Thursday, 2 March 2023

पिंउरी धोवाये गवन कराये

सैनिक के गोसइन के बिरहा

पिंउरी धोवाये गवन कराये

चलदेस तभो इहें हस लगथे, 
निकले होबे छोड़त मन। 

पिंउरी धोवाये गवन कराये, 
रूप झुलत उही नैन सजन।।

जगमग जोगनी लुकलुक लुकलुक, 
सुरता चुँदरी ओढ़त मन।

कहत आसरा झन थक बिरहिन, 
दरस सधौरा जोर जतन।। 

आमा मउरत फेर सँघरबो, 
सुख के बीजहा बोंबो घन। 

जंगल झाड़ी मरुथल राखत, 
भुला गये घर गाँव अपन।

देशराज रखवार शिरोमनी, 
साँस करत तोर नाव जपन।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...