Thursday, 2 March 2023

छत्तीसगढ़ी बिहतरा गीत


🌹 *बर बिहाव  गणपति वंदना* 🌹



*गौरी पूत दुलरवा गनपति ,आवौ रिद्धि-सिद्धि धर के।*


*सबो बिघन अउ अल्हन टारौ,मंगलमूर्ति दया करके।।*



*लीप दुवारी घर अउ अँगना,गंँठियारी दूबी खनके।*


*फूलपान रख थार सजावौं, हरदी के गाँठी गन के।।* 



*पान सुपारी नरियर लानौं,चाँउर पिंयर रंग सने।।*


*तूस ओढ़ना मा पधरा के, रोली टिपका डार बने।।*



*भर के गंगाजल लोटा मा,आमा पान मड़ाये हौं ।* 


*चउँक पूर के रख के पिढ़वा, दीया कलश चढ़ाये हौं ।।*



*शोभामोहन*

[28/5, 15:09] Shobhamohan Shrivastava: 


बिहावगीत (छत्तीसगढ़ी लोकछंद) 

बिहाव तेलचग्घी गीत

कोड़ खन हरदी मँगाये मोरे राजा ददा, 
भिरहा के हरियर बाँस गो।

रुनझुन मड़वा गड़ाये माँझ अँगना के, 

सुवासिन चढ़ात तेल हाँस गो।। 




रंगझाझर अँगना दुवार गो।। 


जनम दियेस पाल पोंस के बढ़ायेस, 

पर घर काबर पठोत गो। 

आँखी के पुतरी असन मोला राखे ददा, 

कोरा ले काबर अलगात गो।। 


धनभाग जेन तोर बाप बनेंव बेटी।

बिदा देये के बेटी ला रीत ओ।

पथरा लदक छाती भेजत हौं तोला हीरा, 

रख लेबे दूनो कुल के लाज ओ।। 


शोभामोहन 

२७/०५/२०२२

महुदा


लाईलवा बिहतरा गीत



कइसन दुलही के ढेड़हा ढेड़हिन हे,

ढेड़हा ढेड़हिन हे, लाई फोरन नइ जानै हो।।

लाई फोरन नइ जानै दुलही के फूफू, 

लाई फोरन नइ जानै हो, लाई फोरन नइ जानै हो।

रुनझुन पहिरे लुगरा झलमल झलमल,

झलमल झलमल, लाई फोरन नइ जानै हो ।।

भंगभंग ले पोलखा बड़ चिकमिक चिकमिक, 

चिकमिक चिकमिक, लाई फोरन नइ जानै हो ।।

आगी कंझावत दूनो करत गिजगिज गिजगिज, 

करत गिजगिज गिजगिज, लाई फोरन नइ जानै हो। ।

छैला के बहिनी भाँटो करत मटमट मटमट, 

करत मटमट मटमट, लाई फोरन नइ जानै हो। 


शोभामोहन 

०१/०६/२०२२

महुदा



बिहाव गीत (लाईलवा के नेग) 


लाई फोरौ सुवासिन पटापट हो लाई फोरौ पटापट।

नेंगचार ला करौ झटापट हो लाई फोरौ पटापट।। 


कइसे फोरन लाई पटापट हो कइसे फोरन पटापट। 

मड़वा में मनखे कटाकट ओ कइसे फोरन पटापट।। 


दुलरु के भउजी हा आके  रितो दिस, आके रितोदिस।

चूल्हा में पानी सटासट ओ कइसे फोरन पटापट।। 


नेंग जोग करौ ढेड़हिन सुवासिन, ढेड़हिन सुवासिन ।

ददा दिही पइसा फटाफट हो, लाई फोरौ पटापट। 


लाहो लेवत हौ सबो झन घर भर, सबो झन घर भर। 

हाथे हा जरत चटाचट हो कइसे फोरन पटापट। 


जोड़ी ला तोरे बला ले ओ ढेड़हिन, बला ले ओ ढेड़हिन ।

पंगत में झेलत गटागट हो, लाई फोरौ पटापट।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

०१/०६/२०२२


बिहावगीत 


दुलही ला दुलरू के हाथ देवौ दाई ददा, 

कैना के दान कराव हो। 

पीतल परात पानी लोचन भरके राखौ, 

चाँउर टीकौ पाँव पखार हो। 

धर के सिंघोलिया भाँवर देवावव आगी। 

पिया संग जुड़ जाही गोत हो। 

सुपली में लाई भर बहिनी ला दे दे भाई, 

दुलरु अंजरि ले गिरवाव हो।। 

साखोचार पढ़ा के असीद दौ चाँउर छिंच, 

दाई झन धड़धड़ रोव हो। 

दुलरू सेंदुर देवौ चर चर ले माँग भर,

नवाइन माहुर लगाव हो। 

ससुरे के पूछनी के लुगरा पहिरा ओढ़ा, 

बिदा बर मउर सँउपाव हो। 

मइके मया के आँखी रझ रझ झड़ी लगे, 

हाँसत लहुटत बरात हो। 


शोभामोहन

३१/०५/२०२२

दुलही बिहाये बर जाबे रे दुलरुवा। 


लगा तोला छतिया, कहे बर हे मनबतिया, 

दूध के करजा ला चुकाबे रे दुलरुवा।। 

दुलही बिहाये बर जाबे रे दुलरुवा।

लगा टीका करिया, उतारौं डीठ नजरिया।। 

नवा-नवा नता मा बँधाबे रे दुलरुवा।। 

दूध के करजा ला चुकाबे रे दुलरुवा।। 

सँउप मउरिया, छोड़ावत हौं अँगुरिया।

हाँस खेल जिनगी पहाबे रे दुलरुवा।। 

दूध के करजा ला चुकाबे रे दुलरुवा।। 

मोरेबर बहुरिया, तोरेबरढचीइ संगी जँहुरिया। 

भाँवर पार के घर लाबे रे दुलरुवा।। 

दूध के करजा ला चुकाबे रे दुलरुवा।। 

दूधे खाबे दूधे मा नहाबे रे दुलरवा।

महतारी के मन ला बोधाबे रे दुलरुवा।

दूध के करजा ला चुकाबे रे दुलरुवा। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

०७/०६/२०२२

महुदा


विवाह लाईलवा गीत 


दूलरू के बहिनी अबड़ रंगरेली,

भारा बाँधत भाई के बिहाव हो।

रे गिंयागड़ी भारा बाँधत भाई के बिहाव हो 


लाई नइ फोरन दैं बियाधा परपोगतरी, 

लाई नइ फोरन दैं बियाधा परपोगतरी, 

चूल्हा पनिया डारैं बड़ोर हो। 

चूल्हा पनिया डारैं बड़ोर हो। 

दूलरू के बहिनी अबड़ रंगरेली,

दूलरू के बहिनी अबड़ रंगरेली,

भारा बाँधत भाई के बिहाव हो।

रे गिंयागड़ी भारा भाई के बिहाव हो 


दूलरू के बहिनी राज भर के चोरही, 

दूलरू के बहिनी राज भर के चोरही, 

लाई बेंचि डरिन डोहारे हो।।

लाई बेंचि डरिन डोहारे हो।। 

दूलरू के बहिनी अबड़ रंगरेली,

भारा बाँधत भाई के बिहाव हो।

रे गिंयागड़ी भारा बाँधत भाई के बिहाव हो 


शोभामोहन

२९/१२/२०२२


गनपति सुमरनी गीत 


चंदनचौंकी सतरंग दसना दसा

गौरी गनपति पधराँव हो।।

मंगलकारी मंगलशुभ बेरिया प्रभु, 

करि दौ हथेरिया के छाँव हो।। 


चंदनपिढ़वा फूलकसिया लोटिया, 

मंगलकरसा सजाँव हो।

धियरी बिहतरा सगुन कर बेरिया, 

तैतीसों देव मनाँव हो 


छत्तीस रंग भोगराग लगा गनपति, 

घेरीबेरी करँव जोहार हो।। 

रिधियन सिधियन सुमिरौं सुमंगल बर, 

लाली चुंदरिया चढ़ाव हो 


शोभामोहन 

२९/१२/२०२२




गा१/बिहावगीत




ऊँच-ऊँच बेदी बनवाये मोरे राजाददा,


चुलमाटी लाने नदीघाट गो । 


झेंझरहामड़वा छवाये अमुवा डरिया, 


मोर बदन कुम्हलात गो। 



कहिबे तैं बेटी तौ मैं छतरंगी तनाई देहूँ, 


डुमरडारा रबि करौ लोप ओ। 


काबर ददा गा तैं तो छतरंगी तनइबे।


कोरा में रखि ले ना तोप गो।। 



हरदी के रंग मोर तन ला रँगत ददा, 


तेलमउरी गड़त हे माथ गो। 


अँचरा देथस दाई छँइहा करन फेर, 


बरत अगन तन मोर ओ।। 



रंगबिरंग चाँउर करसा साजे सुवासिन, 


दियना जलाये भर तेल ओ ना। 


माँग भरागे रगरग ले सेंदुर मोरे,


फुफू मोरे सेंदूर सुधार ओ। ।




शोभामोहन


०१/१२/२०२१ 


गँठजोरावगीत


सातो जनम बर गाँठी बँधाये नोनी गाँठी बँधाये नोनी, 

अम्मर रहै एहँवात अवो नोनी अम्मर रहै एहँवात



तीजाहीगीत


सातोबहिनिया तीजबरतनिरजल

फूलेफूलमड़वा सजाय लगे माई।


गौरागौरीसुमिरतमंगलकलशा 

गउघीवदियना जलाय लगे माई। 


तीजेपूजेगरहुनी अटलसोहाग बर

जोरिदसोअँगरी मनाय लगे माई।


सेंदुरचूरीचुटकीबिछियासिंगारकर

अछतसोहाग सधाय लगे माई।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


बिहावगीत 


जुगुर बुगुर बरत मड़वा मा कलशा,

धुकुर पुकुर जीव होत।। 

पूछत धिया ददा के खाँध फिजोवत, 

झरझर झरझर रोत।। 


एके कोख जनमाये भाई अउ मोला ददा, 

आज फेर कर देस भेद।। 

भइया ल दिये घर खेत खार बखरी, 

मोला दिये परदेस।। 


शोभामोहन 

०१/०१२/२०२१

राधा बिहारी बिहावगीत


राधा रानी ला चूरी पहिनावौ । 

कान खिनवा ओरमावौ । 

ओला चुटुक ले सजावौ हो।

चुटुक ले सजावौ हो। 

सुघर चुटुक ले सजावौ हो।। 


हरदाही लुगरा पहिरावौ। 

माथा मउर ला बँधावौ।। 

धरके मड़वा में लावौ हो। 

मड़वा में लावौ हो। 

धरके मड़वा में लावौ हो।। 


राधा ला पहुँची पहिरावौ। 

सूँता बंधा गर नावौ।। 

अउ चुटुक ले सजावौ हो।

चुटुक ले सजावौ हो। 

सुघर चुटुक ले सजावौ हो।। 


पूजा कुँवारी करावौ। 

हाथ हँथवा ला धरावौ।। 

श्याम संग बिहावौ हो,

घनश्याम संग बिहावौ हो।

सुंदरश्याम संग बिहावौ हो।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२५/०६/२०२२

महुदा 

बिहाव लोकगीत 


जनकपुरी में आये राजदुलरूवा दू झन।

एक लखन एक राम हो। 

राजा दशरथ के लइका सुलुंग सपेटा सुघ्घर। 

अवधपुरी उँकर धाम हो।। 


जनक रामहलिया सिया स्वयंबर होही।

तेला देखन बर आत हो।

मंगल मुरतिया मोहनकारी दूनो के गड़ी। 

रूप बरने नहीं जात हो। 


पट पीताम्बर पहिर धरे धनुष गोई। 

मुचुर मुचुर मुसकात हो। 

सीता सोभही सुघ्घर साँवर दुलरू संग।

घरोघर चलत हे बात हो।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

३१/०५/२०२२

महुदा दुर्ग 

बेटी बिदाई 


धियाधन परधन। 

पथरा लदक मन।।

भेजत हवन ससुरार।।

रानीबेटी कर ले सिंगार। 


रूनझुन हे पैजन।

चूरी कंगन खनखन।। 

चुप चुप अँगना दुवार। 

रानीबेटी  सिंगार।


अछत सोहाग रहै।

अनधन भरे रहै।। 

ओलीधर असीद हमार।

रानीबेटी सोहत सोलह सिंगार।


ददा रोये मन मन।

बहिनी लपट तन।। 

दाई तो रोवत सतधार।

रानीबेटी सोहत सोलह सिंगार।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

२८/०८/२२ 

शुभस्थान-महुदा 

/बिहाव गीत 



ऊँच ऊँच महल टेकाये तैं राजा ददा।


बींच बीच जंगला लगाय हो।


तेकरे बरेंडी बइठे बोलत हावै सुवना,


मगन प्रभु के गुन गात हो।। 



हरदी छिटका देके भेजे पतिया बड़ दूर। 


लिख तोर समधी के नाम हो। 


चिठिया ला पढ़ ओ तो आहीं बिहाये बर, 


बेटवा के धरके बरात हो।। 



नइ लेगैं सोना चाँदी धन धोगानी समधी, 


सुवना ला माँगे मन ठान हो। 


हाँसत आही ददा धरके बरतिया ला, 


सुआ जाही आँसू चुचवात हो।। 



शोभामोहन 


०१/१२/२०२१


पाटन
२/सोहाग गीत

लानौ डुमर पिढ़ुली, लानौ करसा कलौरी।

धरा हँथवा नरियर, सुमिरन करौ गौरी।। 


अँगरी धर सुवासिनी लानौ बिलरी ओरिया।।

सेंदुर दे दौ दुलही ला सुहागिन तिरिया।। 


आवौ ओ कुम्हारिन करौ सोलह सिंगरिया।

सेंदुर दे दौ दुलही ला सुहागिन तिरिया।। 


आवौ हो मरारिन करौ सोलह सिंगरिया ।

सेंदुर दे दौ दुलही ला सुहागिन तिरिया।। 


आवौ हो धोबनिन करौ सोलह सिंगरिया।

सेंदुर दे दौ दुलही ला सुहागिन तिरिया।। 


शोभामोहन

२१/११/२१

मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं 



मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं। 

मया के पीरा ला मटिया के जात हौं।। 

झन भुलाहू,

झन भुलाहू मोर दाई झन भुलाहू मोर भाई।

मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं।


लुगरा के कतेक बने अउ गीनहा।

जीयत मरत के दे दौ कुछु तो चिनहा। 

झन भुलाहू मोर दाई झन भुलाहू मोर भाई।

मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं।


का चिनहा हे जग में मन बोधना। 

ठाँव ठाँव में गोदा दे दाई मोर गोदना।। 

झन भुलाहू मोर दाई झन भुलाहू मोर भाई।

मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं।


हुन हुन रोहू बिदा के बेर ओ।

बाजा-रूँजी ला बजाहौ करेजा ला हेर ओ।। 

झन भुलाहू मोर दाई झन भुलाहू मोर भाई।

मइके के सुरता ला गँठिया के जात हौं।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

०७/०५/२००३

शुभस्थान-राजिम

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...