Thursday, 2 March 2023

छत्तीसगढ़ी फागगीत

फागगीत 


फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 


होरी खेले नंदलाल। 

पिचकारी ला निकाल।। 

ओमा भरे रंग लाल। 

राधारानी ला रंगाये रंगाये रंगाये। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

खोली कोती हे लुकात।। 

मन मन मुसकात।

राधारानी हे सधात।।

कान्हा के रंग मा रंगाये रंगाये रंगाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कान्हा छींचत गुलाल। 

कान्हा छींचत गुलाल।। 

ग्वाला मिरदंगा बजाये बजाये बजाये।।

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

सुध बुध ला भुलाय।

सब होरी खेले आय।। 

सबो रंग मन भाय।। 

बिधुन नगाड़ा बजाये बजाये बजाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

राधा रानी हा लजात। 

बान नैन के चलात।। 

खोली कोती हे लुकात।।

कान्हा हावै हुरियाये हुरियाये हुरियाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कोनो हावै भंग खाय। 

कोनो हावै रंग लाय।। 

होरियारा संग लाय।। 

फगुवा के रंग मा मताये मताये मताये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

माते गोकुल मतवार।

गली पारत गोहार।। 

रंग बरसत धार।। 

करके इशारा बलाये बलाये बलाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 


शोभामोहन 

३०/०१/२०२२

[3/2, 19:29] Shobhamohan Shrivastava: फागगीत 


फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 


होरी खेले नंदलाल। 

पिचकारी रंग लाल।। 

राधारानी ला रंगाये रंगाये रंगाये। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

मन मन मुसकाय।

राधारानी हे सधाय।।

कान्हा के रंग मा रंगाये रंगाये रंगाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कान्हा मलत गुलाल। 

राधा रनिया के गाल।। 

ग्वाला मिरदंगा बजाये बजाये बजाये।।

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

सुध बुध ला भुलाय।

सब होरीयारा आय।। 

 बिधुन नगाड़ा बजाये बजाये बजाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

राधा रानी हे लजात। 

बान नैन के चलात।। 

कान्हा हावै हुरियाये हुरियाये हुरियाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कोनो हावै भंग खाय। 

कोनो हावै रंग लाय।। 

फगुवा के रंग मा मताये मताये मताये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

माते सबो मतवार।

गली पारत गोहार।। 

संगी साथी ला बलाये बलाये बलाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 


शोभामोहन 

३०/०१/२०२२

[16/2, 14:44] Shobhamohan Shrivastava: फागुन महीना रंग रझरझ बरसा (छत्तीसगढ़ी फाग लोकगीत) 


फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


बनत कलेवा पिड़िया अउ अरसा । 

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


रंगे रंगाये बर काया के करसा।

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


भाँगे खवैया गिरत मूड़भरसा।

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


रंग चढ़ा दे चुक हिरदे ला हरसा। 

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


माते होरी मा भुलावौं घर धरसा।

फागुन महीना रंग रझरझ बरसा।। 


शोभामोहन 

१६/०२/२०२२

[16/2, 14:54] Shobhamohan Shrivastava: *फागगीत (राग हिंडोल वसंत)*


*उड़त गुलाल गली गोकुल के, नंदलाल खेलत होरी।*

*नंगत हे हुड़दंग मचावत, रंग लगा रधिया गोरी।।* 


*बचत बचत सब भगत गुवालिन, रंग बरसत सब ओरी।*

*गाल गुलाल गुवाल लगावत, दल बल टोली जोरी।।*


*बाजत माँदर नाल नगाड़ा, रस रंग जन मन बोरी।*

*बाल जवान अउ बुढ़ुवा मन, लानत हे रंग घोरी।।*


*धरनी में सुख परम अलौकिक, लूटत बिरिज किशोरी।।* 

*शोभामोहन के रंगरसिया, करत जबर बरजोरी।।* 


*शोभामोहन*

*१५/०२/२०२२*

[16/2, 14:57] Shobhamohan Shrivastava: *फगुनवा हे(छत्तीसगढ़ी लोकगीत)* 


*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा,*

*कद काछनी रंग चटक फगुनवा,*

*बैन नैन के मटक फगुनवा,*

*मूड़ में पीक मँजूर कुंडल, गरहार फगुनवा हे।।* 

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*माथा खउरा चंदन फगुनवा,* 

*पागा पागी बदन फगुनवा,*

*नंदनंदन सुखसदन फगुनवा,*

*मोती मणि माणिकमाला, उजियार फगुनवा हे।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*चोली चुंदरिया रंग फगुनवा।* 

*गाँठ बँधाये संग फगुनवा।।* 

*झुमका झुलत मलंग फगुनवा।।*

*रुनुक झुनुक पैजन चूरी, झनकार फगुनवा रे।*

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।* 

*भुँइया देत अलाप फगुनवा।।* 

*पिया पिया के जाप फगुनवा।।* 

*रंगत रंग ब्रज अपन संग, सरकार फगुनवा हे।।*

*शोभामोहन के जीवनधन, करतार फगुनवा हे।* 

*ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे।* 

*सिंगार फगुनवा जुगल छबि के, सिंगार फगुनवा हे।।* 


*शोभामोहन* 

*०६/०२/२०२२*

[5/3, 08:38] Shobhamohan Shrivastava: मख मुरली बजाय धुन में ये फागगीत ला गाये के कृपा करते दिलीप भाई।🙏💐 


फागगीत 


फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।। 


होरी खेले नंदलाल। 

पिचकारी ला निकाल।। 

ओमा भरे रंग लाल। 

राधारानी ला रंगाये रंगाये रंगाये। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

खोली कोती हे लुकात।। 

मन मन मुसकात।

राधारानी हे सधात।।

कान्हा के रंग मा रंगाये रंगाये रंगाये।। 

फागुन महीना हे आये हे आये हे आये।।

कान्हा छींचत गुलाल। 



 

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