कृष्ण भजन पुस्तक
हे गोकुल के ग्वाला (सारछंद दसपदी)
गोपी-ग्वाला गउरखवाला, नटवर नैनउजाला।
धेनुचरैया दूधदुहैया, लउठी-खुमरी वाला।।
कहूँ बँधैया कहूँ धँधैया,गगरीफोर भगैया।
उधममचैया खेलरचैया, सुकुवाउवत जगैया।।
तालाबेली सखीसहेली, संगमचुलुक बढ़ैया।।
चीरचुरैया कदमचढ़ैया, ग्वालिन पाठपढ़ैया ।
उखलबंँधैया लाहोलेवैया, सुंदरकिशन दँवैया।।
इन्द्रहरैया गरबमिटैया, गोवर्धन उपकैया।।
कृष्णकन्हैया रधियासैंया, परमानंदसिरजैया।
भक्तिजगैया मोहमिटैया,
बंधनजगतकटैया।
मदनगुपाला रूपनिराला, प्रियतम नवलकिशोरी।
रसबरसैया मनहरसैया, गोकुल ग्वालिनगोरी।।
बेनुबजैया नींदउड़ैया, कुंजलता बनमाली।
नाचनचैया रासरचैया, पबरितपरम ओदाली।।
दाऊभैया नागनथैया, कालीदाह कुदैया।।
माथासाजू भुजबंदबाजू, पैजन पाँवभँदैया।।
मुकुटसजैया तिलकलगैया, गर बैजंतीमाला।
पापभरे हौं सरनपरे हौं, हे गोकुल के ग्वाला।।
बड़ेलड़ैया चक्रचलैया, अर्जुन रथहाँकैया।
शोभामोहन अउ भटकै झन, भवदहराबुलकैया।
शोभामोहन
मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट
नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।
मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाव सँवरिया आत।।
चुन्दी में छटके जलबुँदियन,
मोती चटके असन जनात।
पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।
नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय।
मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।
गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात।
चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।
पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल।
बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,
लाली पिंउरी लटकन झूल।।
मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात।
काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।
लुगरा-पटुका लटकत फुँदना,
रगरग ले मन चैन चुरात।
हवय तिहार मनावत आँखी,
दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।
फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात।
रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन,
भुनन भुनन भौंरा मन गात।।
डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।
कन्हिया लटकत करधनिया में,
जड़े जवाहर हीरा लाल।।
नरगर लरलर गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।
ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।
खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।
मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।।
झनक झनक झन पैजन बाजत,
खनन खनन चूरी खनकात।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया,
फरर फरर अँचरा फहरात।।
मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।
चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।।
रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात।
फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।।
आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।
पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।।
रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट।
रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।।
शोभामोहन कृष्णप्रिया के, गुन अपार के पात न पार।
मया पिरित के बंधना बाँधे, सुमरत झुमरत बेर पहात ।।
शोभामोहन
कृष्ण नाम गुन करनी सुमिरन
(चौपाई छंद)
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
तीनो तिलिक गुसैया जयजय।।
गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
इन्दर तापनवैया जयजय।।
माखन लूटखवैया जयजय।
अंँगुरी छत्रछवैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
चंदनतिलक लगैया जयजय।
पाग पिरितपगैया जयजय।।
अंतस भावजगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदय सहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय।
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
कालीनागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
कृष्णा लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
जय सारथी बनैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
सुंदर सृष्टिसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
जयजय चक्रचलैया जयजय।
छाती दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगतपलैया जयजय।।
रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़ेलड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
कृष्ण लीला घनाक्षरी
घनश्याम रूपधाम कोटिकाम धर नाम,
अनगिन खेल ब्रजभूमि में दिखात है ।
इतरात छिप जातमुसकात मुच मुच,
नंद जसुदा अँगना सुख बरसात है।।
दँउरत हँफरत भँवरत ब्रज भर,
नखरा देखात गोप ग्वाल ला रिझात है।
तनसूखा मनसूखा धर के दही चोरात,
चोरहा ले घलो महाचोरहा कहात हे,
रतजाग अनुराग धनभाग बिरिज के,
देख देख सरग देवता ललचात है॥
नहवात खोरवात फूल हरि ला चढ़ात,
बिंजन बनात हे कुलक के जेंवात हे।।
प्रीत घोर हाथ जोर रेंगत जे थोर थोर,
तेने जीव जग ले सहज दुरिहात हे।
वो चरण वो शरण रहि के शोभामोहन,
सतलोक के सुख ला धरती में पात हे।।
शोभामोहन
०५/०५/२०२२
ताल खेमटा रामजन्म उत्सव
लाला लल लाल लाला, लल लाल लाला
लाल लाला ललल लाल लाला।
अंबर से फूल बरसे।
अंबर से फूल बरसे।।
प्रसूति पीर जब आये।
वसुदेवा घबराये।
कंपित दंपति डर से।।
अंबर से फूल बरसे।।
टूटा बंदीगृह ताला।
छा गया उजाला।।
मूर्छित प्रहरी प्रहर से।
अंबर से फूल बरसे।।
पिता ले तभी लाला।
सोलहों कला वाला।।
निकले बंदीघर से।।
अंबर से फूल बरसे।।
ऐसी प्रभु की माया।
शेषनाग की छाया।।
रिमझिम जलधर बरसे।।
अंबर से फूल बरसे।।
चरण चूमने यमुना।
बढ़ गई कई गुना।।
पाँव बढ़ा तब हरि परसे।।
अंबर से फूल बरसे।।
विपदा में मित्र आये।
देख गले से लगाये।।
नंदरायजी अति हरसे।
अंबर से फूल बरसे।।
जन्मे हैं नंदलाला,
यदुकुल उजाला।।
जिसके लिए मन तरसे।
अंबर से फूल बरसे।।
दर्शन को देव आये,
मंगल तिय गाये।।
धन्य हुऐ दर्शन भर से।
अंबर से फूल बरसे।।
यशुमति अति मुदित माई,
जब बजत बधाई।।
नैन बहा के निर्झर से।
अंबर से फूल बरसे।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०९/२०२२
शुभस्थान-वृंदावन
भजन गजावली
लाल लाला लाललाला लालला
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।।
ये जगत में लाग नत्ता कोन हे।
बड़ अकेल्ला ये परेवना सोन हे।।
चाकरी अब छोड़ धन अउ धाम के।।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।।
डार रटहा बने कुँदरा तोर हे।
साँवरे के हाथ जिनगी डोर हे।।
झन बहाना कर तैं बूता काम के।
भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के।।
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२२/०४/२०२२
ईश सुमरनी घनाक्षरी
हरि के बनाय देह,
हरि के जगत गेह।
हरि के पदारथ ला हरि ला चढ़ाय रे।
हरि जगसुख सोती,
हरिच के जीव जोती।
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे।
हरि ले मिलन बर,
भज सुमिरन कर।
हरिच के अंश जीव हरि में समाय रे।
एको छिन गॅँवा झन,
मया गढ़ा मने मन।
जग जनमे मनुख चोला जब पाय रे।
शोभामोहन
११/०४/२०२२
ईश सुमरनी घनाक्षरी
तोर हाड़ा हपट के जोरे सब चीज बस,
नाशवान तभो ले हवस बइहाय रे।
गजब डउल कर फुनगी मा पहुँचेस,
खसले के डर फेर जीव में समाय रे।
रचेस सजन संग मिलन जुलन खेल,
मिलन के संग फेर बिरहा लिखाय रे।
चटक-मटक चरदिनिया जिनिस बर,
ओंड़ा दिये हरि नाम हस बिसराये रे।
शोभामोहन
गुनान मनहरण घनाक्षरी
दशरथ कस नहीं कभू प्रभु प्रीत करे,
कौशिल्या असन नहीं संजम जगाय रे।।
कैकई कस कलंक लिये ना अपन मूड़,
सीता कस नहीं पति धरम निभाय रे।
बंधवा भरत कस राजा नहीं बन सके,
लखन असन नहीं सेवा मन लाय रे।
भजन करे ना कभू सजन मनाये बर,
कइसे छुतहा चेत रामधन पाय रे।।
शोभामोहन
२३/०३/२०२२
मोहना तोर मुरली जादू भरे
मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।
मोहना तोर मुरली बड़ जादू भरे।।
धुन सुन मुरली बछरु गैया चरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।।
सुन रुखराई मगन फहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।
मुरली के धुन बिन कल नइ परे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।
सुन जमुनाजल लहर लहरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।
ग्वालिन के मुरली करेजा कतरे।
मोहना तोर मुरली जादूभरे।।
शोभामोहन
१९/०२/२०२२
महुदा
बिरहा घनाक्षरी
सुन्ना गली अउ गाँव, सुन्ना हे कदम छाँव,
सुन्ना नंद के महल बिरिज अंजोर बिन।
सुन्ना जमुना के घाट, सुन्ना हे बजार हाट,
सुन्ना-सुन्ना नैन रैन नंद के किशोर बिन।
सुन्ना अमरइया हे, सुन्ना सेज शय्या हे।
सुन्ना हे बिरिज बन नंदलाला सोर बिन।
सुन्ना कोठा चुप धेनु, ब्रज बिन ध्वनि बेनु,
सुन्ना संझा मँझनिया सुन्ना अउ भोर हे।।
शोभामोहन
१५/०१/२०२२
हरि बोल रसना
माया के नगरिया फोकट झन फँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
मोह ममता के गरी नरी झन कस ना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
अँगरी उँचा कहूँ न कहूँ झन हँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
मन मा सुरुज उवा घरिया के दसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
जतका दिन लिखाये इहाँ तोर बसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
शोभामोहन भेड़ी धसान झन धसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।।
शोभामोहन
१६/०२/२०२२
राग हिंडोल वसंत
उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।
नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंगत नंगत सब गोरी।।
बचत बचत दँउड़त हे गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।
गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।
बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग रंजक बोरी।
बुढ़ुवा बाल जवान जमोझन, लानत हे रंग घोरी।।
धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।
शोभामोहन के गोसैया, करत जबर बरजोरी।।
शोभामोहन
१५/०२/२०२२
*फगुनवा हे*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।*
*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*
मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,
कदकाछनी रंगचटक फगुनवा,
बैन-नैन के मटक फगुनवा,
मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।
माथा खउरा चंदन फगुनवा,
पागा पागी बदन फगुनवा,
नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,
मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।
चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।
गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।
झुमका झूल मलंग फगुनवा।।
रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।
ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।
भुँइया देत अलाप फगुनवा।।
पिया पिया के जाप फगुनवा।।
रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।
शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।
शोभामोहन
०६/०२/२०२२
तेमा सुते ललना
सोनहा महलिया के सोनहा अटरिया मा,
सोनहा मियार मा बँधाये हावै पलना।
सोनहा थाम्हन खंभा सोनहा जबर दासा,
सोनहा ड़ाँड़ी पटनी पाटे सोन बल ना।
सोनहा सँकरी कड़ी दिये हे झुलाये बर,
सोनहा बेलबूटा किनारी छेंका छलना।
सोनजड़ी फुँदना के दसे छतरँगिया हे,
सेम्हर दसना दसे तेमा सुते ललना।
सोनहा बेरा घड़ी हे सोनहा हे अवसर,
सोनहा चँवर दाई झालत हे झलना।
सोनहा सुअवसर पाये तै शोभामोहन,
नाम गुन ध्यान धरे मन झन हल ना।।
शोभामोहन
२८/०६/२०२१
फूल झेला नंदलाल,
ब्रज नैन उजियाल,
फूल के हिंडोलना दाई सुतात ललना ।
दुलरुवा गोप ग्वाल,
देख होत हें निहाल,
खेलत पटक गोड़ झुलना उझलना।
फूल के चँवर झाल,
जसुदा छूवत भाल,
गम नइ पात सुख दिन रात ढ़लना।
लीला करे बर बाल,
दुष्टन के बन काल,
शोभामोहन के स्वामी आये हे भूतल ना ।
शोभामोहन
२७/०६/२०२१
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी, मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना, निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती, तोर जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
आनी बानी, बाट बेंझानी,
गोड़ अड़ानी, झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
साध जगा मन, शोभामोहन, अधम उधारन,अरज लगाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
शोभामोहन
२७/०६/२०२१
मणि जड़ाय सोन थार,दियना रिगबिग मँझार।
मंगल करसा सँवार, धर धर नर नारी।
मन हुलास बहत धार, बोलत जय बार बार,
रंग रंग के कर सिंगार, खड़े हें दुवारी।।
घंटा घन घनन घोर, झालर झन झन झकोर,
सुन भीजत पोर पोर, गदगद हिय भारी।।
दमउ दफड़ा दमोर, छन्न छन्न छन्न शोर,
भँवरत माते विभोर, कुलक जात वारी।।
चूमत निच्चट निहार, गिंधिया गिंधिया दुलार,
शोभामोहन अधार, जनमे बनवारी।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२७/०६/२०२१
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।
अठतल्लागढ़ महल अटारी,
ईश चलात अटाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।
पहिलीतल्ला रूप विषय के,
मोती अउ मणिमाला।
दूसर तल्ला धन दौलत के,
छाये मेकरजाला।।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।
तीसरतल्ला पद गरिमा दे,
गोभत गरब के भाला।।
चौथातल्ला सुखप्रद अन्नो,
सुख बगराने वाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।
पंचमतल्ला निर्मल हिरदे,
हे बरसात सुधा ला।
छट्टमतल्ला राखे रिधिसिधि,
जोग भठाये चाला।
बइठे ऊपर तल्ला माया रचत निराला ।
सप्तमतल्ला दिव्यज्योति के,
चारोखुँट उजियाला।
शोभामोहन आठवाँतल्ला,
जाये कर जोरा ला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०१/०६/२०२१
पाटन
गर बनमाल सजैया खोजौं ।
चंदन तिलक लगैया खोजौं।।
दसमत फूल खोचैया खोजौं ।
महर महर ममहैया खोजौं ।
बन बन धेनु चरैया खोजौं।
मधुबन रास रचैया खोजौं ।।
गगरी फोर लुकैया खोजौं ।
गोपी नाच नचैया खोजौं ।।
ग्वालिन चीर चुरैया खोजौं ।
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ।।
बंशी मधुर बजैया खोजौं ।
पाँख मँजूर लगैया खोजौं।
करत हवय चुलकाय असन
हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन ।
तोर बिगन ए कंचन काया
रहय पिया अइलाय असन ।
सब पीरा के मान होत हे ,
लागत नही पिराय असन ।
हाथ धरे हस जब्बर तँय हा ,
दुनिया करय गिराय असन ।।
हाँसे थूँके चाल चलन ला
होवत जमो थिराय असन ।
मन के भाव मा पाला परगे ।
होगे चेत हराय असन ।
कोंवर भाव मा करा गिरत हे,
छाती लगत चिराय असन ।
चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुँचत बताय असन।
सेंदुर लगे बिहिनिया सँझा,
करत हवँय चुलकाय असन।
नरी रुँधागे अब का बोलँव,
सुध करत हुरियाय असन।
मन में संसो सँचरत सरभर
जिनगी सासँ हराय असन ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
जयकारी छंद
[8/10/2022, 17:19] Shobhamohan Shrivastava: बिरहिन राधा के गोहार
अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया।
बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे।
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।।
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया।
कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया।
शोभामोहन
०५/०३/२०१७
झीट पाटन
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै
झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।।
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
रहि रहि बादर बिजली चमके।
मन डर्राये बिगन सजन के।।
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
मन चुलहा मा धधकत आगी ।
आके जीव कर दे बड़भागी।।
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
शोभामोहन
२२/०२/१७
झीट पाटन
बिरहिन राधा गोहार २
कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।
कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।
कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।।
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।।
काला करलई कहौं मनबसिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
टपटप टपकत ओरीकस नयना।
उड़त अगास देख पंछी परेवना।।
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
शोभामोहन
०५/०३/२०१७
झीट पाटन
गिंया-गड़ी गीत
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।।
जानथस का बता मोर तो बाली उमर,
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे।
अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं।
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया।
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
कइसे काला कहौं रात के बात ला,
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन,
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
कोजनी काय मोहनी खवाये हवै,
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
नेग अउ जोग के चलावौ तुमन,
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर,
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले,
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
शोभामोहन
०८/०६/२०१७
झीट पाटन
आँखी खोजत माखनचोर
गुड़ी करत हे चारी मोर।
पूछत हे महतारी मोर।।
घेरीबेरी ओखी जोर,
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।
बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।।
दिखत नइ हे ओकर छाँव।
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।
चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।।
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।
शोभामोहन
झन तो बरस अतका रे बादर
झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-डबरी मिलन करत अउ,
नदिया समुन्द समागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
घोपेघटा मयूरा नाचत,
रुख में लता लपटागे।
मंदबयार उड़ावत अँचरा,
बिरहिन मन दुखछागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
जइसे-तइसे बेर कटत अउ,
रतिया फाँस धँसागे।
दसदिश ये मन जेला खोजत,
बहुरन बाट भुलागे ।।
झन तो बरस अतका रे बादर
शोभामोहन
तलफत मन हर, तोर दरसन बर,
बही भुतही असन।
बिरहिन राधा के गोहार
अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया।
बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे।
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।।
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया।
कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया।
शोभामोहन
०५/०३/२०१७
झीट पाटन
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै
झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।।
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
रहि रहि बादर बिजली चमके।
मन डर्राये बिगन सजन के।।
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
मन चुलहा मा धधकत आगी ।
आके जीव कर दे बड़भागी।।
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।
शोभामोहन
२२/०२/१७
झीट पाटन
बिरहिन राधा गोहार २
कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।
कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।
कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।।
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।।
काला करलई कहौं मनबसिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
टपटप टपकत ओरीकस नयना।
उड़त अगास देख पंछी परेवना।।
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
शोभामोहन
०५/०३/२०१७
झीट पाटन
गिंया-गड़ी गीत
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।।
जानथस का बता मोर तो बाली उमर,
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे।
अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं।
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया।
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी।
कइसे काला कहौं रात के बात ला,
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन,
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
कोजनी काय मोहनी खवाये हवै,
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
नेग अउ जोग के चलावौ तुमन,
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर,
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले,
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी।
शोभामोहन
०८/०६/२०१७
झीट पाटन
आँखी खोजत माखनचोर
गुड़ी करत हे चारी मोर।
पूछत हे महतारी मोर।।
घेरीबेरी ओखी जोर,
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।
बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।।
दिखत नइ हे ओकर छाँव।
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।
चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।।
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।
शोभामोहन
झन तो बरस अतका रे बादर
झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-डबरी मिलन करत अउ,
नदिया समुन्द समागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
घोपेघटा मयूरा नाचत,
रुख में लता लपटागे।
मंदबयार उड़ावत अँचरा,
बिरहिन मन दुखछागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
जइसे-तइसे बेर कटत अउ,
रतिया फाँस धँसागे।
दसदिश ये मन जेला खोजत,
बहुरन बाट भुलागे ।।
झन तो बरस अतका रे बादर
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:23] Shobhamohan Shrivastava: लागत प्रियतम आय असन
हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
सिहिल-सिहिल तन मन खँड़ होगे,
रहै जेन मइलाय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
घुरत हवय पीरा के डोंगर,
लागत नहीं पिराय असन।
लागत प्रियतम आय असन। ।
हृदय धुकधुकी नैन टकटकी,
जग देखत बरनाय असन।
लागत प्रियतम आय असन। ।
हाँसौ थूंँकौ चुकौ न चुकौ,
फेर न करौ समझाय असन।
लागत प्रियतम आय असन। ।
मन के अँगना फूल बगरगे,
चंचल चेत हराय असन।
लागत प्रियतम आय असन। ।
कोंवरभाव सिंगारत सपना,
छाती लगत जुड़ा असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुचत बताय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
सेंदूर छींचत साँझ बिहिनिया,
साँझ करत इतराय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
कंठ रुँधावत आँसू आवत,
साध करत हुरियाय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
बगरे सरभर संसो सरगे,
दुख लागत बिसराय असन।
लागत प्रियतम आय असन।।
शोभामोहन
सोंढ़
[8/10/2022, 17:24] Shobhamohan Shrivastava: ब्रजरस रेणकीछंद
रस रझरझ सरस बरस टप-टप टप,
सरलग अमरित बिरिज झरै।
प्रभुवर रस परस दरस भगतन बर,
निसदिन अजगुत करम करै।।
सब करमन सखिन करयँ बड़ झटपट,
जग रहि अटपट नियम चरै।
मन हुलसत सुघर सजन दरसन बर,
मधुनिधिबन गुन पुलक भरै।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:25] Shobhamohan Shrivastava: कान्हा आजा कान्हा!!!!!
आगे बइहापूरा, बोहागे सुखसपना। बोहागे सुखसपना।
होगे बिरथा बिलवा, तोर नाम के जपना।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!!!
ड़ँड़ियावत पेड़वा, छटकत धनहा बाली।छटकत धनहा बाली।
जुग होगे आये नइ, कहि गै आहूँ काली।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!!!
चढ़गे तोला मोहना, मथुरा के पानी। मथुरा के पानी।
रोई-रोई पहाथन, बिरिज जिनगानी।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!!
सपना दरसन भइगे, बिरथा उमरिया। बिरथा उमरिया।
हिरक निहारे नइ तैं, बिरिज नगरिया।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!!
आगे बिरहिन सावन, झुलना कोन बाँधै।झुलना कोन बाँधे।
कोन झुलावै झूला, मच-मच खाँधे।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!!
तोला देख बोहे हन, पिरित के करसा। पिरित के करसा।
मयामात निर्मोही, गिरेन मुड़भरसा।।
कान्हा आजा कान्हा!!!!!
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:26] Shobhamohan Shrivastava: गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
गोई गोरसपियैया नइ हे।
लौना-लोंदी चोरैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
डोलत पानपतैया नइ हे।
बोलत बछरुगैया नइ हे।।
पल-पल पिरितजतैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
पागा मुकुटलगैया नइ हे।
चिंव-चिंव करत चिरैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
कालीदाहकुदैया नइ हे।
मुरली मधुर बजैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
नंदबबा लरकैया नइ हे।
गोपीचीरचुरैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
कोनो खबरलनैया नइ हे।
सजन किसन निर्दैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
मधुबन रासरचैया नइ हे।
कोनो हमर पूछैया नइ हे।।
गोकुलग्वाल कन्हैया नइ हे।
शोभामोहन
१३/०९/२०२२
[8/10/2022, 17:26] Shobhamohan Shrivastava: चलौ गड़ी वृंदावन जाबो
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
कान्हा रास रचाथे रे।।
सब रउताइन संभरपकर के,
अधरियाकुन जाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।।
नंनबबा के लाललहरिया,
दिनभर गाय चराथे रे।।
साँझ होवत बरदी उसलाके,
जमुनाघाट नहाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
फेंक भँदइया लउठी खुमरी,
महराजा बन जाथे रे।
चंदनखउर लगाके माथा,
कदपिंउरी झमकाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
मछरीछाप पहिरथे कुण्डल,
मउर-मकुट खपवाथे रे।
छातीभर बैजन्तीमाला,
मोतीलर लटकाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
सरभर अत्तर वस्त्र छींचे,
महर-महर ममहाथे रे।
पाँखीमोर लहरियापागा,
बँसुरी बिधुन बजाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
कनिहा करधन काछेकछनी,
सोनाढ़ीक सुहाथे रे।
खाँध मड़ाये पटपीताम्बर,
फरर-फरर फहराथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
सब ग्वालिन के साध पुरोये,
अनगिनठन बन जाथे रे।
भागउवे जन पुण्यछुवे मन,
ओकर दरसन पाथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।
रासरचैया बेरपहाती,
झरफर झरफर आथें रे।
सुन-सुन दरसन आसउवत मन,
जाथे तेन बताथे रे।।
चलौ गड़ी वृंदावन जाबो।।
शोभामोहन
१२/०१/२०२०
[8/10/2022, 17:28] Shobhamohan Shrivastava: जय गिरधारी (त्रिभंगी छंद )
जय रासरचैया, काजबनैया, जसुदामैया के लाला।
जयजगतउजाला, नंदगोपाला, ग्वालिनपति रखवाला।।
जयकृष्णकन्हैया, जगतचलैया, गायचरैया बन ग्वाला।
जय दाऊभैया, रुक्मिणीसैंया, पारलागैया प्रतिपाला।
जयजयगिरधारी, रासबिहारी, नरअवतारी, नंदलाला।।
जेने गुनगावै, माथनवावै, ओकर काटे भवजाला।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:38] Shobhamohan Shrivastava: झन तो बरस अतका रे बादर
झन तो गरज अतका रे बादर
जीव कच्च ले डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरन लागे।।
झन तो गरज अतका रे बादर
अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बनन बनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो गरज अतका रे बादर
मेचकी मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
डबरी ताल करत सुखसंगम,
नदिया समुन्द समागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर
बादर देख मँजूर पगलागे,
रुख में लता लपटागे।
मंदबयार उड़ाइस अँचरा,
दुखदोहरा झलकागे।।
झन तो गरज अतका रे बादर
जइसे तइसे दिन कलथत अउ,
रतिया फाँस धँसागे।
दसदिश मोहन खोजत रधिया,
बहुरनबाट भुलागे।।
झन तो गरज अतका रे बादर
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:39] Shobhamohan Shrivastava: तोला छूवे के मन होगे
मन मधुबन तन अनमन होगे।
मोर एकमन दूमन होथे।
नेमधरम ला तीर मड़ाके,
तोला छूवे के मन होथे।
तोर सुमरन के तीरथ कर कर,
बुड़थौं मुड़सुद्धा सुधि गंगा।
बिख-अमरित दूनो ले दुरिहा,
लहराथौं लहरा सतरंगा।।
काबाभर कबिया के तोला,
पूरा मन के घुमरन होथे ।।
नेमधरम तीर मड़ाके,
तोला छुवे के मन होथे।।
बेरा ड़गनीभर बाँचे हे,
अउ जाना हे अब्बड़ दूरिहा।
आँखी में असमंजस भारी,
तोर मया के मारे करिया।।
श्यामपिया तोर रंग सने ले,
कमती मन के तड़पन होगे।
नेम धरम ला तीर मड़ाके,
तोला छूवे के मन होगे।।
शोभामोहन
१४/१०/२०२०
[8/10/2022, 17:40] Shobhamohan Shrivastava: बरसाना ले आय सजनिया ।
बरसाना ले आय सजनिया ।
दूध-लेवना लाय सजनिया ।।
गुपचुप मनअँगना में आके,
पैजन-चूरी बजाय सजनिया ।
बरसाना ले आय सजनिया ।
मदनमुरारी, बिरिजबिहारी,
बर सब रस बरसाय सजनिया ।।
बरसाना ले आय सजनिया ।
रास रंग में किशन संग में,
नखरा गजब देखाय सजनिया ।
बरसाना ले आय सजनिया ।
करे सिंगारी बड़मनहारी,
फूल-फूलेल लगाय सजनिया।
बरसाना ले आय सजनिया ।
तुरत पुरत शुभ चँउक व चाँदन,
बंदनवार सजाय सजनिया ।
बरसाना ले आय सजनिया ।
बरस सरस बदरी बन रझरझ,
रसिया रासरचाय सजनिया।
बरसाना ले आय सजनिया ।
पैजन के रुनझुन सुरलहरी
मनमथ सुते जगाय सजनिया।।
बरसाना ले आय सजनिया ।
मधुबन ला गमकाय सजनिया ।
बरसाना ले आय सजनिया ।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:41] Shobhamohan Shrivastava: बान अनंग चलाये हे
फूल भुलाके डारा खाँधा,
भौंरा सन पगलाये हे।
बान अनंग चलाये हे।।
लाजकान सब बेंच डरे हे।
जब बसंत दिन आये हे।
बान अनंग चलाये।।
कुसुमकली पट्टाये हे।
भौंरा मन रट्ठाये हे।।
बान अनंग चलाये हे।।
पौंदर दसे हवै बनकाँदी,
अंग-अंग फगुनाये हे।
बान अनंग चलाये हे।।
रहन-सहन धर सखिसंहिता
निधिबन पाँव मड़ाये हे।
बान अनंग चलाये हे।।
सतरंग होगे आसबदरिया,
लहसे माथ नवाये हे।।
बान अनंग चलाये हे।।
बागबगैचा मा मतंग हो,
तितली बाट भुलाये हे।।
बान अनंग चलाये हे।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:42] Shobhamohan Shrivastava: भजन कर हरिनाम मन-मन
बिगन मालादीप चंदन।
बस बढ़ा अनुराग तड़पन।।
भजन कर हरिनाम मन-मन।।
नामगुँजन नामकीर्तन,
दिव्य निर्मल कर मलिन तन।
भजन कर हरिनाम मन-मन।।
मोहनिंदरी बिकट उमचा,
ढारआँसू पाप गन-गन।।
भजन कर हरिनाम मन-मन।।
डगमगावत गोड़ प्रियतम,
हाथ धरही तोर छन-छन।।
भजन कर हरिनाम मन-मन।।
घाट घुँच-घुँच बाट घुँच-घुँच,
पार नाहके शोभामोहन।।
भजन कर हरिनाम मन-मन।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:43] Shobhamohan Shrivastava: भक्ति पद छप्पय
(1)
मैं नइ जानौ तोर, रहे के गाँव कन्हैया।
ये जग भूलनठाँव, भटक झन जाँव कन्हैया।।
कोन जुगुत कर तोर, दरस मैं पाँव कन्हैया।
तोर नाम अउ रूप, नहीं बिसराँव कन्हैया ।।
अपनशरण में राख ले, मायामोह उखान के।
भुला सबो अपराध ला, अपने लइका जानके।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:44] Shobhamohan Shrivastava: उद्धव सखी प्रसंग
-----------------------
1/
आय उधौ हर ज्ञानघमंड भरे जब फोकट ज्ञान बघारे ।
तत्व बतावन बोध करावन द्वैत अद्वैत विभेद उघारे ।
गोकुल गाँव म गोड़ मड़ावत ज्ञान घटा घपटे अँधियारे ।
ओमन ला समझावन आवत जे सुख लूटत ज्ञान ल टारे ।।
2/
जात गुवालिन के गुनिया हम ज्ञान गुनान ल का हम जानी ।
गोरस दूहन माखन हेरन गोपर थापन जानन ज्ञानी ।
कारज मा घर के दिन रात खँटावन ये बिरथा जिनगानी ।
नाम अधार धरेन जिये बर पीयन ना ककरो अब मानी ।।
3/
का समझाय ल आय उधौ तँय कोन पठोय धिरोय बता तो ।
नून जरे म मिंजे अउ हाय इहाँ तँय हा झन ज्ञान जता तो ।
ये बिरहा अगनी म भुँजावत अंतस ला झन बेध सता तो ।
मात मया म बने मतवारिन खोजन मोहन नाथ पता तो ।
4/
मूड़ मुड़ाय तियार खड़े हन का हमला छुरिया डरवाही।
हाँसत थूँकत जात-सगा मन गोड़ बढ़े नइ छेकन पाही।
कोन घड़ी मनमोहन ले मिल, साध हमार जगे पुर पाही।
ते तन तेल भरे दियना अब साँस सखी जरके उरकाही।।
[8/10/2022, 17:47] Shobhamohan Shrivastava: जयकारी छंद
अंतस धरके एक्के नाम ।
साँस-साँस में जप नितनाम।
डउल लगा के हो उपराम,
जबतक ना जनाय परिणाम।।
होही प्रकट एक दिन राम,
सरलग जप मन तज सब काम।
बसनी मिलही पबरित धाम,
छोड़ौं बिरथा बूता काम।।
बसे धुकधुकी में नितनाम,
सबके भीतर ईश्वर धाम।
जब्बर गुरु बिन रद्दा लाम,
देह भुँजावै गिंजरत घाम।।
दाहिन होही बिधना बाम,
जब गुरु लेही बाँही थाम।
उड़बे पंछी तभे गुलाम।
डेना छतरा नभ निजधाम।।
पानी पाके बीजा जाम,
जइसे लहराथे जर थाम।
तइसे गुरु सेवा नितनाम,
सदा सुफल करही सब काम।।
सुधर जही खोंटा तकदीर,
सरधा गुरु बन लिहै शरीर।
गुरु बनही रखवार गहीर,
लेगही जीव ल ईश्वर तीर।।
सबला गुरु ज्ञान करवाय,
छाहित ईश्वर ला करवाय।
जेन गुरु ला खोजत जाय,
ब्रम्ह जानबा तेने पाय।।
जबतक गुरु के मिले न छाँव।
जागे जीव हिय धोवत जाव।
सुमिरन कर-कर मया गढ़ाव।
एको छिन झन बेर गँवाव।।
दू आखर के नानिक नाम।
साँसा सुँतरी पोह अविराम।।
इष्टदेव तब बाँही थाम।
भजबे तब देही निजधाम।।
कदम में झुलना बँधाके
कदम में झूलना बधाँके।
राधारानी ला बिठा के।
ओला श्याम संग झुलाना हे।
श्याम संग झुलाना हे। नंदलाल संग झुलाना हे।।
कदम में झूलना बधाँके।
राधारानी ला बिठाके।
ओला श्याम संग झुलाना हे।
ग्वाला गुवालिन सकलाके।
जमुना पार मेर जाके।
जिनगी लाहो लेके आना हे।
लाहो लेके आना हे।
लाहो लेके आना हे।।
कदम में झूलना बधाँके।
राधारानी ला बिठाके।
ओला श्याम संग झुलाना हे।।
सवनाही झूलागीत गाके।
जिनगी परमलाभ पाके।।
भवरोग दुख मिटाना हे।
रोग दुख मिटाना हे।
भव रोग दुख मिटाना हे।
कदम में झूलना बधाँके।
राधा रानी ला बिठाके।
ओला श्याम संग झुलाना हे।।
शोभामोहन
१४/०६ /२०२२
महुदा
भगवान श्रीहरि स्तवन
रतनजड़ाय सिंहासन सुमिरौ।
करौं कमलदलअष्ट गुनान।
हर दल ॐ नमो नारायण',
अष्टाक्षरमन्तर धर ध्यान।।
आठकमलदल ऊपर बइठे,
प्रभु असंख्यचन्द्रमा समान।
रूपचतुर्भुज विष्णुदेवता,
सरलग सुमिर लगावौं ध्यान।
चारोहाथ में अस्त्र-शस्त्र हे,
शंख,चक्र अउ गदा विशाल।
आँखी कमलफूल के जइसे,
सुरुजजोत कस दिव्य भुवाल।
सबोसुलच्छन सोभत सुघ्घर,
दिव्यअंग अत्तर छिंचवाय।
अउ छाती श्रीवत्सचिह्नारी,
कौस्तुभमणि माला झमकाय।
कन्हिया कसे पीताम्बर सुंदर,
दिव्य-भव्य श्रृंगार सजाय।
दिव्यफूलमाला सरभर गर,
चर्चितचन्दन लेप लगाय।।
वक्ष अक्षबनमाला पहिरे,
श्यामतुलसीदल टँकवाय।।
सौकरोड़ ले आगर-आगर,
बालसुरुज कस रूप जनाय।
डेरीभाग बिराजितलक्ष्मी,
हृदयमँझारी अपन बसाय।
शोभामोहन करत वंदना
परमप्रभु पद मया गढ़ाय।।
शोभामोहन
२०/१२/२०२०
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया (विष्णुपद छंद )
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया
श्रवनन धुन झनके ।
तलफत कलपत बेर पहावत,
सुध-बुध नइ तन के।।
साधजरइ दूपाना फेंकत,
गाज गिरिस झम ले ।
लउकतलक लउका कस मुहरन,
सुध घन घमघम ले।।
गाँवगुड़ी घर पनघट जमुना,
गत नइ मधुबन के ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
माखनलोंदी अउ मन दूनो,
टघलत जावत हे ।
भावबियाये बइहापूरा,
टोंटा आवत हे।।
अँखियन सुंदरमूरत झूलत,
गरफाँसी बनके ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
श्रवनन धुन झनके ।।
मुठमारे कस रूख सुखागे,
चुप-चुप चुरगुन हे ।
का मोहनी डारे सब ब्याकुल,
बस मोहनधुन हे ।।
हर मनमंदिर श्याम बिराजत,
जिनगीधन बनके ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
गोपी गुमसुम ग्वाला गुमसुम,
अउ जसुदामैया ।
गुमसुम गुमसुम नंदगौंटिया
अउ बछरूगैया ।।
नइ आवस तैं तो हम आथन,
उड़त सुआ बन के ।
श्याम चले तैं ले बाँसुरिया,
कान म धुन झनके ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
खुश्बूविहार कालोनी पाहन्दा
तैं किशन काबर खुसरथस आन घर छुछुवाय
देत बद्दी बोल रद्दी, सब गुवालिन घात।
लाज तोला चिटिक नइ हे, अउ लगै नइ बात।।
घीव गोरस अउ दही हे, घर म माड़े खाय।
तैं किशन काबर खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
चोरहा तोला कहत हें, घर म चढ़के आज ।।
सोंच खिसियाही कतिक जब, जानही महराज।।
कोन नजराये घरे के, चीज नहीं सुहाय।
तैं किशन काबर खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
आज तो तोला न छोड़ौ, बड़ बिटोथस लाल।
बाँधिहौं रे ओखली मा, तोर बाढ़त फाल।।
नाम ला बदनाम करथस, जीव गे कउवाय।
तैं किशन काबर खुसरथस,आन घर छुछुवाय।।
शोभामोहन
बहत नदी (रेणकी छंद)
बड़ कलकल कलकल, छलछल छलछल, निरमल निरमल बहत नदी।
तट कर कर हलचल, झलमल झलमल, हिलत पवन बल, बहत नदी।
टुरियन मन दल दल, पनघट गम चल, गगरी भरत जल, बहत नदी।
डुबकत तन मल मल, पहिरत मखमल, सुख देवत चल चल, बहत नदी।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
१७/०८/२०२०
झन जा लाल चराये गैया
झुँझकुर में हे बिखहर के डर।
रक्सा रक्सिन बिचरत सरभर।।
सुन लाला जब बरजत मैया।
झन जा लाल चराये गैया।।
सुन जमुना जल जलरँग बाढ़े ।
चारोकोती अलहन ठाढ़े।
खा अउ खेल महल मा भैया।
झन जा लाल चराये गैया ।।
नानुक मोर अरे लरकैया ।
कल न परै बिन तोर कन्हैया।।
आँखी मोर अँजोर करैया।
झन जा लाल चराये गैया।।
राजालाल न पहिन भँदैया।
हे जसुदा के जीव रखैया।।
नंद बबा के मन हरसैया।
झन जा लाल चराये गैया।।
शोभामोहन के गोसैंया ।।
[8/10/2022, 17:48] Shobhamohan Shrivastava: हे गोकुल के ग्वाला (सारछंद दसपदी)
गोपी-ग्वाला गउरखवाला, नटवर नैनउजाला।
धेनुचरैया दूधदुहैया, लउठी-खुमरी वाला।।
कहूँ बँधैया कहूँ धँधैया,गगरीफोर भगैया।
उधममचैया खेलरचैया, सुकुवाउवत जगैया।।
तालाबेली सखीसहेली, हिरदे मयाबढ़ैया।।
चीरचुरैया कदमचढ़ैया, ग्वालिन पाठपढ़ैया ।
उखलबंँधैया लाहोलेवैया, सुंदरकिशन दँवैया।।
इन्द्रहरैया गरबमिटैया, गोवर्धन उपकैया।।
कृष्णकन्हैया रधियासैंया, परमानंदसिरजैया।
भक्तिजगैया मोहमिटैया,
बंधनजगतकटैया।
मदनगुपाला रूपनिराला, प्रियमत नवलकिशोरी।
रसबरसैया मनहरसैया, गोकुल ग्वालिनगोरी।।
बेनुबजैया नींदउड़ैया, कुंजलता बनमाली।
नाचनचैया रासरचैया, पबरितपरम ओदाली।।
दाऊभैया नागनथैया, कालीदाह कुदैया।।
माथासाजू भुजबंदबाजू, पैजन पाँवभँदैया।।
मुकुटसजैया तिलकलगैया, गर बैजंतीमाला।
पापभरे हौं सरनपरे हौं, हे गोकुल के ग्वाला।।
बड़ेलड़ैया चक्रचलैया, अर्जुन रथहाँकैया।
शोभामोहन अउ भटकै झन, भवदहराबुलकैया।
शोभामोहन
२५/०९/२०२२
[8/10/2022, 17:48] Shobhamohan Shrivastava: करत जगपति के जय जयकार
फूल फुले गहदाय बगीचा।
कोंवर काँदी दसे गलीचा।।
पान पेड़ डुहड़ू परागदल,
सब असलग गोतियार।
करत जगपति के जय जयकार
सबो लोक सरबाँवट धनहा।
टिकरा भाँठा खार रसनहा।।
डोंगर जंगल झरझर झरना,
नदिया धार अउ पार।
करत जगपति के जय जयकार
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:50] Shobhamohan Shrivastava: कदम में झुलना बँधा के
कदम में झूलना बधाँ के। राधा रानी ला बिठा के।
ओला श्याम संग झुलाना हे।
श्याम संग झूलाना हे। नंदलाल संग झुलाना हे।।
कदम में झूलना बधाँ के। राधा रानी ला बिठा के।
ओला श्याम संग झुलाना हे।
ग्वाला गुवालिन सकला के।
जमुना पार मेर जा के। जिनगी लाहो ले के आना हे। लाहो लेके आना हे। लाहो लेके आना हे।।
कदम में झूलना बधाँ के। राधा रानी ला बिठा के।
ओला श्याम संग झुलाना हे।।
शोभामोहन
१४/०६ /२०२२
महुदा
[8/10/2022, 17:51] Shobhamohan Shrivastava: किशन ला ग्वालिन नाच नचात
गोरस देबो लेवना देबो, ओखी करत बलात।
एक गिंया पहिरावत लुगरा, आँछी धर कोचियात।।
किशन ला ग्वालिन नाच नचात
डार नौलखाहार घेंच में, नजर उतारत जात।
टिकुली चटका घोर महाउर, कोंवर गोड़ लगात।।
किशन ला ग्वालिन नाच नचात
कोनो बोलत कोनो ठोलत, गदगद मन मुसकात।
काजर आँजत चुन्दी कोरत, हृदय न हरख समात।।
किशन ला ग्वालिन नाच नचात
पात पोटारत चूमत चाँटत, देखत नयन जुड़ात।
बोटबोटावत रूप निहारत, जम्मो जग बिसरात।।
किशन ला ग्वालिन नाच नचात
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:52] Shobhamohan Shrivastava: चलौ रे जाबो लूट मचाय।
ग्वालिन गोरस बेचे चलदिन, ग्वाला धेनु चराय।
चलौ रे जाबो लूट मचाय।
गोरस लौना दही चोराबो, सुन्नाघर सपड़ाय।
चलौ रे जाबो लूट मचाय।
सींका ऊँच टँगाये ओदे,
मौका हाथ हे आय।
चलौ रे जाबो लूट मचाय।
गोपी मन के घर आवत ले,
राहत देबो छँड़ाय।
चलौ रे जाबो लूट मचाय।
[8/10/2022, 17:53] Shobhamohan Shrivastava: कृष्णकन्हैया जयजय (चौपाई छंद)
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय ।
तीनोलोक गुसैया जयजय।।
गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
इन्दर तापनवैया जयजय।
माखन लूटखवैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
चंदन तिलकलगैया जयजय।
गोकुल गली भगैया जयजय।।
अंतसभाव जगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदयसहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय।
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
काली नागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
द्रोपदी लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
सारथी भगत बनैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
अनगिन रूपसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
जयजय चक्रचलैया जयजय।
जयजय दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगत पलैया जयजय।।
रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़े लड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
०३/०९/२०२२
संशोधन वृंदावन धाम
(उत्तर प्रदेश भारत)
वृंदावन में वास दे, सरस दरस रस प्यास दे।
लगन अगन बिस्तार दे, सुघ्घर बुध करतार दे।।
निधिवन मधुबन में फिरौं, काम दाम में झन गिरौं।।
भवभय भभिछन तार दे, सुघ्घर बुध करतार दे।।
सतसुख ओरीओर दे, सब घरघुँदिया फोर दे।
हिरदे माँझ पधार दे, सुघ्घर बुध करतार दे।।
सुन ले करुण गोहार तैं, डोंगा कर दे पार तैं।
सरभर मया ओगार दे, सुघ्घर बुध करतार दे।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:56] Shobhamohan Shrivastava: जयजय अजगुत जगतगोसैंया
खेल-खेल में जगत जेल में,
साँकर बिगन बँधैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
सबके होती-गोती ज्योति, भौं फरका सिरजैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
चरन धरे के द्वार परे के, बंधन जगत कटैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
भूख प्यास के आस साँस के, पुरती तहीं करैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
सब करमन के साखी बनके,
सुख दुख भोगकरैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
बेरचाल में कालगाल में, जम्मो जिउ झोरसैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
शोभामोहन गावत मनमन, भवदहरा ले पारलगैया।
जयजय अजगुत जगतगोसैंया
शोभामोहन
[8/10/2022, 17:57] Shobhamohan Shrivastava: जाग तहूँ अब धेनुचरैया
जागिस बछरू जागिस गैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
पँगपँग ले बेरा होगे हे।
जावत नदिया नीरभरैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
घँसर मुखारी अउ मुँह धोले।
चहकत अँगना देख चिरैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
कब ले खुसरे रहिबे कथरी,
जाड़ लगत कहि मुँड़लुकैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
संँभर पकर के झरफर झरफर,
दाऊ बाट निहारत भैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
शोभामोहन के पतराखन,
नटवर नागर किशनकन्हैया।
जाग तहूँ अब धेनुचरैया।।
शोभामोहन
०४/०५/२०२१
[8/10/2022, 18:04] Shobhamohan Shrivastava: तन मन भवनरचैया कोन
(आल्हा छंद)
रंग रंग के गढ़ गढ़ चोला,
तन मन भवनरचैया कोन।
भीतर के जहराघट लहुटा,
अमृतबूंँद भरैया कोन।।
मयादया रझरझ बरसा के,
थरहा सुखदेवैया कोन।
ततियाये आगी सिपचैया,
जूड़ करै पुरवैया कोन ।
हाथ छुड़ाये सुख ला बहुरा,
जिनगानी सुघरैया कोन ।
आँखी के कलजगरीपन गन,
डीठनजर उतरैया कोन ।
ये अबूझ जिनगी गनित ला
चुटकी में सुलझैया कोन ।
कजरी उपके लेप लगैया,
पूछै बिगन ठठैया कोन ।।
किरणपरस दै जग जगवैया।
उपबन जगतसजैया कोन ।
एकहत्थी ड़ोगर ला बोहे,
नभ में नीलपोतैया कोन ।
आरुगभाव जगा सचराचर,
मुकपना समझैया कोन सुआरंगपाँखी दे चुकचुक ले,
कोइली गीतगवैया कोन।
सोगटघल के ररुहा जन ला,
सुघ्घर परसकरैया कोन ।
मायाघट परपंच काटके,
तलअंतस दमकैया कोन ।।
सबो स्वाद रख जिभियातल में
रंग गंध बगरैया कोन ।
थाम्हन राखन जीवधारन बन,
अजगुत करमकरैया कोन ।
जुग जोड़ी सब जीव के गढ़के,
हरदीरँग चुपरैया कोन ।
जल थल नभ के पार पिया सँग,
गुरु बर मिलनकरैया कोन ।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:05] Shobhamohan Shrivastava: नंदमहल में बसत जगतपति
नंदमहल में बसत जगतपति,
जागे पुन्य दसोदारानी।
रोवत गावत टेक दिखावत,
खेल रचावत आनीबानी।।
नारद शारद मन गुन गावत,
पापी पुनधर अउ अग्यानी।।
मुँह सुखावत नइ गुन गावत,
शेष महेश मुनि मृदुबानी।।
अंतसमाँझ अउ सपड़ान,
जेकर ध्यान लगावत ध्यानी।
शोभामोहन के रखवारा,
प्रभु जीवराखन लोकपरानी।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:06] Shobhamohan Shrivastava: राधेश्यामी छंद
मोरे सत्ता में जग भर के, जमो जीव तनधर आथें।
बारननेम बँधाये जीथे, बेरपुरत मर सर जाथें।।
मोरे साम्हू अड़े बड़े के, ककरो सक न चले पाथे।
मोरे भौंफरकाये भर ले, जगरचना जमो उझर जाथे।।
जग के पालन मारन तारन, सब कारज करत अकेल्ला हौं।
सचराचर जग ला छाँदौं मैं, परमपुरुख औं छेल्ला हौं।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:36] Shobhamohan Shrivastava: बजाथस बाँसुरी मोहन
विजात छंद
ललालाला ललालाला।
बजाथस बाँसुरी मोहन।
चोराथस तैं सबो के मन।।
चराथस धेनु बन-बन में।
बसे ब्रज के तैं कन कन में।।
कन्हिया तोर करधनिया।
जड़े जेमा रत्न मनिया।।
मति देथस हमर छरिया।
लोभाथस आत्मा करिया।।
बलाथस कुंज में राधा।
रचाथस रास बिन बाधा।।
छिनीअँगरी धरे ड़ोंगर।
रचे लीला तैं नटनागर।।
करे तारन करे मारन।
जगत ला तैं करे धारन।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:36] Shobhamohan Shrivastava: बनत ठनत दुलरू नंदलाला।
गोकुलबसिया जगतउजाला ।
माथा मउरमुकुट खपवावत।
गजमुक्ता मणि साज सजावत।।
गर भर लरलर मोती माला।
बनत ठनत दुलरू नंदलाला।
भीड़ भरे धिड़कत हे बाजा।
मुच मुच मुचकत दूल्हा राजा।।
माथतिलक मणिजड़ित निराला।
बनत ठनत दुलरू नंदलाला।
शोभामोहन हे गुनगावत।
सुमर सुमर सब पाप नसावत।।
नाचत गावत ग्वालिन ग्वाला ।
बनत ठनत दुलरू नंदलाला।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:38] Shobhamohan Shrivastava: बाँह धरे हरि लाज गड़े ललि
कस्तुरी मिरगीबासा ले, मधुबन निधिबन हर ममहात।
राधा जल में रूप निहारत, मोहन कंकर फेकत जात।।
बाँह धरे हरि लाज गड़े ललि, कोंवर मरुवा मुरकेटात।
रासरंग बेलबेली करत तब, ककनी ले छाती खोरपात।।
रूप निहारत एकटक मोहन, बिन मिलकीमारे बकखात।
बूड़े रूपरस सरसब बरबस, लहस-लहस लकठा लोरियात।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:40] Shobhamohan Shrivastava: बिधुन बंशी बजावत हे
विजात (छंद मात्रिक)
ललालाला ललालाला
कदमछँइया किशन बइठे,
बिधुन बंशी बजावत हे।
धरे गैया धरे भैया,
चराये धेनु जावत हे।।
कहूँ दहिया कहूँ गोरस,
कहूँ लेवना चोरावत हे।।
कभू गोपी कभू राधा,
कभू ग्वाला नचावत हे।।
कभू मधुबन कभू निधिबन,
मिलन गोपी बलावत हे।।
कभू राउत कभू राउर,
बने लीला दिखावत हे।।
कहूँ तारत कहूँ मारत,
उझारत जग रचावत हे।।
[8/10/2022, 20:43] Shobhamohan Shrivastava: बिरिज बन के बन जातेंव मोर
न्योता पार जमो ब्रज नारी।
रास रचाथे कुंजबिहारी।।
साँवर बिरिज अँजोर।
बिरिज बन के बन जातेंव मोर
सुंदरी सुंदर रूप सजाथें। महारास रम देह भुलाथें।।
आनंदमगन हिलोर।
बिरिज बन के बन जातेंव मोर
रास रसा लूटे परबतिया।
जाथे लछमी अउ सरसतिया।।
बाँध मया के डोर।
बिरिज बन के बन जातेंव मोर
जगत गोसैंया दरसन पाबे।
उत्सव मंगल मोद मनाबे।।
तन मन बंधन छोर।
बिरिज बन के बन जातेंव मोर
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:44] Shobhamohan Shrivastava: मिलत जुलत ब्रज जमुनाघाट
नहाखोर के जमुनातट में, राधा अंग सुंगध लगात।
मंदगंध ला सूँघत-सूँघत, बिगनबलाय सँवरिया आत।।
चुन्दी में छटके जलबुँदियन,
मोती चटके असन जनात।
पीठ में बेनीफूल ओरमे, झेंझरहा झलमल झलकात।।
नागमुड़ी के चूरा पहिरे, कनकदेह मा कनक सजाय।
मोतीमणि जड़ाये ककनी, सोनसंभारे लाख भराय।
गाल ओरमें झूलत झुमका, लटकत भार सहे नइ जात।
चढ़े कनौती जड़े जवाहर, घेरीबेरी हे खसकात।।
पँहुची मुँदरी अउ अँगुठाही, गजरा गुँथे चमेली फूल।
बिंदिया साजू टिकुली फुल्ली,
लाली पिंउरी लटकन झूल।।
मूड़ ढ़काये चुटुक चुनरिया, किरन नहक के चूमत जात।
काँसकुसुम फूलत ऐती अउ, ओती सजन मदन परघात।।
लुगरा-पटुका लटकत फुँदना,
रगरग ले मन चैन चुरात।
हवय तिहार मनावत आँखी,
दूसर कहूँ ओरख नइ पात।।
फूललदाये डारी हाँसत, पान संग डोलत इतरात।
रिगबिग रिगबिग मधुबन निधिबन,
भुनन भुनन भौंरा मन गात।।
डुमरपकैया जूड़ पवन कस, मस्तमोहनी हथनी चाल।
कन्हिया लटकत करधनिया में,
जड़े जवाहर हीरा लाल।।
रतनजड़ाये गहना-गूठा, नैन बरत सब सजवन देख।
ओठ गोठ हर बदके रहिगे, आँखी नेवतत मया सरेख।।
खोपाअरझे फूल बरोबर,तन मन मोहन अरझत जात।।
मधुबन नापत थके गोड़ के, मुँह देखत पीरा बिसरात।।
झनक झनक झन पैजन बाजत,
खनन खनन चूरी खनकात।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छतिया,
फरर फरर अँचरा फहरात।।
मनकेशर डुहरू कस डुहड़ू, चरचर ले फूलत गहदात।
चंचल चेत अचंचल होवत, देख सँवरिया जीव जुड़ात।।
रुआँ रुआँ हाँसत दरसन कर, परस जगतबंधन बिसरात।
फूल झरत हे गोठबात ले, मन हुलास बरने नइ जात।।
आँखी पाँखी पतियाखोलत, ओंठ कलेचुप अउ गुमखात।
पियामिलन मंदमउहा पीके, लठरत गोड़ संभल नइ पात।।
रूपबखानत स्तुति गावत, पेट चलावत चारण भाट।
रासरसिक रधिया रसरमनी, मिलत-जुलत ब्रज जमुनाघाट।।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:45] Shobhamohan Shrivastava: रंग पियारंग लहरावौं
कुलकत चहकत गुन गावौं।
रंग पियारंग लहरावौं।।
कंकर पथना झन मन मोहै।
दृग कागद कुटका झन मोहै।।
होती अपन बिसरावौं।
रंग पियारंग लहरावौं।।
पिया भरोसा तन अउ साँसा।
एक ओकरे ले सब आशा।।
तन मन प्रान धँसावौं।
रंग पियारंग लहरावौं।।
सबमें मोर पिया पगरैती।
चलै उहाँ नइ आने पैती।।
जगनारफाँस झटकावौं।
रंग पियारंग लहरावौं।।
शोभामोहन
१३/०१/२०२०
[8/10/2022, 20:46] Shobhamohan Shrivastava: रसिया रहि रहि मिलन बलात।
रसिया रहि रहि मिलन बलात।।
उसरपुसर के खुसर खुसर के,
बनभौंरा मनखँड़ मड़रात।
बहमतिया मन दँउड़त दँउड़त,
बिनपाँखी अंबर छू आत।।
रसिया रहि रहि मिलन बलात
आवत-जावत पिरित लुटावत,
तनबंधन सब छूटत जात।
मया मूरती पूजन पहुँचिस,
लोग करत अउ दस ठन बात।।
रसिया रहि रहि मिलन बलात
शोभामोहन
मनहरण घनाक्षरी
चमकत झझकत कनिहा ला लचकात,
ठमकत-ठमकत करत अई-अई।
पटक-पटक पगपैजन बजात बड़,
चटक-मटक सज गहना कई- कई।
छिन-छिन पहर न कटै दिन कोन कहै,
सजन मिलन पग चलत पई-पई।
उचक-उचक डग भरत चलत मग,
पूछे न बतात बस करत दई-दई।।
झलमल-झलमल लुगरा करत अउ,
फरफर-फरफर अँचरा लहरिया ।
गमकत धमकत चन्दरबदनी राधा,
सरभर सपन समोखत नजरिया।
खन-खन झन-झन गहना बजा-सजा के,
झुलना झुलन बर कदम के डरिया।
चलत खलत गाँव गलिन गँवारी गोठ,
मिलन-जुलन बर नेवते सँवरिया।
[8/10/2022, 20:47] Shobhamohan Shrivastava: राधा बिहारी बिहावगीत
राधा रानी ला चूरी पहिनावौ ।
कान खिनवा ओरमावौ ।
ओला चुटुक ले सजावौ हो।
चुटुक ले सजावौ हो।
सुघर चुटुक ले सजावौ हो।।
हरदाही लुगरा पहिरावौ।
माथा मउर ला बँधावौ।।
धरके मड़वा में लावौ हो।
मड़वा में लावौ हो।
धरके मड़वा में लावौ हो।।
राधा ला पहुँची पहिरावौ।
सूँता बंधा गर नावौ।।
अउ चुटुक ले सजावौ हो।
चुटुक ले सजावौ हो।
सुघर चुटुक ले सजावौ हो।।
पूजा कुँवारी करावौ।
हाथ हँथवा ला धरावौ।।
श्याम संग बिहावौ हो, घनश्याम संग बिहावौ हो।
सुंदरश्याम संग बिहावौ हो।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२५/०६/२०२२
महुदा
[8/10/2022, 20:48] Shobhamohan Shrivastava: श्याम भज मन श्याम।
साँसा उरकत हे सिराही,
श्याम भज मन श्याम।
नइ गड़े काँटा पिराही,
श्याम भज मन श्याम।
गाबे जिभिया नइ खियाही, श्याम भज मन श्याम।
सुख खोजत तोर द्वार आही,
श्याम भज मन श्याम।
अगमभवदहरा अँटाही,
श्याम भज मन श्याम।
दुख के बादर छँटत जाही,
श्याम भज मन श्याम।
ताप तीनो नइ जनाही,
श्याम भज मन श्याम।
जीव परमसुखलाभ पाही,
श्याम भज मन श्याम।
शोभामोहन
[8/10/2022, 20:53] Shobhamohan Shrivastava: राधा काट महाभवबाधा।
रसिकबिहारी जब बलिहारी, कृपाशिरोमणि राधा।
राधा काट महाभवबाधा।।
धारअजस्र दयाबरसैया,सोगही परमअगाधा।।
राधा काट महाभवबाधा।।
तापसमुकुटमणि हरिसजनी, मैं मूरख बड़जादा।
राधा काट महाभवबाधा।।
कविताकानन के गमकैया, भावटोभ मन माँदा।
राधा काट महाभवबाधा।।
मणिपोंसैया देह बियाकुल, काम-कोह पर फाँदा।।
राधा काट महाभवबाधा।।
धरम-करम मग इच्छल बिच्छल, सरभर गजरा गादा।
राधा काट महाभवबाधा।।
शोभामोहन गोड़गिरे लली, अंतस कर दे सादा।
राधा काट महाभवबाधा।।
शोभामोहन
१०/१०/२०२२
[8/10/2022, 21:47] Shobhamohan Shrivastava: साँवर सुघर कन्हैया जनमे(कुकुभ छंद)
कालकोठरी आठेतिथि हे, भादोरात निचटकारी।
साँवर-सुघर कन्हैया जनमे, हरे जगत के अँधियारी।।
जबर हथकड़ी साँकर छुटगे, गिरगे टूट-टूट बेली।
दाई-बाप छुड़ावत बंधन, करत कंस ले बरपेली।।
सबो पहरिया लठरत झुमरत, मनगमनींद लगिन भाँजे ।
बर्रावत अउ बड़बड़ बड़बड़, पटपर उन्डे हें आजे।।
फाटक खुलगे जेलकोठरी, धंँधनीखोली उजरागे।
एकसंग कतको ठन सूरुज, उवे हवै तइसे लागे।।
नारफूल सुद्धा सूपा मा, वसुदेवा जावन
लागे।
नंदगौंटिया के सुध करथे, जलरंगजमुना उफनाथे।।
ठउका जल उतरिस बसदेवा, सनसनात बढ़गे पूरा ।
वसुदेवा के पोंटा काँपत,अपन लुकावत हे टूरा।।
टोंटाभर पानी में नहकत, बापधरम हे बड़भारी ।
कलप-कलप के कालकोठरी, छटपटात हे महतारी।।
रझरझ-रझरझ पानी बरसत, शेषनाग छत्तर ताने।
जमुनाजल उफना-उफना के, गोड़छुवे जब्बरठाने।।
9/
तीनलोक चउदहोभुवन के, अगमबात ला प्रभु जाने ।
जमुनाजल हर पाँव पखारिस, आस पुरिस हे तब माने।।
जमुना नहके बाट ल देइस, बसदेवा ला तब जाके ।
रात दुआरी सँकरी बाजिस, नंद जागथे
कउवा के।।
अपन मीत के दसादेख के, आँखी ले छलकत आँसू ।
कहत बार नइ बाँधत हे सुख, होगे दुख हर जनमासू ।।
लइका ला जसुदाकोरा दे, जूड़ साँस ले वसदेवा।
सुखदुख बाँटत हे मितान सँग, भुगतत जिनगानी केवा।।
मइया जसुदा डारडिठौना, काजरआँजत सुघराथे।
चंदनअतर फुलेल छिंचाये, झबला कोंवर पहिराथे ।
नंदगाँव नरनारी लइका, चूमेचाँटे बर आके ।
सरग सुख ला निंदरत हावैं, भुँइया में नर तन पाके।।
सबो देवता साध सधाये, नाना तन ला धर
आथें ।
गइयाबछरू पंछी बनके, दरसपरस कर सुख पाथें।।
आवतखानी पछुवैया मन, देहधरे बर लुलुवागे।
उहू देव ब्रजधुर्रा बनके, हरि लीला देखन
लागे।।
ऋषिमुनि बनके गोपी ग्वाला, परगटपुन के सुख लूटै ।
संगरंग रँग लाहो ले बर,सब्बो झन के जीव छूटै ।।
बारोमास बसंती आके, ब्रजभुइँया में लोरियाथें।
तुर्रादूध गिरा गैया मन, कृष्ण कृष्ण कहि रँभाथें।।
शोभामोहन
[28/0819 10:01]
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