विधाता छंद
हरि लहरा
1222 1222, 1222 1222
कहूँ हर संग
नइ जावै, अबड़ दुरिहा ठिकाना हे ।
मया मा रेंग
अँखमुन्दा, पिया के गाँव जाना हे ।।1।।
लगाके माँग मा
लाली, कड़ी करधन सजाना हे ।
पहिर के हाथ
मा ककनी, घुँघरु पैजन बजाना हे ।।2।।
सितारा चटके
चुनरी मा, अपन मुहरन लुकाना हे ।
दसे मखमल के
पौंदर हे, गोड़ जेवनी मड़ाना हे ।।3।।
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