Thursday, 16 March 2023

मुक्ताहरा सवैया

 बेरा मुक्ताहरा सवैया

लला ललला ललला ललला ललला ललला ललला लल लाल।

कभू गति बेर न जान सकै मनखे कतको गुनवान कहाय।

नहीं ककरो चलती चल पाय कहूँ कतको चतुरा बन जाय।

घड़ी पहिरे भर ले मनखे नइ ओकर चाल जनावन पाय।

बली बड़ बेर इहाँ लगथे थर जीव करै अउ ताप नवाय।

शोभामोहन

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