संविधान के बाट बता जा
भीमराव अम्बेडकर, लिखे हिन्द संविधान ।
शिल्पकार भारत सुदिन, कानूनी विद्वान ।।
तोर बताये बाट भुलागे । अब तो निच्चट कलउ उखरागे ।।
सबके मन मा भेद भरे हे । अंते-तंते मंत्र धरे हे ।।
बिगन बूझे जाने चिचियाथे । आने ताने गाना गाथे ।।
फँसत हवै बैरी के फाँसा । समझ न पावत ओकर झाँसा ।।
मनखे गढ़के नावा नारा । भुला गये हे तोर तियारा ।।
भेद भाव के खोदत खाई। सपना करके राई-छाई।।
तोर नाम ला करके आगे । कोनो स्वारथ साधन लागे ।।
एक बेर अउ बाबा आजा । संविधान के बाट बता जा ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
अमलेश्वर रायपुर छ.ग.
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