कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाये
श्री विशकर्मा सुसृजनधर्मा
ब्रह्माज्ञा जब पाये।
तब छैमासी एकरात्रि में
मंदिर भव्य बनाये।।१।।
कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाये
छोड़ दिव्य वैकुंठधाम हरि,
पद्मपुरी में आये।
भक्तों को सुख देने भगवन,
स्वर्ग धरा पर लाये।।२।।
कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाये
पैरी सोढूर महानदी जल,
निर्मल धार बहाये।
पावन घाट त्रिवेणी संगम,
राजिमतीर्थ कहाये।।३।।
कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाये
ताल तड़ाग तमाल तटो पर,
सुखप्रद सुमन बगीचे।
काँस पलाश लता नवद्रुमदल,
कोमल घास गलीचे।।४।।
कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाय
पंचमुखी भोले बाबा का,
बीच नदी में डेरा।
जिनकी कृपादृष्टि से छूटे,
जन्म मरण का फेरा।।५।।
कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की
महिमा कही न जाये
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
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