Saturday, 2 March 2024

राष्ट्र जागरण राष्ट्रप्रेम की हिन्दी रचनाओं की पांडुलिपि

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राष्ट्र जागरण राष्ट्रप्रेम की हिन्दी रचनाओं की पांडुलिपि

डिजिटल हुआ इंडिया अपना,
नकद नारायण का क्या काम।। 

देह खिरै जग घूमत-घामत, रूप बचै न बचै सुघराई।
मान बचै न गुमान बचै सुन,  ज्ञान बचै न बचै चतुराई।
बाप बचै न धिया सुत साजन, मातु बचै न बचै सग भाई।
तेन घड़ी बस एक सहायक, छाहित रूप बचै रघुराई।

शोभामोहन




हम भारतवासी ही जग को सुंद सुखद बनायेंगे (ताटंक छंद) 



हम भारतवासी ही जग को,

सुंदर सुखद बनायेंगे ।

नव दधीचि बन अस्थि मज्जा,

देकर विश्व सजायेंगे ।। 


हमे तिरस्कृत कर दुष्टों ने ,

घाव दिया धिक्कारा है ।

वसुधा ही कुटुम्ब है अपना,

तो सदियों से नारा है ।।

करुणा प्रेम हमारे भीतर,

हम तो वही लुटायेंगे।।

हम भारतवासी .............. 


यज्ञकुण्ड में आहुति देकर,

सबका क्षेम मनाते है ।

बरगद पीपल नीम पूजके,

दीपदान कर आते है ।।

है अस्तित्व प्रकृति के कारण,

मिलकर चलो रिझायेंगें ।।

हम भारतवासी ही................. 


गौ माता की पूजन करके,

अर्ध्य सूर्य देने वाले ।

डुबकी लेकर नदियों के तट,

पुण्य लाभ लेने वाले ।।

सत्य सनातन की ताकत का,

हम लोहा मनवायेंगे ।।

हम भारतवासी ...................... 


घर घर इस भारत के जन्मे, 

ईशभक्त बालक बाला।

सकल विश्व को ज्ञानपुंज बन,

देने अमृत का प्याला।।

धर्मपरायणता संयम के, लाभ हजार गिनायेंगे।।

हम भारतवासी.......................... 


वेद शास्त्र की वैज्ञानिकता

घर आँगन तुलसीमाता।

रोली चंदन तिलक सदा शुभ,

माथे में टीका जाता।।

ज्ञान ध्यान विज्ञान से जग को,

नतमस्तक करवायेंगे ।।

हम भारतवासी .................... 


शोभामोहन श्रीवास्तव

रायपुर छत्तीसगढ़ 

०९/०४/२०२०




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जय जय भारत कहना प्यारे
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भारतीय बन रह ना प्यारे।
जय-जय भारत कह ना प्यारे।।

पद चिन्हों पर लोकतंत्र के।
सहचर वाले मूल मंत्र के ।।
सुपथ धार में बह ना प्यारे ।।
जय-जय भारत कह ना प्यारे ।।

हिन्दी का सम्मान जरूरी ।
संस्कृति की पहचान जरूरी ।।
सब धर्मो को सह ना प्यारे ।
जय-जय भारत कह ना प्यारे।।

संविधान कानून भरोसे ।
भारतीय पहचान भरोसे ।।
तय दिवारें ढ़हना प्यारे ।
जय-जय भारत कहना प्यारे ।।

देह अस्थि जब खून एक तो।
फिर ना क्यों कानून एक तो ।।
मानवता है गहना प्यारे ।।
जय-जय भारत कहना प्यारे ।।

वामपंथ अलगाव छोड़ दो ।
दो कौड़ी के भाव छोड़ दो ।।
ईष्या द्वेष न दहना प्यारे ।।
जय-जय भारत कहना प्यारे ।।

नियम नये बनाकर लाओ।
औ पालन उसका करवाओ  ।।
राजा मंत्री सुधिजन सारे   ।।
जय-जय भारत कहना प्यारे ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०४/२०२०

रोला छंद


घर घर में जब आज, तिरंगा ध्वज लहराया।
देश प्रेम का भाव, हृदय में सबके छाया।।
हर्षित गर्वित देश, धरा नभ वर्ण तिरंगा।
और मिली पहचान, दुष्टदल खल दोरंगा।।

शोभामोहन श्रीवास्तव


ब्रिटिश काल के नियम हटाओ
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देवभूमि यह तपोभूमि यह
वेद शास्त्र जीवन आधार।
देववृंद आराध्य हमारे,
आयुध वाहन सदा सवार।।१।।

गौरवशाली परंपरा में,
शस्त्र वीरवर था श्रृंगार ।
कौन शिखंडी बना गया फिर,
हमे छीन बरछी तलवार ।।२।।

क्या अपने सब अस्त्र-शस्त्र हम,
स्वयं रखे जा शस्त्रागार ।
नहीं-नहीं अँग्रेजी ताकत,
छीन-झपट हमसे हथियार।।३।।

आयुध गृह में जमा कराके,
शौर्य निशानी सब औजार ।
रखे छुपाकर सच्चाई को,,
सुनो सुनो उसको इक बार ।।४।।

देश हुआ आजाद हमारा,
मुखिया ने ना किया विचार।
सत्तर साल चिपक कुर्सी से,
रहे हमारे बन सरकार।।५।।

भारत के सब संसाधन पर,
देकर प्रथम उन्हें अधिकार।
संख्या बल मजबूत बनाया,
बहुसंख्यक को कर लाचार ।।६।।

रक्तबीज के वंशज तांडव,
अब तो करते आकर द्वार।
खड़े निहत्थे हाथ मले हम,
चुप सहते सब अत्याचार।।७।।

भूमि वीर से रहित हुई क्या ?
फले-फूले हिंसा व्यभिचार ।
दुष्टों से लोहा लेने अब,
सबको दो राजा हथियार।।८।।

ब्रिटिश काल का नियम हटाओ,
हो मानवता की जयकार ।
शोभामोहन विनती करती,
जन-जन के मन के उद्गार ।।९।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छ.ग.
०४/०४/२०२०

मनहरण घनाक्षरी 

१/

गमले में गोभी को उगाकर चिदंबरम, 

रूपया करोड़ो इस देश में कमाते थे। अखिलेश बाबू करा सैफई महोतसव, 

तड़क भड़क नाच नाचनी नचाते थे।  मायाबत्ती के जनमदिन पर चमचे तो, रूपयों से तौल  ताज हीरा पहनाते थे। 

आजम, अतीक, मुख्तार के आतंक पर, 

सपा बसपा के मुँह  दहीं जम जाते थे। 

२/

सुप्रिया दस एकड़ के, खेत में बोके बैगन, 

अरबों करोड़ों आमदनी कर जाती थी। 

दादी जैसी नाक वाली, करती थी कलाकारी, 

करोड़ों में बिके ऐसे पेंटिंग बनाती थी।

भू-माफिया दामाद को, इटलीवाली बाई तो, जगह जगह पर जमीन दिलाती थी।।


"माँ के सच्चे लाल जगो"


जागो जागो भारतवासी

पढ़ गीता संदेश जगो।

वेद शास्त्र उपनिषद आदि पढ़,

चलो बचाने देश जगो।।


अरे करोड़ हिन्दू में से,

माँ के सच्चे लाल जगो।

बलिदानों से ही भारत का, 

होगा ऊँचा भाल जगो।।


सदियों में अवसर आया है,

चलो मिटाने रोग जगो ।

जगो बगल में छुरा छुपाये,

खड़े कसाई लोग जगो।।

         

सर्वनाश से पहले पसरे, 

सन्नाटे को भाँप जगो।।

आतंकी के देख इरादे,

शत्रुनाश को आप जगो ।।


छल प्रपंच मद मत्सरता भर,

जागा है उन्माद जगो।

क्या मतलब जगने का यदि तुम, 

बर्बादी के बाद जगो ।।


भांति-भांति के भेस बनाकर,

घूम रहे जल्लाद जगो।

काला साया देश न निगले, 

बनकर तुम फौलाद जगो।।


मनोरोगियों के विनाश बिन, 

नहीं बचेगा देश जगो।

बिना तुम्हारे सज्य हुए अब, 

नहीं मिटेगा क्लेश जगो।।


ठौर ठिकाना एक यही है, 

मन में भरकर रोष जगो ।

नहीं जगे तो नहीं बचोगे,

जागो सब बेहोश जगो ।।


गला कट रहा है चुन चुनकर, 

अब तो होकर क्रुद्ध जगो। 

बिना बिगुल आरंभ चुका, 

यह अदृश्य सा युद्ध जगो।।


शत्रु तुम्हे डरपोक मानकर, 

लगा चुका है घात जगो। 

धर्म बचाने ऊँच नीच और, 

भूल जात और पात जगो।। 


मंडी में ना बिके नारियाँ

कटे ना बाल गोपाल जगो।

आस्तीन में छुपे साँप ये, 

डस ना लें तत्काल जगो।।


म्यांमार में विधर्मियों पर,

देख बौद्ध का वार जगो।

देशधर्म की रक्षा खातिर,

अब खींचो तलवार जगो ।


जगह जगह पर छुपे देश में,

गद्दारों के यार जगो ।

देश फूँकने वालों के संग,

दिल्ली की दरबार जगो।।


कैंडल मार्च निकालो मत अब,

कर लेकर तलवार जगो।

गद्दारों ने मिलकर लूटा,

सुनकर चीख पुकार जगो ।।


खुल्लमखुल्ला जो ललकारे,

सुनकर वक्ता श्रेष्ठ जगो ।

दफन हुआ इतिहास खोलकर,

पढ़ तत्काल सचेष्ट जगो ।।


जिनको डर लगता भारत में,

उन सबको ललकार जगो ।

बालीवुड के सर्वनाश को, 

अब होकर तैयार जगो।।


लाश भरी रेलों में आयी,

खुद पर कर धिक्कार जगो।

खून भरी तालाब बावली

सुन करके चित्कार जगो।।


देख अवार्ड वापसी गैंग की

करतूतें इस बार जगो ।

कम्यूनिस्टो की कहानियाँ

पढ़कर करो विचार जगो ।।


जय श्रीराम लगा जयकारा,

अब करने प्रतिकार जगो।

नहीं जगे तो मिट जाओगे,

मृत्यु खड़ा हर द्वार जगो ।।


शोभामोहन काम जगाना

पढ़कर तुम इतिहास जगो ।

भारत माता का तुम पर से,

टूटे मत विश्वास जगो ।।


शोभामोहन श्रीवास्तव



अगर आज भी नहीं जगे तुम तो,होगे बस इतिहास में। 


देश धर्म बिन क्या कर लोगे,दौलत रख के पास में।। 


धर्म लोप होता हो जाये,  


उसको तो परवाह नहीं। 


देश मिटे तो मिट जाये पर,  


जाने भले न ठौर कहीं।। 


नेता सेना हमें बचाये, बैठे हैं इस आस में ।।  


आज नहीं जागा हिन्दू तो,होगा बस इतिहास में।। 


जेहादी खतरा आगे है,  


लेकिन वो बेहोश पड़ा। 


छद्मखेल जाना ना समझा, 


नहीं धर्म हित कभी अड़ा।।  


वो तो जीता मरता है बस,धन दौलत की आस में। 


आज नहीं जागा हिन्दू तो,होगा बस इतिहास में।। 


शोभामोहन 


 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है।


मातरम वंदे अब देश गाने लगा।

कथनी करनी का अंतर मिटाने लगा।

मूकदर्शक हल्लाबोल करने लगे, 

देश यूँ एक सेवक जगाने लगा।। 

कोई अवतार है या चमत्कार है।

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।। 


गालियाँ देते उनको वो घर दे रहा। 

श्रेष्ठ प्रतिभाओं को उड़ने पर दे रहा।। 

करने को स्वच्छ सम्पूर्ण भारत डगर, 

देशद्रोही दरिंदों को डर दे रहा।। 

पाक के बिलबिलाये मददगार हैं। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है।। 


फर्जी एनजीओ में आज ताले पड़े। 

वामपंथी चरमपंथी  काले पड़े। 

चर्चे में आम लोगों की आवाज है, 

सनसनी वालों मुँह में छाले पड़े।। 

देश भी हो रहा अब समझदार है

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।। 


अफसरों की चढ़ोतरी बंद हो गयी। 

काले धन की बढ़ोतरी बंद हो गयी।। 

कर्मफल पापी अब खुद भुगतने लगे, 

दूसरे सिर मढ़ोतरी बंद हो गयी।। 

चैन से अब नहीं कोई गद्दार है। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है।। 


पाक को पस्त पागल बना के रखे। 

पाक मित्रों का दिल झनझना के रखे।। 

चीन अक्साई, पख्तुनवा, पी ओ के, 

पाँव जब भी रखे दनदना के रखे।। 

विश्व मुँह ताकता इतना दमदार है। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।। 


देश के रोग की सर्जरी कर रहा। 

कश्मीरी हिन्दू के घाव को भर रहा।। 

न्याय रक्षा पुनर्वास द्रुतगति मिली, 

मारने वाला तिल तिल है अब मर रहा। 

ऐसे राजा को सौ सौ नमस्कार है। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है।। 


बेटियों को पढ़ाने बढ़ाने लगा। 

उज्ज्वला से उजाला को लाने लगा।।

राष्ट्र का सारथी बन के भागीरथी, 

नल से जल आज घर घर दिलाने लगा।। 

योग्य वंचित ने पाया पुरस्कार है। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।। 


वो किसानों को सम्मान देने लगा। 

वो जवानों को भी मान देने लगा।। 

हाशिये में खड़े व्यक्ति को चिन्हकर, 

एक पिता की तरह ध्यान देने लगा।। 

कौन खाया नहीं कौन बीमार है। 

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।।


सेवा की योजना पहुँची हर द्वार है।

चौबीसों घंटे एक्शन को तैयार है। 

देश की ओर से नम्र आभार है ।

अच्छे दिन लाने वाली ये सरकार है ।



शोभामोहन श्रीवास्तव 

०५/०४/२०२२

रायपुर छत्तीसगढ़ 

अब तो खोलो हिन्दू नेत्र


बना देश यह जब रणक्षेत्र। अब तो खोलो हिंदू नेत्र।। समरशंख की ध्वनि सुन आज। 

भारत मांँ की रखने लाज।। रक्षा करने आओ देश।। 

पहले देश बाद में शेष।। 

सौ करोड़ अपना परिवार।। बैरी संग मचाओ रार।। 

सहनशीलता कर दो बंद। 

अब मत पलने दो जयचंद।। सभी धर्म नहीं एक समान। अंतर समझ गए श्रीमान।। आस्तीन के जो है साँप। 

नहीं करो अब उनको माफ।। खंजर छुपा मिलाते हाथ। 

उनको दो सब मिलकर मात।। 


शोभामोहन 

०१/०१/२०२२


किन साँपों को पोस रहे 


घुसपैठों के लिये देश में,

जिसने आग लगाया है ।

हुए सभी मजबूर सोचने,

ये कैसा दिन आया है ।। 


आँख खुली हैं आज यकायक,

अब तक जो बेहोश रहे ।

आने वाला मंजर सोचो,

किन साँपों को पोस रहे ।।

न्यायपालिका को भी जिसने,

अंगूठा दिखलाया है ।

घुसपैठों के लिये देश में,

जिसने आग लगाया है ।

हुए सभी मजबूर सोचने,

ये कैसा दिन आया है ।। 


बैठे जो शाहीन बाग में,

उनका मकसद जान गये ।

कट्टरता और कौमपरस्ती,

बुरकों में पहचान गये ।।

है जिनकी तालीम ही गलत,

खौफ रंज हमसाया है ।।

घुसपैठों के लिये देश में,

जिसने आग लगाया है ।

हुए सभी मजबूर सोचने,

ये कैसा दिन आया है ।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव

रायपुर छत्तीसगढ़

मैं बस वहीं सनातन हूँ


जिसमें कोई भ्रम ना संशय,  

मैं सब वहीं सनातन हूँ। 

आवाजाही का वाहन तन,  

मैं तो परम पुरातन हूँ । 


नहीं मनोरंजन की बेला,  

अस्तिभाव जिज्ञासा है। 

माया ज्वरशामकऔषधि को,  

पाने की अभिलाषा है।। 


मेरे प्रियतम जिसमें बैठें,  

मैं वो चरम सिंहासन हूँ। 

जिसमें कोई भ्रम ना संशय,  

मैं सब वहीं सनातन हूँ।


साँस साँस में नाम संपदा,  

कर प्रयत्न निशदिन जोड़ू। 

मन मंदिर के मणि उजास को,  

पाने ठग जग गम छोड़ू।। 


दान पुण्यरत मुक्तहस्त मैं,  

गंगाजल तीर्थाटन हूँ। 

जिसमें कोई भ्रम ना संशय,  

मैं बस वहीं सनातन हूँ।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२६/०६/२०२१

पाटन 

जय जय जय भारतमाता 


जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 

निशदिन तुमको माथ नवायें । 

यश महिमा गुण कीर्तन गायें  ।।


राम कृष्ण तू ही उपजाती । 

मानवता का मार्ग दिखाती ।। 

कोटि कंठ करते हैं वंदन । 

स्वीकारो सबका अभिनंदन  ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



जीवन भर तेरे गुण गायें  । 

अंत समय में गोद समायें । ।। 

श्याम जमुन जल उजली गंगा । 

तन पर खेले जलधि तरंगा ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



शब्द पुष्प चुन मातु चढ़ायें । 

पगवंदन कर स्तुति गायें ।। 

चट्टानों से हम टकरायें । 

तुमपर अपना प्राण लुटायें ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



माँ तुमने जो लाल जने है । 

वह दुश्मन के काल बने है  

कफन बांध सिर पर जब जाते । 

दुश्मन के हैं होश उड़ाते ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



तेरे लिए ही जीते मरते । 

न्योछावर निज जीवन करते ।। 

करते मातृभूमि जयकारा  । 

दुखद पंथ दुख हो छुटकारा ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



सरहद पर जो  लड़ने जाते । 

मातृभूमि पथ में मिट जाते ।। 

ऐसे वीरों को वंदन है । 

देशभक्ति जिनका जीवन है ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



सरहद खड़े खून से खेले । 

सीने में सौ गोली झेले ।। 

दर्जन भर से लड़े अकेले ।  

अरि के प्राण पखेरू ले ले ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



सीमाओं के जो रखवाले। 

उनसे बड़े न जीने वाले ।। 

मृत्यु देख कर भय ना खाते । 

साँसो को निज दाँव लगाते ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



मौत जिंदगी जब ठन जाये । 

डंटे रहें मन बिना डिगाये ।। 

शान तिरंगा रखे बचाये । 

वापस भले लौट ना आये ।।

जय जय जय हे भारत माता  

कण कण तेरा वैभव  गाता ।। 



शोभामोहन श्रीवास्तव 

रायपुर छ.ग.

जय जय भारत कहना होगा

 

भारतीय बन रह ना होगा।

जय-जय भारत कहना होगा।। 


पद चिन्हों पर लोकतंत्र के।

सहचर वाले मूल मंत्र के ।।

सुपथ धार में बहना होगा ।।

जय-जय भारत कहना होगा ।। 


हिन्दी का सम्मान जरूरी ।

संस्कृति की पहचान जरूरी ।।

सब धर्मो को सहना होगा ।

जय-जय भारत कहना होगा।। 


संविधान कानून भरोसे ।

भारतीय पहचान भरोसे ।।

तय दिवारें ढ़हना होगा ।

जय-जय भारत कहना होगा ।। 


देह अस्थि जब खून एक तो।

फिर ना क्यों कानून एक तो ।।

मानवता ही गहना होगा ।।

जय-जय भारत कहना होगा ।। 


वामपंथ अलगाव छोड़ के ।

कूटनीति के दाँव छोड़ के ।।

ईष्या द्वेष को दहना होगा ।।

जय-जय भारत कहना होगा ।। 


नियम नये बनाकर लाओ।

और पालन उसका करवाओ  ।।

सुधि राजा मंत्री जन होगा  ।।

जय-जय भारत कहना होगा ।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव

०१/०४/२०२०


टूटे सब जेहादी ख्वाब(धारा ३७०) 



करामात जो किया नेहरू,

पाप छुपा था सत्तर साल।

काला चिट्ठा खुला पुराना,

मोदी आये हुआ कमाल ।।


काशमीर जम्मू को जिसने

अड्डा बना रखा आतंक ।

पूरे भारत को दहलाते,

देशद्रोह कर लोग कलंक।।


संविधान से छेड़छाड़ तब,

दर्जा देकर राज्य विशेष ।

पाप नेहरू गुपचुप करके,

दिया भयानक हमको क्लेश।।


कर वसूलता भारत भर से,

आतंकी को पोंस बढ़ाय ।

ऐसे नेताओ से अब तो,

भारत को भगवान बचाय।।


संविधान भी अलग बनाया,

और अलग परचम लहराय।

नहीं बतायी भाड़ मीडिया,

पैसे के बल पाप छिपाय।।


तीन सौ सत्तर पैंतीस ए को,

मोदी ने जब दिया हटाय ।।

रोजी रोटी जिनकी चलती,

इससे वे सब हैं बहुत घबराय ।।


महबूबा को नजबंद कर,

अकल ठिकाने दिया लगाय।

अब्दुल्ला की ऐसी तैसी,

करके चुप घर पर बैठाय ।।


सन्न सियासी सभी सुरमा,

उँगली को दाँतों में दाब ।

देख रहे थे गड़बड़ करने,

टूटे सब जेहादी ख्वाब ।।


कर विधवा विलाप जेहादी,

रोये गाये पत्थरबाज ।

पूरा देश समझता है अब,

इस पत्थरबाजी का राज ।।


देशद्रोह बर्दाश्त न होगा,

असुरो को अच्छा समझाय ।।

दुश्मन को थरथर कंपित कर,

भारत  माथ कलंक मिटाय ।।


तेरी जय हो और विजय हो,

आयु हमारी तुम्हें लग जाय।

शोभामोहन शौर्यगान कर,

मोदी जी को माथ नवाय।


शोभामोहन श्रीवास्तव

रायपुर छ.ग.

01/06/2020


हिन्दू जागरणगीत


"और उन्हें पूरा हिन्दूस्तान चाहिए"



तुम्हे रोटी कपड़ा मकान चाहिए। 


और उन्हें पूरा हिन्दूस्तान चाहिए।। 


एक बात कहनी है ध्यान चाहिए। 


दो मिनट आपका श्रीमान चाहिए।।



भागोगे कहाँ अब स्थान भी नहीं। 


खड़े हो कगार पर ध्यान भी नहीं।। 


धर्मनिरपेक्षता का ज्ञान भी नहीं। 


बचा तुममें तो स्वाभिमान भी नहीं।। 


तुमको बिजली पानी दान चाहिए। 


और उनको तुम्हारा प्रान चाहिए।।



गाँधीगिरी जानते सुभाष को नहीं। 


शिवाजी प्रताप इतिहास को नही।। 


जगा सके मन में विश्वास को नहीं। 


करे पराक्रम के विकास को नहीं।। 


तुमको सुख  सुविधा शान चाहिए। 


और उनको तुम्हारा प्रान चाहिए।।



साथ देने सच का तो अड़ ना सके। 


दूसरों के लफड़ों में पड़ ना सके।। 


एक मारे उसको दो जड़ ना सके । 


बैरियों की छाती पर चढ़ ना सके।। 


तुमको सस्ता सब सामान चाहिए। 


और उनको तुम्हारा प्रान चाहिए।।



जाट भाट ब्राह्मण में बटते गये। 


ताकत में प्रतिदिन घटते गये।। 


बिखर के रहे और कटते गये। 


जात पात गुन गान रटते गये।। 


तुम्हे कुल और खानदान चाहिए। 


और उन्हें पूरा हिन्दूस्तान चाहिए।।



कश्मीर घाटी में भगाये गये तुम। 


धर्म परिवर्तित कराये गये तुम।। 


केरल से कैसे हो मिटाये गये तुम। 


कैसे बंगाल में सताये गये तुम।। 


और तुम्हें कितना प्रमान चाहिए। 


उनको तो पूरा हिन्दूस्तान चाहिए।।



शोभामोहन श्रीवास्तव


नमस्कारी योगी सरकार 


नवभारत के धर्म धुरंधर,

लक्ष्मण के अवतार।

आतंकी की कमर तोड़ने, 

हरदम तुम तैयार।

नमस्कारी योगी सरकार।। 


पत्थरबाजों के घर तोड़े, 

और मचाये रार। 

शहर गली फोटो चिपकाकर, 

दिये उतार बुखार। 

नमस्कारी योगी सरकार।। 


बुलडोजर के नाम से काँपे, 

गुंडो का परिवार।

राजनीति में धर्म धुरंधर, 

देखा पहली बार। 

नमस्कारी योगी सरकार।। 


मार मार के ड़ंडे तोड़े, 

छिल्का दिये उतार। 

नमस्कारी योगी सरकार।। 

टूटे डंडों की कीमत भी, 

किये वसूल ललकार।। 

नमस्कारी योगी सरकार ।


पाई पाई की भरपाई , 

और बुलडोजर वार।

देशद्रोहियों की मंडली में, 

मच गयी हाहाकार। 

नमस्कारी योगी सरकार।


एक बराबर सबको समझे, 

प्रजा जान परिवार।

देख तुम्हें बिल छुपे बाहुबली, 

थर्राये गद्दार। 

नमस्कारी योगी सरकार। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

११/०६/२०२२

महुदा 

निडर बनो डटकर लड़ो 


रक्षा कर सकती नहीं, कोई भी सरकार।

पानी सिर तक आ गया, थाम्हो अब हथियार।। 


जिसके सिर दिन रात ही, रहता खून सवार।

उनको निपटाना अगर, तब उठाव हथियार।। 


प्राण बचाने के लिए, भाँजो अब तलवार।

भीख प्राण की माँगकर, मरना है धिक्कार।। 


डर डर के जीना नहीं, निडर बनो तुम लोग।

साहस में ही जीत है, छोड़ो डर का रोग।। 


बच्चों को सिखलाइए, धनुष बान संधान।

अब लड़ना सीखे बिना, ना होगा कल्यान।। 


घर घर होना चाहिए, फरसा और त्रिशूल।

बार बार करते रहे, अब मत करना भूल।। 


शोभामोहन

०७/०५/२०२१

१/

परजीवी है ताक में, करने को नुकसान। 

आश्रय वाली डाल पर, रहे कुल्हाड़ी तान।। 

२/

जगह जगह पर सज रही, श्वानों की चौपाल।

सिंह सिहासन में मगर, नहीं गलेगी दाल।। 

३/

पिस्सू जिसका खून पी, हुए पुष्ट बलवान। 

दुष्ट उसी से रुष्ट हैं, नहीं तनिक भी ज्ञान।। 

४/

नाम धाम बदले नहीं, गिरगिट चतुर सुजान। 

घुटना बुद्धि देखकर, सभी गये पहचान ।। 

५/

आने में शुभ समय को, भले हुई है देर।। 

मगर शेर के सामने, सभी भेड़िये ढेर।

६/

नाम देवता का रखें, करे राक्षसी काम। 

बदले रंग सियार यूँ, आप हुए बदनाम।। 

७/

नष्ट फसल को कर रहे, उगकर खरपतवार।। 

अब किसान 

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