बिरिज ब्रजराज छाये हे (करमागीत)
बिरिज ब्रजराज छाये हे
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
हाय रे बिरिज ब्रजराज छाये हे।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
झमके झमकझम झक्क कोसोही,
मूड़ मुकुट खपाये ।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
हाय रे बिरिज ब्रजराज छाये हे।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
बइठ बजावत बिधुन बँसुरिया,
गउ ग्वालिन बकखाये।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
हाय रे बिरिज ब्रजराज छाये हे।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
रिगबिग रिगबिग बरत सुरुज कस,
मनिमाला झमकाये।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
हाय रे बिरिज ब्रजराज छाये हे।
बिरिज ब्रजराज छाये हे ना।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
३०/१२/२०२२
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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