छत्तीसगढ़ी साहित्य के युगप्रवर्तक नक्षत्र कवि, समाज-सुधारक, हरिजन उद्धारक, पं. सुंदर लाल शर्मा ला जयंती के पबरित बेरा घड़ी म सुमरनी करत एक दुर्मिल सवैया
तुलसी जइसे बिरवा नइ हे, नदिया नइ देवसरी जइसे।
महिदेव सहीं अउ देव नहीं, जगराखन हे न हरी जइसे।
ममता नइ माँ जइसे ककरो, सुघरी सुरलोक परी जइसे।
चमकै नकछत्र छतीसगढ़ी, कबि सुंदर हे अछरी तइसे।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
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