Tuesday, 27 February 2024

छत्तीसगढ़ी लोकगीत

लोकगीत मटेरियल 

१/

सारललित छंद 


राजा बइठे राजसिंहासन, बाँभन बइठै पिढ़वा।

सेजरी सजन सजनिया बइठै, भुँइया बइठै डिंड़वा।।

बावा बइठै आसन चौंकी, संत सुजानिक गदिया। 

पुछी झार भूमि कुकुर बइठै, चिखला बइठै बधिया।। 


शोभामोहन 

२/

गुनधर संगति गुनधर करथे, हिनहर संगति हिनहा।

ठग्गू संगति ठग्गू करथे, 

गिनहा संगति गिनहा।। 


नेता संगति पिछलग्गू कर, रहि बन जाथें तिनहा।

घिनहा संगति घिनहा करके, कारज करथें घिनहा।। 


चोर चोरहा संगति करके, करथे चोरी हारी।

बैपारी बैपारी संग कर, करथे धन बढ़वारी।। 

गुनललचहा गुनिक संगत कर, करथे ज्ञान सिंगारी।। 


शोभामोहन 

३/

बेटी जनमाये दाई दुख पीरा सहिके अउ, परघर दियेस हँकार ओ।

बेटवा ला सोन के झुलना झुलाये अउ, दिये खेतखार घरद्वार ओ।।

४/ 


लाई फुटै ते झन फूटै, नेग लेबो भउजाई। 

लाई फुटै ते झन फूटै, 

नेग लेबो भउजाई। 


मंडल हमर ससुर के बेटा, 

गाँवगँउटिया हमर भाई।

नहीं फोरन हम लाई।

लाई फुटै ते झन फूटै, 

नेग लेबो भउजाई। 



हींग में हम पानी नइ घोरन, 

मारन नइ ससुरे बड़ाई।

नहीं फोरन हम लाई।

गाँवगँउटिया हमर भाई।

नहीं फोरन हम लाई।

लाई फुटै ते झन फूटै, 

नेग लेबो भउजाई। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

५/

बिहावगीत 


महराज पंडित दिन सुदिन आये, 

मोरे घर लगे हे बिहाव। 

पोथी ला सोध के बताई दौ, कोने दिन लगन लिखाँव।। 


जनम जिनगी मोरे बिरथा हे,

जन्म जिनगी मोरे बिरथा, 


६/

आई जाबे ननदिया सगुन के बेरिया। 

आई जाबे ननदिया सगुन के बेरिया। 

भतीज के तोर बिहाव हे या। 

आहूँ आहूँ भउजी ढेड़हिन बने बर, 

भतीज के मोर बिहाव में या। 

झटकुन आबे सुन सगुन संदेसिया। 

झटकुन आबे सुन सगुन संदेसिया।। 

करबोन तोरे अगोरा ला या। 

आई जाबे ननदी सगुन के बेरिया। 

भतीज के तोर बिहाव हे या। 

भइया ला भेजि देबे, 

नेवता धराई के।

तभे भेजहीं तुँहर नंदोई हा या। 

आहूँ आहूँ भउजी ढेड़हिन बने बर, 

भतीज के मोर बिहाव में या। 

मंगलपाती धर आही तोरे भैया।

मंगलपाती धर आही तोरे भैया।

तोला लेवाये बर कउखन या।। 

आई जाबे ननदी सगुन के बेरिया। 

भतीज के तोर बिहाव हे या। 

शोभामोहन श्रीवास्तव 

२१/०७/२०२३ 


७/



चौदह कोस ले आही मोला तीजा लिये भइया।

पैडगरी में आँखी दसाँव हो। 

हेर जुनहा लुगरा, पहिर धरवट सारी, जाहूँ मैं दाई के गाँव हो। 


चारे दिन रहि औं मैं मइके के डेहरी मा, 

दाई कब के भेजत बलाव हो। 


८/ 


ओकर दूल्हा भूतहा

भोला भंडारी 


फूलकस गौरी सुघ्घर हे सुकुमारी। 

ओकर दूल्हा भूतहा

भोला भंडारी।। 

काकर धियरी गौरी, काकर दुलारी।

काकर कहे ले करत तप भारी। 

फूलकस गौरी सुघ्घर हे सुकुमारी। 

ओकर दूल्हा भूतहा

भोला भंडारी।। 


नगराजा धियरी सुनैना दुलारी, 

नारद के कहे करत तप भारी।। 

फूलकस गौरी सुघ्घर हे सुकुमारी। 

ओकर दूल्हा भूतहा

भोला भंडारी।। 

हर हर महादेव कर कर जयकारी। 

टोरत बेलपतिया ला डोंगरकुमारी।।

फूलकस गौरी सुघ्घर हे सुकुमारी। 

ओकर दूल्हा भूतहा

भोला भंडारी।। 


९/

आये परतिया के, 

कइसन बरतिया हे 


आये परतिया के, 

कइसन बरतिया हे।

रूपरंग बरने न जाय हो। 


बरमलेखा के भँउरी, 

गड़ी करम छाँड़े गौरी, 

दुल्हा देखत जीउ डराय हो।

आये परतिया के, 

कइसन बरतिया हे।

रूपरंग बरने न जाय हो। 


ककरो तो मुँह नइ हे, ककरो तो आँखी नइ हे, अउ ककरो तो नइ हे कान हो। 

आये परबतिया के।

कइसन बरतिया हे।

रूपरंग बरने न जाय हो। 


जटरबटर मुड़ी चुन्दी, 

जटा हे बँधाये मुंड़ी।

दुल्हा डउका भुतहा जनात हो।

आये परबतिया के।

कइसन बरतिया हे।

रूपरंग बरने न जाय हो। 


डरत सुनैना रानी, 

आँखी चूहत पानी। 

घरतिया सब अकबकाय हो। 

आये परबतिया के।

कइसन बरतिया हे।

रूप रंग बरने नइ जाय हो। 


कोने अपराध होगे, 

जेला हे परत भोगे, 

साँप डेंड़ू नाथे दुल्हा आय हो। 

आये परबतिया के।

कइसन बरतिया हे।

रूप रंग बरने नइ जाय हो। 

१०/

भुतहा तोरे भाग लिखाय 


बारा बछर बेटी जप करे तप करे। 

भुतहा तोरे भाग लिखाय।

ओ रानीबेटी भुतहा तोरे भाग लिखाय।। 

अन पानी तज दिये, 

बेलपान खाके जिये।।

अपर्णा जग में कहलाय। 

ओ रानीबेटी भुतहा तोरे भाग लिखाय।। 


हवा पीके ब्रत धरे, 

नमः शिवाय करे।

तन मन अपन तपाय। 

ओ रानीबेटी भुतहा तोरे भाग लिखाय।। 


शोभामोहन 

११/ 


एकरे बर करिस उपास 


(बर तरी खड़े हे बरतिया धुन) 

जटा देख डरिगे घरतिया, 

जटा देख डरिगे बरतिया गड़ी, देखत भभूति सब उदास। 

कइसन सँइया परबतिया के

कइसन सँइया परबतिया के

एकरे बर करिस उपास।। 


घर हे न जेकर दुवार हे, 

घर हे न जेकर दुवार हे, 

तन भर साँप डेड़ू बास।। 

एकरे बर करिस उपास।। 


हाथी न घोड़ा हे न रथ हे।

हाथी न घोड़ा हे न रथ हे गड़ी। 

बइला चढ़ आये हे बिहाय।

एकरे बर करिस उपास।। 


चरबत्ता चलत चरझनिया, 

चरबत्ता चलत चरझनिया गड़ी, 

का लिखे नगराजधिया भाग। 

एकरे बर करिस उपास। 


१२/

जइसन गौरी हे, ओइसन बर नइ हे।

जइसन गौरी हे, ओइसन बर नहीं।

भुतहादल आवत बरात हो। 

ऊँच बइठे हवेली

कहत सखी सहेली।।

अजगुत उमा के बरात हो।। 

जइसन गौरी हे, ओइसन बर नहीं।

भुतहादल आवत बरात हो। 

परछन करे बर आये हे सुनैना रानी, 

फोसनत साँप डरात हो।। 

जइसन गौरी हे, ओइसन बर नहीं।

भुतहादल आवत बरात हो।

भीतरखोली डहर दुकतन डउकी मन, 

लइका मूड़ाछाँड़ प्रात हो। 

जइसन गौरी हे, ओइसन बर नहीं।

भुतहादल आवत बरात हो।

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