Thursday, 2 March 2023

सतगुरु वंदना

सतगुरु वंदना 

सबके हाल बिहाल इहाँ हे, देखत हौं सरकार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

सरग नरक धरती सबमें हे, माया के बिस्तार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

इन्दर ब्रह्मा बनना चाहत, बल के करन प्रसार ।। 
सतगुरु भवदहरा कर पार।  

माया ठगिया तीन लोक में, राज करत जब झार।।  
सतगुरु भवदहरा पतवार।  

तोर शरन बिन मोर तरन नहीं, अब कर सोग उदार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

जब तक मन तोर भाँवर देथे, चल देथौं दिख पार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

मन धनहा मा साध सधौरा, जामत खरपतवार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

बनन बनन गिंजरत दुख पावत, जुग जुग जीव हमार।
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

लोभ मोह अउ रीस राँड़ मन, तपथें डेरा डार। 
सतगुरु भवदहरा पतवार।।  

बिसय मिलत बलकर होवत हे, दुर्गुण देह हमार।।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

पैपाखा मन घात लगाये, बिख उगले तैयार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

तोर दया बिन साध मिटै नहीं, कर लौं उदिम हजार।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

शोभामोहन सँउपत हावय, तोर उपर सब भार।।  
सतगुरु भवदहरा पतवार ।  

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन  
२६/०५/२०२२


चरन सतगुरु के, चित्त रख रे(राग भूपाली) 

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 

परमअलौकिक सबसुख चख रे। 

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 

सतगुरु समरथ अलखलखैया, 

सतगुरु समरथ अलखलखैया, 

गुरुपगचिनहा चल हरि लख रे।। 

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 

बाती तेल बिन दीपजलैया।  

बाती तेल बिन दीपजलैया।। 

लकलक होये सिख नख रे। 

चरन सतगुरु के, चित्त रख रे। 

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन  
१८/०२/२०२२ 
महुदा


गुरु वंदना

सतगुरु मोर बने डोंगहार।

भवदहरा गहरा तन बेड़ा।  
उठत गरेरा खात थपेड़ा।। 
अनुकुल करत बयार।  

सतगुरु मोर बने डोंगहार।
दुलमजनम पाके मानुखतन। 
भँउरी झेलै बनन बनन झन।।  
देख बिगन पतवार । 
सतगुरु मोर बने डोंगहार।

घुपअँधियार उवाटत खतरा।  
गुरुबर बनके चकमक पथरा।। 
लानत झक उजियार। 
सतगुरु मोर बने डोंगहार।

बाट न जानौं घाट न जानौं।  
जग नहकैया हाट न जानौं।।  
रहिथौं गुरु के भार।  
सतगुरु मोर बने डोंगहार।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन  

०७/०९/२०१९

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