मोहन रसराज रसिया हे (करमागीत )
मोहना रसराज रसिया हे।
मोहना रसराज रसिया हे ना।
हाय रे मोहना रसराज रसिया हे,
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
जड़ीजड़े पिंयर पिंयर कद करधन ।
मूड़ी हे पागा लहरिया।
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
हाय रे मोहना रसराज रसिया हे,
मोहना रसराज रसियाया हे ना।।
मउर अउर हे खउर तन चंदन।
हाथे में धरे हे बँसुरिया।
मोहना रसराज रसिया या हे ना।।
हाय रे मोहना रसराज रसिया हे,
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
झिलमिल झिलमिल कान के कुंडल।
घुँघराली घन केस करिया ।
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
हाय रे मोहना महराज छलिया हे,
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
लरलर गरभर रिगबिग माला।
लटकत लटक लहरिया।।
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
हाय रे मोहना रसराज रसिया हे,
मोहना रसराज रसिया हे ना।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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