अर्जुन के तुणीर से, सटिक लगे जब बान।।
२५/
साँप सपोले दोगले, उतर गये मैदान।
सटिक निशाने पर लगे, अर्जुन तेरे बान।।
२७/
कब कौंए के श्राप से, मरता कोई ढ़ोर।
चीख चीख के रातदिन, बस होता कमजोर।।
२८/
घोड़े सब भूखे यहाँ, खायें गधे पनीर।
गधे-गधे फिर भी रहे, ईष्या भरे शरीर।।
२९/
बुनें कोयलें घोसलें, कौंवी देवें अंड।
नहीं चलेगा दोगला, पंथी का पाखंड।।
३१/
साँप बिच्छुओं को पकड़, करने को उपचार।
सब औजारों के सहित, वैधराज तैयार।।
३२/
सब नागों को नाथ दो, वैधराज इस बार। ।
विषदंतों को तोड़ दो, भले करें फुफकार।
३३/
लगे बिलबिलाने सभी, अस्तीनों कें साँप।
बीन सपेरे की बजी, नाचें थरथर काँप।।
३४/
लोकतंत्र के वृक्ष में, अमरबेल का जाल।
आच्छादित चारो तरफ, फिर भी चुप घड़ियाल।।
३४/
लोकतंत्र के सामने, प्रश्नचिन्ह है आज।
दोनों पक्ष समान तो, क्यों कोई नाराज।।
३५/
श्रद्धा को छलने लगी, चिंतन की तलवार।
नहीं अपेक्षित थी मगर, खीची गयी दिवार।।
३६/
बाहर से जो आ गये, कूद फाँद दीवार।
घरवालों को आज वे, दिखा रहे तलवार।।
३७/
जंगल को सिर पर उठा, मढ़ मढ़ सब पर दोस।
प्यास लगी जब स्वान को, लगा चाटने ओस।।
३८/
अंधी बहरी भीड़ को, मूरख बना श्रृगाल।
चला रहा है मूसली, सिर उख्खल में डाल।।
३९/
३७/
रोंहिग्या से प्रीत है, घर वालों से बैर।
ऐसे लोगों की नहीं, अब भारत में खैर।।
इन्हें सब मिल धिक्कारो।
देश की गति सुधारों।।
३८/
द्रोणाचार्य जब भी हुए, कौरवदल की ओर।
कुरुक्षेत्र मैदान में, युद्ध हुआ तब घोर।।
३९/
अभिमन्यु लड़ते मरा, बचा लिया निज साख।
कौरव दल का वंश तो, मगर मिल गया राख।।
४०/
राॅबिन बनकर आ गया, रामलाल का पुत्र।
धर्म भ्रष्ट अब बाँचता, उल्टा पुलटा सूत्र।।
चला जब धर्म का धंधा।
माल में बिक गया अंधा।
४३/
बालीवुडिया भाड़ के, नशाखोर को बेल।।
न्यायतंत्र की देहरी, धन की बनी रखेल।।
४४/
पत्थरबाजी पर करो, चर्चा सारे लोग।
ये कोई संयोग या, फिर है विफल प्रयोग।।
४५/
मँहगाई पर हम नहीं, अभी करेंगें बात।
देश जलाते हैं उन्हे, मारो जूता लात।।
शीष का मोल लगाओ (पुच्छल दोहा)
लामबंद हैं भेंड़िये, तुमसे करने युद्ध।
और शांति की खोज में, तुम बन बैठे बुद्ध।।
बहुत तुम पछताओगे।
सभी मारे जाओगे।।
बरणभेरी ध्वनि के बिना, छद्म युद्ध आरंभ।
अब जो है बलवान वो, गाड़ेगा स्तंभ।।
अभी तो ये है झाँकी।
बहुत होना है बाकी।।
दुष्टों के प्रतिकार बिन, नहीं बचोगे शेष।
और इस चुप्पी की सजा, भुगतेगा यह देश।
युद्धभूमि में आओ।
शीष का मोल लगाओ।।
तुम्हें नियति ने है चुना, धर्म युद्ध के हेतु।
होगा मिलजुल पहल से, सुदृढ़ सनातन सेतु।।
अरे अब सोच न ज्यादा।
बना पक्का इरादा।।
मरने का है शौक तो, कर लो सीमा पार।
सजग सिपाही हैं खड़े, स्वागत को तैयार।।
मृत्यु से ब्याह रचाने।
चले आओ दीवाने।।
===================
रंग बदला गिरगिट बहुत, छुपने विरत प्रयास।
मंजर बदला देखकर, लेकिन बहुत उदास।।
मरने का है शौक तो, करना सीमा पार।
सजग सिपाही हैं खड़े, स्वागत को तैयार।।
मृत्यु से ब्याह रचाने।
चले आओ दीवाने।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
११ /०६ /२०२२
महुदा
बदलो भारत का संविधान
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
सत्ताधीशों विनय हमारी, सुनो करो नवयुग निर्माण।।
आतंकी के न्याय के लिए, कोठे खुलती आधी रात।
आम नागरिक ठगा हुआ बस, गुमसुम उसकी क्या औकात।।
दंगाई के जात पता का, जिस न्यायालय को ना ज्ञान।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
बहुसंख्यक की धर्म आस्था, जिसके आगे सबसे तुच्छ।
जेहादी की पैरोकारी, करते जब न्यायालय उच्च ।।
हूरियतो अलगाववादियों, को रखते जो प्राण समान।।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
पत्थरबाजों से हमदर्दी, बहुसंख्यक से घृणा दुराव।
देशविरोधी असुरदलों पर, है चुप्पी मुखमुद्रा भाव।।
न्यायतंत्र को दीमक बनकर, चाँटे कुर्सी चढ़ श्रीमान।।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
सेना को कर रखा निहत्था, आतंकी को दे हथियार।
काश्मीर से घर घर अफजल, निकले ऐसी चली बयार।।
दंगाई के लगे पोस्टर, लेते तुरत स्वयं संज्ञान।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
नहीं मारना आतंकी को, फकत डराना रबर बुलेट।
न्यायाधीश कहें तब सैनिक, गाँव आ गये कफन लपेट।।
पाले पोंसे और बढ़ायें, शांतिप्रिय को दे अनुदान।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
न्यायाधीश कहा करते है, करो नहीं व्यवहार कठोर ।
आतंकी खूंखार भले हो, चाहे कितना पापी घोर।।
देश विरोधी तत्वों का अब, करने पक्का पुष्ट निदान।।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
हत्यारों की प्राण नहीं लो, उन्हे डराओ चला गुलेल।
लोकतंत्र की आड़ लगाकर, न्यायाधीश करें जब खेल।
कितना गहरा खेल रचा है, आम जनो को रख अंजान।।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
सेक्यूलरिज्म की ढपली का, नहीं सुहाता अब तो राग।
जो भी अत्याचारी उनको, सैनिक पायें गोली दाग।।
सेनाजन भी बढ़े प्रतिष्ठा, जागे भारत का अभिमान।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
रोजगार दो जज कहते है, बढ़ती जनसँख्या पर मौन।
ऐसे न्यायालय पर बोलो, अब विश्वास करेगा कौन।।
खून बहाने दे आजादी, शिवजल पर जो देते ज्ञान।।
बहुत विषमतायें हैं बदलो, अब तो भारत का संविधान।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१५/०५/२०२१
सब लुटेरों ने लूटा
गजनी ने लूटा सिकंदर ने लूटा।
खूनी खूखार वा खिलंदर ने लूटा।।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।
बाबर ने लूटा वा अकबर ने लूटा।
बौद्धिक आतंकी धुरंधर ने लूटा।।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।।
तैमूर टीपू और भगोड़ों ने लूटा।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।
ब्रिटेन से आकर फिरंगी ने लूटा।
भारत के गिरगिट दोरंगी ने लूटा।।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।।
दुष्टों ने लूटा दरिन्दों ने लूटा।
नौकरशाही के कारिन्दों ने लूटा।।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।।
नेता बने बहरुपयों ने लूटा,
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।।
वामपंथी गद्दारों ने लूटा।
भारत माता का खजाना सब लुटेरों ने लूटा।।
शोभामोहन
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
चरदिनिया जिनगानी राम राम बोल
भारत से प्यारा जिनको पाकिस्तान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
रोना गरीबी का रोते दिन रात।
बढ़ती जनसंख्या पर करते ना बात।।
भारत की गरिमा का जिनको ना ध्यान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
बेरोजगारी का गाते जो गीत।
मुफतखोरी की भाती जिनको रीत।।
अकबर बाबर को बताते महान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
श्रद्धा के टुकड़े करता आफताब।
हत्याओं पर चुप्पी लगती खराब।।
ताले जड़े जिनकी जिनकी जुबान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
करते हैं लोगों को जो इस्तेमाल।
अब उनकी गलने न पायेगी दाल।।
भूले जो अपने पुरखों की पहचान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
चूहा बन खोदें जो घर की दीवार।
भारत के दुश्मन लगते जिनके यार।।
भारत का खाते गाते पाकिस्तान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
कानूनों से जो हैं करते खिलवाड़।
उनके धन दौलत को करने कबाड़।।
बुलडोजर चलाने उनके मकान।।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
आपस में मिलजुल रहो सारे लोग।
मिट पायेगा तब भयंकर यह रोग।।
कट्टरता सिखलाने खोले दुकान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१५/१२/२०२२
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
भारत से प्यारा जिनको पाकिस्तान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
रोना गरीबी का रोते दिन रात।
बढ़ती जनसंख्या पर करते ना बात।।
भारत की गरिमा का जिनको ना ध्यान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
बेरोजगारी का गाते जो गीत।
मुफतखोरी की भाती जिनको रीत।।
अकबर बाबर को बताते महान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
श्रद्धा के टुकड़े करता आफताब।
हत्यायें लगती नहीं क्यों खराब।।
ताले जड़े जिनकी जिनकी जुबान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
करते हैं लोगों को जो इस्तेमाल।
अब उनकी गलने न पायेगी दाल।।
भूले जो अपने पुरखों की पहचान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
चूहा बन कुतरे जो घर की दीवार।
भारत के दुश्मन लगते जिनके यार।।
भारत का खाते गाते पाकिस्तान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
कानूनों से जो हैं करते खिलवाड़।
उनके धन दौलत को करने कबाड़।।
बुलडोजर चलाने उनके मकान।।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
आपस में मिलजुल रहो सारे लोग।
मिट पायेगा तब भयंकर यह रोग।।
कट्टरता सिखलाने खोले दुकान।
ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१५/१२/२०२२
*भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है*
अपनों को पहचानने में अब, नहीं कोई कठिनाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
रंग बसंती देश रंगा तब, मचल रही तरुणाई है।
देशविरोधी के विनाश को, तलवारें लहराई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
देश धर्म की रक्षा करने, अपनी बारी आई है।
सभी भारतीयों ने मिलकर, अब सौगंध उठाई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
छल प्रपंच की राजनीति ने, विकट परिस्थिति लाई है।
कट्टर विषबेलों को कुचलने, करनी हमें लड़ाई है।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
मुगल लुटेरों से लड़ते, पुरखों ने उमर गँवाई है।
उनका अभिनंदन करने की, अब तो शुभ घड़ी आई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
अभी नहीं तो कभी नहीं बस, अंतिम यही लड़ाई है।
योद्धाओं हथियार संभालो, विधि ने बिगुल बजाई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
जात पात के रोग भुले बिन, अब तो नहीं भलाई है।
गला काटने घात लगाये, बैठा निठुर कसाई हैं।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
बहू बेटियों की इज्जत और, प्राण पे जब बन आई है।
हो जाओ अब आगबबूला, गहरी विपदा छाई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
घर दुकान चिन्हित कर जिसने, खींची दियासलाई है।
फिर उससे क्या भाईचारा, फिर वह कैसा भाई है।।
भारतमाता की जय बोले, वही हमारा भाई है।।
शोभामोहन
१४/०१/२०२२
रायपुर
रहो संगठित हिन्दुओं
रहो संगठित हिन्दुओं, यदि रहना है शेष।।
आश्रय लेने आपके, पास नहीं हैं देश।
रहो संगठित हिन्दुओं, अगल बगल को झाँक।।
एक ओर है चीन तो, एक ओर नापाक।
रहो संगठित हिन्दुओं, करने अरि प्रतिकार।
नगर गाँव में देश के, बैठे हैं गद्दार।।
रहो संगठित हिन्दुओं, लड़ना भिड़ना छोड़।
करवट लेते देश में, अपनी शक्ति जोड़।।
रहो संगठित हिन्दुओं, देख हाल यूक्रेन।
भागे जो सब छोड़कर, समरकाल में ऐन।।
रहो संगठित हिन्दुओं, मँहगाई लो झेल।
करने दो सरकार को, अरि से तांडव खेल।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०९/२०२२
वृंदावन धाम
हम भारतवासी ही जग को सुंदर सुखद बनायेंगे (ताटंक छंद)
हम भारतवासी ही जग को,
सुंदर सुखद बनायेंगे ।
नव दधीचि बन अस्थि मज्जा,
देकर विश्व सजायेंगे ।।
भले तिरस्कृत कर दुष्टों ने,
घाव दिया धिक्कारा है ।
वसुधा ही कुटुम्ब है अपना,
तो सदियों से नारा है ।।
करुणा प्रेम हमारे भीतर,
हम तो वही लुटायेंगे।।
हम भारतवासी ..............
यज्ञकुण्ड में आहुति देकर,
सबका क्षेम मनाते है ।
बरगद पीपल नीम पूजा के,
दीपदान कर आते है ।।
है अस्तित्व प्रकृति के कारण,
मिलकर चलो रिझायेंगें ।।
हम भारतवासी ही.................
गौ माता की पूजन करके,
अर्ध्य सूर्य देने वाले ।
डुबकी लेकर नदियों के तट,
पुण्य लाभ लेने वाले ।।
सत्य सनातन की ताकत का,
हम लोहा मनवायेंगे ।।
हम भारतवासी ......................
घर घर इस भारत के जन्मे,
ईशभक्त बालक बाला।
सकल विश्व को ज्ञानपुंज बन,
देने अमृत का प्याला।।
धर्मपरायणता संयम के, लाभ हजार गिनायेंगे।।
हम भारतवासी..........................
वेद शास्त्र की वैज्ञानिकता
आँगन में तुलसी माता।
मस्तक चंदन तिलक सदा शुभ,
मन में शीतलता लाता।।
ज्ञान ध्यान विज्ञान से जग को,
नतमस्तक करवायेंगे ।।
हम भारतवासी ....................
शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
०९/०४/२०२०
हिन्दू राष्ट्र का लक्ष्य बनाओ
हिन्दू राष्ट्र का लक्ष्य बनाओ, एक ध्वजा केसरिया थाम।
हिन्दू हिन्दू भाई हैं सब, नारा एक ही जय श्रीराम।।
बस अखंड भारत का सपना, मिलकर देखो हिन्दू लोग।
ऊँच नीच और जात पात के, बिसरा दो अब सारे रोग।।
भ्रष्टाचार गरीबी रोना, छोड़ो लड़ो करो पुरुषार्थ।
कृष्ण सारथी स्वयं बनेंगे, आप बनो पहले तो पार्थ।।
जब तक हिन्दू राष्ट्र ना बने, करो प्रयत्न प्रबल अविराम।।
लेन देन करने से पहले, पूछो क्या है और नाम गाम।।
संध्या पूजन शूरू करो अब, गाँव मुहल्ला सबको जोड़।
पौरुष और पुरुषार्थ दिखाओ, जिसे न कोई पाये तोड़।।
बच्चों को तलवार चलाने, नित्य कराओ अब अभ्यास।
तभी राक्षसी वृत्ति विकट का,कर पाओगे मिलजुल नाश।।
धर्म युद्ध आरंभ हो चुका, सतत रहो लड़ने तैयार।
दुश्मन से पहले अब तुमको, करना होगा उन पर वार।।
सत्ता से मत करो अपेक्षा, युद्ध छिड़ी जब आर और पार।
स्वयं समर्थ बिना होवे अब, नहीं रोग का है उपचार।।
बिना लक्ष्य के मत निकलो तुम,अस्त्र शस्त्र करने संधान।
सेनापति पहले चुन लो और, बैरी की कर लो पहचान।।
रुपया कमा सजाये जो घर, और खरीदे ब्रांडेड कार।
सारा पाया खो दोगे तुम, नहीं बने जो जिम्मेदार।।
रोज पलायन करते हिन्दू , देखो तो उनको एक बार।
उजड़े सपनो का घर देखो, आँखे खोलो करो विचार।।
जहाँ शांतिप्रिय हैं बहुसंख्यक,वहाँ हिन्दुओं का क्या हाल।
देखो जाकर उन गलियों में, आँखे खोल करो पड़ताल।
अगर दलन करना दुष्टों का,अगर मिटाना है दुख क्लेश।
उनको सत्ता में बैठाओ, जिनके हाथ सुरक्षित देश।।
शोभामोहन
१६/०२/२०२२
हो जाओ तैयार सनातनी जागो रे। ।
छाती में धधकाओ ज्वाला।
राणा और शिवाजी वाला।।
चूको मत इस बार सनातनी जागो रे।
जागो रे इस बार सनातनी जागो रे।।
हो जाओ तैयार सनातनी जागो रे। ।
राष्ट्रधर्म हित व्रत अखंड धर।
छाती में ज्वाला प्रचंड भर।।
लहराओ तलवार सनातनी जागो रे।
जागो रे इस बार सनातनी जागो रे।
हो जाओ तैयार सनातनी जागो रे।
देश धर्म रक्षक बन जाओ।
बैरी के आगे तन जाओ।।
कर गर्जन हुँकार सनातनी जागो रे ।
जागो रे इस बार सनातनी जागो रे।।
हो जाओ तैयार सनातनी जागो रे। ।
शोभामोहन लिख लिख गाये।
राष्ट्रधर्म की अलख जगाये।।
करके तनिक विचार सनातनी जागो रे।
जागो रे इस बार सनातनी जागो रे।।
हो जाओ तैयार सनातनी जागो रे। ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०२/०९/२१
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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