Tuesday, 27 February 2024

संविधान के बाट बता जा

संविधान के बाट बता जा 


भीमराव अम्बेडकर, लिखे हिन्द संविधान ।

शिल्पकार भारत सुदिन, कानूनी विद्वान ।। 


  


तोर बताये बाट भुलागे । अब तो निच्चट कलउ उखरागे ।। 


सबके मन मा भेद भरे हे । अंते-तंते मंत्र धरे हे ।। 


बिगन बूझे जाने चिचियाथे । आने ताने गाना गाथे ।। 


फँसत हवै बैरी के फाँसा । समझ न पावत ओकर झाँसा ।। 


मनखे गढ़के नावा नारा । भुला गये हे तोर तियारा ।। 


भेद भाव के खोदत खाई। सपना करके राई-छाई।। 


तोर नाम ला करके आगे । कोनो स्वारथ साधन लागे ।। 


एक बेर अउ बाबा आजा । संविधान के बाट बता जा ।। 


  


शोभामोहन श्रीवास्तव 


अमलेश्वर रायपुर छ.ग.


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