Saturday, 2 March 2024

हिन्दी तुम सबसे उर्वर ।

हिन्दी तुम सबसे उर्वर ।
हिन्दी तुम उड़ने को पर ।
हिन्दी तुम भावों से तर ।
हिन्दी तुम हो अति सुंदर।।

हिन्दी तुम अंतस निर्झर,
हिन्दी तुम सर्वत्र मुखर ।
हिन्दी तुम हो अजर अमर ।
हिन्दी तुम हो अति सुंदर

हिन्दी तुम जनपद का स्वर ।
बोली भाषा का सागर ।
हिन्दी तुम काशी हर घर ।।
हिन्दी तुम हो अति सुंदर।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

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