छप्पा हाथ बनाही कोन
नवा नवा सिरजाये घर में,
जुन्ना जिनिस मड़ाही कोन।
बिगन हाथ ला हाँथा छापे,
नेवता नेवत बलाही कोन।
लोभ लमावत हाथ छुवे बर,
रीता मन गमकाही कोन।।
माते जोस लहन देखे बिन,
भुँकरत हे समझाही कोन।।
दसो उदिम ओरियावत तिसना,
जीव तोला सोरियाही कोन।।
बइद सवाँगे रोग बियावत,
पीरा तोर मिटाही कोन।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
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