आये ओ दाई अँगना में मोर
नौ दिन बर भेज के तोला।
किरपा करे हे भोला।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
भोले शंकर के प्यारी।
हे गनपति के महतारी।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
कैलाश के हे महारानी।
हे दुर्गा आदि भवानी।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
हे शक्ति के अवतारी।
महिमा हे तोर बड़ भारी।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
नौ दिन बर भेज के तोला।
किरपा करे हे भोला।।
आये ओ दाई अँगना में मोर।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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