Tuesday, 14 March 2023

राजीवलोचन षष्ठपदी पाप हरे श्रीहर सबके

राजीवलोचन षष्ठपदी 

 पाप हरे श्रीहर सबके 


राजीवलोचन दुखभयमोचन, 

भगत जगत सुखकारी। 

रूप मनोहर श्याम कलेवर, 

मैं बलि जाऊँ तुम्हारी।।१।।

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


शंख चक्रधर पद्म गदा कर

चार भुजाओं वाले।

पुष्ट दुष्ट पापी वध कर प्रभु, 

ऋषि मुनि संत संभाले।।२।।

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


मणिमय कुंडल मुदित मुखकमल

कटि करधन उर माला।

पगड़ी पंछा कद पीताम्बर   

दर्शन दिव्य निराला।।३।। 

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


विष्णुस्वामिनी अनधन दायिनी

माया चरण विराजे।।

वाहन गरुड़ मध्यमंडप पर, 

ढोल मृदंगा बाजे।।४।।

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


कमलक्षेत्र की कमलनेत्र की, 

महिमा कही न जाये। 

पद्मावती पुरी की शोभा, 

शेष शारदा गायेंं।।५।।

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


पाहन तारे खलदल मारे, 

सबके सबल सहारे।

शोभामोहन महाअधम प्रभु, 

आयी शरण तुम्हारे।।६।।

पावन क्षेत्रकमल बसके

पाप हरे श्रीहरि सबके


शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 



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