चौघड़िया छंद
लिखा जाता है
जो 16 और 12 मात्राओं पर यति का मात्रिक छंद है सम चरण तुक ।
1/
ना तो
बोले-चाले चिटको,
ना तो वो
मुस्कावै।
का होगे हे
संगवारी ला,
कुच्छु समझ नइ
आवै।।
2/
कोनजनी काबर
रहिथे ते,
चुप-चुप मुँह
ल फुलोये।
काकर सुरता
आथे तेमा,
रहिथे खोये-खोये।
3/
बिहिना जाथे
कहाँ-कहाँ ते,
संझा कुन घर
आथे।
एको टप्पा बोल
चाल नइ,
बइगुन समझ न
आथे ।।
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