गजावली*
सपनों के संग संग सजन भागती रही,
सपनों के संग संग सजन भागती रही,
तुम जागते रहे तो मैं भी जागती रही।
जब जब झुकायी सिर किसी मंदिर के द्वार पर,
लम्बी उमर तुम्हारे लिए माँगती रही।।
तेरी खुशी में अपनी खुशी जानके प्रियतम,
चेहरे में तेरे बार बार झाँकती रही।
सोलह सिंगार करके प्रतिक्षा में तुम्हारे,
खाड़ी व द्वार बार बार झाँकती रही।
शोभामोहन
१०/०४/२०२२
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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