बइठे तरिया पार भवानी
१/
कर सजवन सिंगार भवानी ।
बइठे तरिया पार भवानी ।।
मुण्ड माल फूल हार भवानी।
सजे तोर दरबार भवानी।।
२/
अखिल जगत तोर राज भवानी।
सुमरत सकल समाज भवानी।।
बइठे सजवन साज भवानी।
देथस तैं धन बाज भवानी।।
३/
तोर हाथ सब भार भवानी।
कर दे बेड़ा पार भवानी।।
अरझौं झन संसार भवानी।
अरजी बारम्बार भवानी।।
४/
अलबेली सरकार भवानी।
करुणा के अवतार भवानी।।
तोर लमाये नार भवानी ।
तहीं करस किरवार भवानी।।
५/
जम्मो जग दुख भाँज भवानी।
मइल मोर मन माँज भवानी।।
सुन ले मोर अवाज भवानी।।
खुश होवौ शिवराज भवानी।
६/
सुनही कोन हमार भवानी।
करही कोन बिचार भवानी।।
तहीं एक आधार भवानी।
खड़े हवन तोर द्वार भवानी।।
७/
चरन कमल में राख भवानी।
हवौं अपगुनी लाख भवानी।।
अंधक आयेंव चाख भवानी।
तहीं उगोना पाख भवानी।।
८/
सब जग तोर बिस्तार भवानी।
तहीं अंत अगवार भवानी।।
बोहे तैं जग भार भवानी।
बइठे तरिया पार भवानी।।
९/
सब दुख अलहन टार भवानी ।
सुन के मोर गोहार भवानी।।
परे हवौं तोर द्वार भवानी ।
बारम्बार जोहार भवानी ।।
१०/
एक हाथ तलवार भवानी।
दूसर हाथ कटार भवानी।।
अठभुजिया अवतार भवानी।।
करथस जबर प्रहार भवानी।।
११/
शक्ति तोर अपार भवानी।
कहूँ न पावै पार भवानी।।
देवन सँउरत हार भवानी।
तैं सबके सरकार भवानी।।
१२
सुघ्घर पाटी पार भवानी।
आँखी काजर डार भवानी।।
कर सजवन सिंगार भवानी ।
बइठे तरिया पार भवानी ।।
१३/
सेवा देवत ठाँव भवानी ।
लंगुरे दाबत पाँव भवानी।।
झुमरत सुमरत नाव भवानी।
रहै तोर बन छाँव भवानी।।
१४/
तोर हाथ मोर लाज भवानी।
सुमरौं तोला आज भवानी।।
सिध कर दे सब काज भवानी।
हिरदे मोर बिराज भवानी ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८०
मास माघ तिथि साते दिन सनिच्चर
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
-
गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
-
सैनिक के गोसइन के बिरहा पिंउरी धोवाये गवन कराये चलदेस तभो हें हस लगथे, निकले होबे छोड़त मन। पिंउरी धोवाये गवन कराये, रूप झुलत उही नैन सजन...
-
बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...
No comments:
Post a Comment