Thursday, 16 March 2023

विधाता छंद

 

विधाता छंद

हरि लहरा

 

1222 1222, 1222 1222

 

कहूँ हर संग नइ जावै, अबड़ दुरिहा ठिकाना हे ।

मया मा रेंग अँखमुन्दा, पिया के गाँव जाना हे ।।1।।

लगाके माँग मा लाली, कड़ी करधन सजाना हे ।

पहिर के हाथ मा ककनी, घुँघरु पैजन बजाना हे ।।2।।

सितारा चटके चुनरी मा, अपन मुहरन लुकाना हे ।

दसे मखमल के पौंदर हे, गोड़ जेवनी मड़ाना हे ।।3।।

 

 

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