१)
मूड़ बोह के मोटरी, मरघट कहूँ न जाय।
हाय हाय काबर सबो, करत समझ नइ आय।।
२)
साँस साँस में जोर ले, जोरन भारन नाम।
जग के का बिसवास हे, जग ले का हे काम।।
३)
बछरू दूध जुठारथे, कुसुम भ्रमर मतवार।
जूठा काठा सब इहाँ, आरुग बस भरतार।।
४)
पारबह्म हिरदे बसे, तब ले दूर जनाय।
मन के मइल धोवाय बिन, जीव छाँव नइ पाय।।
५)
मोला फरक परै नहीं, हाँसै थूँकै लोग।
मोर आस बस तोर ले, तैं तो करबे सोग।।
६)
लबरा मन के गाँव में, सतहा धक्का खाय।
हीनमान करके सबो, वोला नइ पतियाय।।
७)
काय करे बर आय अउ, काय करत हस काज।
गजब ठठाही लेगके, जिउ तोला जमराज।।
8)
जेती आँखी जात हे, वोती दिखथे राम।
अब तो मोला लगत हे,
चोला चारोधाम।
9)
साधू छाहित देवता, साधू के पर पाँव।
साधू नाव उतारही, राख हथेरी छाँव।।
10)
जप तप करबे देह कस, निर्मल उही अँजोर।
तेकर सेती जीव तैं, जप तप कर ले घोर।।
11)
भारत माँ के गोड़ में, अमरबेल लपटाय।
तन चूसै फूलै फरै, कोटिसकीरा हाय।।
12)
देश धरम बिसरा निचट, जपथे उल्टा मंत्र।
मुँहरन उनकर चिन्ह लौ,
अउ उखान दौ तंत्र।।
13)
कोंदी कोंदा झन बनौ,
अब पुरुषार्थ जगाव।
देश धरम बैरी चिन्हौ, धुर्रा नँगत छँड़ाव।।
14)
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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