जगतजननी
स्तुति
जय जग जननी , जगत चलइया ।
अपन भगत बर, सुख बरसइया।
जय जगदंबा, सुगुन धरइया।।
रकसा रक्सीन
मार गिरइया।।जय जग जननी
साधू संत के जीव
जुड़इया ।
रोग दोख दुख
शोक टरइया।।
दुख सुख सबले
पार करइया।
बइठे ड़ोंगर
ऊपर मइया।।जय जग जननी
रनभुँइया अरि
मार जीतइया।
जगधारन अउ
कारन मइया ।।
अमरित करसा
शुभ छलकइया।
मोह मया
अँधियार कटइया ।।जय जग जननी
दुख दगली हर
मन हरसइया।
राखौ सोग दया
के छइया।।
पाल पोसके जीव
रखइया।
निर्मल भाव
सदा परखइया।।जय जग जननी
डर संसो भय
छाँद कटइया।
शैलधिया
ब्रम्हरिनी मइया।।
घंटाचन्द्र
स्वरूप धरइया।
परम शांत थल
प्रान तपइया।।जय जग जननी
भाग करम के
लेख लिखइया।
दे बरदान
दयालू मइया ।।
कुष्मांडा सुख
साध पुरइया ।
कात्यायिनी हे
जीवबोधइया।।जय जग जननी
कालराती बन
जीव हरइया ।
जय गौरी जय जग
सिरजइया।।
जय शंकर के
बाम रहइया।
सबो काज के
सिद्धकर इया।।जय जगजजनी
जय जगदम्बा
शारद मइया
भवतिक जग दुख
ताप हरइया।।
भवदहरा पतवार
बनइया।
मारन तारन खेल
रचइया।
सब उझार के अउ
सिरजइया।।जय जग जननी
दया मया उपकार
करइया ।
गुप्त प्रकट
जग काज करइया।।
सुखकर अमरित
धार बहइया।
दुर्गा काली
रूप दिखइया।। जय जगजननी
सुख वैभव के
साध पुरइया।
भक्ति शक्ति
के पर छइया।।
ग्यान अँजोरी
के बगरइया।
मन उज्जर कर
बुद्धि बढ़इया।।जय जग जननी
शोभामोहन आथ
धरइया ।
जगत दुरुग मे
जीव फँदइया।।
काया माया मा
भुलवइया।।
दुर्गति ले
भगतन दुरिहइया। जय जग जननी
शोभामोहन
संविधान के
बाट बता जा
भीमराव
अम्बेडकर, लिखे हिन्द संविधान ।
शिल्पकार भारत
सुदिन, कानूनी विद्वान ।।
तोर बताये बाट
भुलागे । अब तो निच्चट कलउ उखरागे ।।
सबके मन मा
भेद भरे हे । अंते-तंते मंत्र धरे हे ।।
बिगन बूझे
जाने चिचियाथे । आने ताने गाना गाथे ।।
फँसत हवै बैरी
के फाँसा । समझ न पावत ओकर झाँसा ।।
मनखे गढ़के
नावा नारा । भुला गये हे तोर तियारा ।।
भेद भाव के
खोदत खाई। सपना करके राई-छाई।।
तोर नाम ला
करके आगे । कोनो स्वारथ साधन लागे ।।
एक बेर अउ
बाबा आजा । संविधान के बाट बता जा ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
अमलेश्वर
रायपुर छ.ग.
#######################
काल बता के तो
नइ आवय
#######################
सबो मरे बर
जनमे हावय ।
काल बताके तो नइ
आवय ।।
आँखी बाँधे
टोपा प्रानी ।
हे फँदाय
चौरासी घानी ।।
गिंजरत
अँखमुन्दा मनमानी ।।
जबर बात नइ
होत गलानी ।।
ठलहा बइठत
आल्हा गावय ।
काल बताके तो
...................1/
जीव जगत के
नता रुँधाये ।
बिन
डोरी-डाँवा छंदाये ।।
बंधन बारिक
कोन जनाये ।
बिरला कोनो
जाने पाये ।।
बाँचे भेंड
सरीख झपावय ।
काल बता के
तो................2/
#######################
शोभामोहन
श्रीवास्तव
तोला टमड़न कोन
बचन मा ?
तीनलोक चउदहो
भुवन मा
जोगी साधू तापस तन मा।
गुरुपन माँझा
अउ लघुपन मा
गोठ बात विग्यान
बचन मा ।
झगरा झाँसा के
अरझन मा ।
जिभिया के
फरकन थिरकन मा ।
प्रकृति भर
बगरे जड़पन मा ।
सब चेतन के
हलन चलन मा ।
रीस दुख अड़कन
भड़कन मा ।
बुधियारा के चालचलन
मा ।
अड़हा के
व्यवहार बरन मा ।
मया दया अउ
दुख तड़पन मा ।
राग रोग रग रग
बगरन मा ।।
अमरित धरसा
गोड़ धरन मा ।
तोर मोरपन के
मिंझरन मा ।
हान लाभ जय
बिजय चरन मा ।
इन्द्रिय
तन्तु बिषय छुअन मा ।
कारन कारज जगत
भुवन मा ।
कटकटात चिंतन
के वन मा ।
आगम निगम
पुरान रटन मा ।
रसरसहा जर ताप
बिघन मा ।
विजय वाध्य
थिरकन नरतन मा ।
दुर्घट तर्क बितर्क करन मा
।
अकल तत्व छिन
भर दरसन मा
रस रंझाझर
बुड़े भवन मा ।
शोक बियाकुल
जग कुटियन मा ।
कस्तूरी धरके
भटकन मा।
बेरा के रटफट
चटकन मा ।
परम पुरुख तँय
जब कन-कन मा।
तोला टमड़न कोन
बचन मा ।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
१४/०२/२०
#######################
कोन सदा रहिथे
कन कन मा
########################
ए जगती तल के
कन-कन मा ।
पाना मन के हलन चलन
मा ।।
संझा नदिया के
दरपन मा ।
केसर छींचत नभ
के तन मा।।
कोन सदा रहिथे
कन कन मा......
बड़े बिहनिया
ओस झरन मा ।
भुँइया चूमत
सुरुज किरन मा ।।
मन मा मधुरस
मया घुरन मा ।
अँगना चाँदन
चँउक पुरन मा ।।
कोन सदा रहिथे
कन-कन मा ......
सागर नदियाँ
लहर-लहर मा ।
कोन बसे हे
सबो डहर मा ।।
चोला ठाठ रचे
पिंजर मा ।
परिया धनहा
जतर-कतर मा ।।
कोन बसे सुख
के संचरन मा।
कोन सदा रहथे
कन कन मा ।।
बादर के भड़-भड़
गरजन मा ।
डारा-पाना के
झुमरन मा ।।
जीव जगत गोला
घुमरन मा ।
संत गुनी मन
के सुमरन मा ।।
लुकछिप सपटे
खुसर अगन मा ।
कोन सदा रहिथे
कन कन मा ।
टाटा-टउवा चलन-फिरन मा।
सुख-दुख लहरा
उठन-गिरन मा।।
पार बाँधथे
घाट तिरन मा ।
मरन मोटावन अउ
खिरन मा।।
रहत लोहाटी अउ
कंचन मा ।
कोन सदा रहिथे
कन कन मा ।।
########################
शोभामोहन
श्रीवास्तव
१४/०१/२०२०
#######################
#######################
कलेचुप
#######################
कुटिल कुटिल
मुस्कान कलेचुप ।
मया मिटाये मान
कलेचुप ।
आलस भरे बिहान
कलेचुप ।
सँझा किरन
मलान कलेचुप ।
कुलकत धरती
राग कलेचुप ।
बादर नेतत पाग
कलेचुप ।
मिटका झन अब
जाग कलेचुप।
जागत हावय भाग
कलेचुप।।
कलियन होत
जवान कलेचुप ।
भौरा सन
गोठियान कलेचुप ।।
करत फूल रसदान
कलेचुप ।
पुरवा बेधत
बान कलेचुप ।।
धरनी रंग
रिझात कलेचुप।
बादर उड़े बलात
कलेचुप ।।
मन दू भाग
बटात कलेचुप ।
चोला जग
डेनियात कलेचुप ।।
########################
शोभामोहन
श्रीवास्तव
########################
झनकत हावय बँसुरी के धुन
नाचत गोपी गावत मोहन ।।
रास रचावत रतिहा मधुबन,
लठरत हे तन झुमरत हे मन ।।
#######################
सबो दृश्य
तोरे जस गाय
#######################
हर मुहरन मा
तहीं लुकाय । सबो दृश्य तोरे जस गाय ।।
भिनसरहा
रक्तालाली मा ।
मंँझन छन
बुलकत जाली मा ।।
झूलफुलहा के
खुशियाली मा ।
आज परनदिन अउ
काली मा ।।
तोर होय के
ढंग जनाय । हर मुहरन मा तहीं लुकाय ।।............1/
चंदा तारा जुड़वासा मा ।
चित अउ पट
दूनो पासा मा ।।
सुनता बिमता
के बासा मा ।
अनचिन्हार
रहिके साँसा मा ।
निचट कलेचुप
तँही समाय ।। हर मुहरन मा तहीं लुकाय ।।..............2/
गमकत भुँइया
फूलवारी मा ।
बेरा के
पहरादारी मा ।।
सोहागीन के सिंगारी
मा ।
सोन रेफ के
उजियारी मा ।।
सब मा सुघरइ
तहीं बसाय। हर मुहरन मा तँही लुकाय ।।.............3/
######################
शोभामोहन
श्रीवास्तव
######################
बेरा
***********************
सुरतापाती बाँचत बेरा।
आँखी-आँखी नाचत बेरा ।।
पाँव पैलगी कोन करै अब,
धोबी-पटका काँचत बेरा।।
आँखी धरे अगोरा सुतके,
सपना मा सुख जाँचत बेरा ।
रंगमंच के बहिरुपिया ला,
गड्ढा खनके खाँचत बेरा ।।
************************
शोभामोहन
*कब आबे तैं बोल लहरिया* (राग मल्हार)
बरसत बादर
करिया-करिया।
जल बुँदियन
छलकात गगरिया ।।
बरसत
बादर.............................
1/
दूबी जामत ले
बरसत हे ।
छान्ही परवा
तरी धँसत हे ।।
खेत जोताय नइ
इक हरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
...............................
2/
सरी कोठ भर
उपकत रेला ।
सोग लगत हे
देखत तेला ।।
आँसू ढ़रकत
फिजत अँचरिया।
कब आबे तै बोल
लहरिया ।।
बरसत बादर
..........................
3/
गरजन घुमरन
सुनके बादर ।
अंडा साँप
फूटत भुँइया भर।।
छलकत बहकत
नदिया तरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
................................
4/
नभ मा बगुला
पाँत उड़ावत ।
अउ भुँइया के
जीव जुड़ावत ।।
मोरे मन धनहा
हे परिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया।।
बरसत बादर
..............................
5/
बइठ बरेंडी
कँउवा बोलत ।
गियाँ गड़ी बन
हाँसत ठोलत।।
रहन धराये हे
सुखलरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत
बादर............................
6/
लउकत बिजुरी
देख डरत हौं ।
तोर बिगन दिन
रात मरत हौं ।।
बज्र असन हे
कटत उमरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
.....................
7/
जब अंतस पीरा
नइ जाने ।
रहिते छेल्ला
काबर लाने ।।
डार मोहनी भगा
उढ़रिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर ...........................
शोभामोहन
१७/०२/२०
आवागमन करें
सब कोई (चौपाई)
जा जसि नदी
समुन्दर सोहे ।
तस चेलाजन नत
गुन बोहे ।।
गोठ मिठास भरे
गुठियावे ।
अउर सबो गुन
धरि सुख पावे ।।
जेहि प्रताप
सदा दिन रसना ।
उगले सत
हितकारी बचना ।।
रे जन जोगी
जोग सधाये ।
इन्द्री बस
करि ईश्वर पाये ।।
नित आनंदमगन
रखि चोला ।
पाय सदा वही
सुख अमोला ।।
तन कस जोगी कस
सुख पाये ।
सबदिन मगन रहे
जग आये ।।
यह संसार है
एक सराया ।
मत कह अपना और
पराया ।।
आवागमन करें
सब रोई ।
मर्म लाख में
समझे कोई ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
रायपुर छ.ग
मधुबन रास रच
इया खोजँव
गर बनमाल
सजइया खोजँव ।
चंदन खउर
लगइया खोजँव।।
दसमत फूल खोचइया
खोजँव ।
महर महर
ममहइया खोजँव ।
बन बन गाय
चरइया खोजँव।
मधुबन रास
रचइया खोजँव ।।
गगरी फोर लुकइया
खोजँव ।
गोपी नाच
नचइया खोजँव ।।
ग्वालिन चीर
छिपइया खोजँव ।
मोहन किशन
कन्हइया खोजँव ।।
बँसी नीक
बजइया खोजँव ।
पाँख मँजूर
लगइया खोजँव।
शोभामोहन
नइ हे
हरियर रँग चिरइया नइ
हे ।
बर बिहाव
गवइया नइ हे ।
पति के गोड़ दबइया
नइ हे ।
दया मया बरस
इया न इ हे ।।
घर मा कहूँ
बरजइया नइ हे ।
कोठा नइ हे
गइया नइ हे ।
गमछा कुरता
धोती नइ हे ।
नदिया मा जल
सोती नइ हे ।।
बेटी खाँध
चुनरिया नइ हे ।
बहुरी मूँड़
अँचरिया नइ हे ।।
माटी के अब
दोहनी नइ हे ।
बात मीठ मन
मोहनी न इ हे ।
शोभामोहन
बेरा के रइचूली हर तो, नीचे ऊप्पर होबे करथे।
काबर फेर बता मनखे मन,सुख
बटोर के दुख ले डरथे
16/16
कोरा
गंगा-जमुना लहरा
रतन भरे
भंड़ारी दहरा ।
हिमडोंगर मन
देवत पहरा ।
दमकत माथा
चमकत चेहरा।
होन न देवन तोला
खंड़िया ।
रहिबे तीनो
काल अखंडिया ।
जीव देवइया
हें बलिदानी ।
सब बियाय तोर
बचकानी।।
गुरु गहीर बुध
आनी बानी
तपसी साधू ऋषि
मुनि ज्ञानी।।
ल इका जम्मो
तोर पहरिया ।।
00000000000000000000000
शोभामोहन
चौपाई
जे गुनीक जन मूर्ख लोगा । हेतु
रखें मन भीतर सोगा।।
सहि अपराध सबो सुखकारी ।जतन रवि वह पहितकारी ।।
गुनीक चाहना चाहत गुनिया ।अग्नि ज्ञान जान बहु रनिया ।।
विद्या धारन साध सधाये ।वही विज्ञान युक्त हो पाये ।।
जे सरलग सर्वत्र चलंता।सकल अंजोरे बस्तु अनंता।।
सकल पदारथ मांझा छाए।बिजुरी जैन जिनीस जलाए।।
अग्नि रूप बिजुरिया जानू ।काज रूप धन पाई सुजानू ।।
जेन अगन आदि जिनीसाना। गुण
सुभाव कर्मदल ग्याना ।
कारज सिद्ध करें सुख पाये ।अतुल आनंद विषय रम जाये ।।
शोभामोहन
●देखौ सावन के दिन आगे (राग
मल्हार)●
देखौ सावन के दिन आगे
छरियावत हावय सबके मति।सुंदर
फूलत फूल सबो कति।।
मधु लूटे बर भ्रमर झपागे।देखौ
सावन के दिन आगे।।
इन्द्र बजावत दफड़ा
माँदर।करिया करिया घपटे बादर।।
लागत अँगना छान्ही छागे।देखौ
सावन के दिन आगे।।
देख मयूरा छतरा पाँखी।हवय
दिखावत सुंदर झाँकी।।
नृत्य करत लागत पगलागे।देखौ
सावन के दिन आगे।।
उमड़त गरजत घुमरत चमचम।बूँद
गिरत हे छमछम छमछम।।
लउकत बिजली प्रान
कँपागे।देखौ सावन के दिन आगे।।
बादर भुँइया छुवे परत
हे।सत्ती जाये असन करत हे।।
बूँद चूहत पाना फरियागे।देखौ
सावन के दिन आगे।।
छोटे नदिया पार उदेलत।चारो
कोती पानी ठेलत।।
धरनी सुखद सरग कस लागे।देखौ
सावन के दिन आगे।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२२/०५/२०२१
●*कब आबे तैं बोल लहरिया*●
चौपाई
बरसत बादर
करिया-करिया।जल बुँदियन छलकात गगरिया ।।
बरसत बादर.............................
दूबी जामत ले
बरसत हे ।छान्ही परवा तरी धँसत हे ।।
खेत जोताय नइ
इक हरिया ।कब आबे तैं बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
...............................
सरी कोठ भर
उपकत रेला ।सोग लगत हे देखत तेला ।।
आँसू ढ़रकत
फिजत अँचरिया।कब आबे तै बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
..........................
गरजन घुमरन
सुनके बादर ।अंडा साँप फूटत भुँइया भर।।
छलकत बहकत
नदिया तरिया ।कब आबे तैं बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
................................
नभ मा बगुला
पाँत उड़ावत ।अउ भुँइया के जीव जुड़ावत ।।
मोरे मन धनहा
हे परिया ।कब आबे तैं बोल लहरिया।।
बरसत बादर
..............................
बइठ बरेंडी
कँउवा बोलत ।गियाँ गड़ी बन हाँसत ठोलत।।
रहन धराये हे
सुखलरिया ।कब आबे तैं बोल लहरिया ।।
बरसत
बादर............................
लउकत बिजुरी
देख डरत हौं ।तोर बिगन दिन रात मरत हौं ।।
बज्र असन हे
कटत उमरिया ।कब आबे तैं बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
.....................
शोभामोहन
*कब आबे तैं बोल लहरिया*
बरसत बादर
करिया-करिया।
जल बुँदियन
छलकात गगरिया ।।
बरसत
बादर.............................
दूबी जामत ले बरसत
हे ।
छान्ही परवा
तरी धँसत हे ।।
खेत जोताय नइ
इक हरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
...............................
सरी कोठ भर
उपकत रेला ।
सोग लगत हे
देखत तेला ।।
आँसू ढ़रकत
फिजत अँचरिया।
कब आबे तै बोल
लहरिया ।।
बरसत बादर
..........................
गरजन घुमरन
सुनके बादर ।
अंडा साँप
फूटत भुँइया भर।।
छलकत बहकत
नदिया तरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
................................
नभ मा बगुला
पाँत उड़ावत ।
अउ भुँइया के
जीव जुड़ावत ।।
मोरे मन धनहा
हे परिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया।।
बरसत बादर ..............................
बइठ बरेंडी
कँउवा बोलत ।
गियाँ गड़ी बन
हाँसत ठोलत।।
रहन धराये हे
सुखलरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत
बादर............................
लउकत बिजुरी
देख डरत हौं ।
तोर बिगन दिन
रात मरत हौं ।।
बज्र असन हे
कटत उमरिया ।
कब आबे तैं
बोल लहरिया ।।
बरसत बादर
.....................
शोभामोहन
श्रीवास्तव
२७/०२/२०२०
खुश्बूविहार
कालोनी
सुंदर लाल शर्मा (चौपाई)
संत पधारे के
सुन बोली । सास दँउड़त निकलिस खोली ।।
बेटा ला
लगिहात बलाथे । संत गोड़ छू पाँव पराथे ।।
सुरुज मनाये
मन मा ठानी । देवमती सन तन मन बानी।।
भिनसरहा ले
नदिया धावैं । कनिहा भर पानी मा जावैं ।।
अरग देत सूरुज
ला पूजैं । जब्बर करमलेख ले जूझैं ।।
असकुस होथे
दिन चढ़ जाथे । राम भरोसा बेर पहाथें ।।
शास्त्र
उपनिषद दाई बाँचे । सुन -सुन भीतर लइका नाचै।।
शोभामोहन
●महतारी पथरा बरसाथे●
चौपाई छंद
महतारी पथरा
बरसाथे । अउ लइका बंदूक चलाथे।।
जे हर घटिया सीखा
पाथे । अपने कुल के नाव बुताथे ।।
जे दूसर बर
अस्त्र उठाथे । उहू शस्त्र ले मारे जाथे ।।
दाई सतगुन
नहीं सिखाथे । तब लइका मरजाद भुलाथे।।
कब रक्सा के
सुसी बुताथे । कतको झन ला मार सुताथे ।
आज नहीं तो
काल भंँजाही । काल दुवारी ओकर आही।।
लड़त-लड़त अपनो
मर जाही । बेरा देही उँकर गवाही ।।
बड़े बड़े झगरंत
चले गै । होगे सबके अंत छले गै।।
मया दया के
बिगन चिन्हारी । पाप कमावत जब्बर भारी ।
जेन निहत्था
के गर काटै । दूसर खातिर दुख उवाटै ।।
अइसन मनखे
चिन्हव चिन्हावौ । सावचेत सबला करवावौ ।।
मानवता के
दुश्मन जानौ । हितवा मितवा नोहय मानौ ।।
शोभामोहन
जीवन्मुक्त
मुनि सन्यासी।ब्रह्मपरायण सब सुखराशी।।
ब्रह्म समाधि
ला तज आथे।रामकथा सुनके सुख पाथें।।
तेन राम ला जे
बिसराथे।अहोनरक वो मनखे जाथे।।
इन्द्री बिसयन
डहर झिकाथे।अइसे जे नर समझे पाथे।।
ठ उका इन्द्री
के गुन जानै।अउ चिटको न गरब मन लानै।।
तन प्रारब्ध
अधीन जनाथे।करम सबो ला गुन करवाथे।।
अइसन जान न
जेन नठाथे।वो मनखे असली सुख पाथे।।
शोभामोहन
२३/०२/२०२१
हे सरनागत के
रखवारा।
हे जगराखन हे
करतारा।।
मोर सबो अपराध
बिसारौ।भव सागर के कष्ट निवारौ।।
हे जग मा दुख ताप
अजारा।हे सरनागत के रखवारा।।
भुँइया के दुख
ताप मिटइया।तन के नाना रोग हरइया।।
हे दस मूड़
उखाननहारा।।हे सरनागत के रखवारा।
बान अगन ले
रक्सा मारे।दल के दल पल मा संहारे।।
दूर करे बर
भूतल भारा।।हे सरनागत के रखवारा।
हे भुँइया
भूषन भगवाना।हाथ धरे हावस धनु बाना।।
हे जगती जीव
प्रान अधारा।हे सरनागत के रखवारा।
सहस सुरुज
जइसे उजियारा।मोह महा घपटे अँधियारा।
हे सरनागत के
रखवारा।
काम के बान मा
सब छेदाथे ।पाप परे रोथे पछताथे ।
पाप सुभाव जबर
संसारा।।हे सरनागत के रखवारा।
जीव नीरादर के
फल पावत।नाना रोग बियोग बियावत।।
हे भवसागर
तारनहारा।हे सरनागत के रखवारा।
दीन मलीन अधीन
जनाथे।जीव बिना जीव बड़ दुख पाथे।।
सुख पाथे जीव
तोर अधारा ।हे सरनागत के रखवारा।
राग पराग
सुहाग सुहाथे।एकक सुख सौ दुख उपजाथे।।
ड़ोग भगत भगाव
किनारा।हे सरनागत के रखवारा।
हे मुनि के मन
मा बिचरइया।जनम मरन के रोग हरइया।।
ये भव सागर
बिकट अपारा। हे सरनागत के रखवारा।।
शोभामोहन
झन जा लाल
चराये गइया
झुँझकुर मा हे
बिखहर के डर।रक्सा रक्सिन बिचरत सरभर।।
सुन लाला जब
बरजत मइया। झन जा लाल चराये गइया।।
सुन जमुना जल
हावय बाढ़े ।चारो कोती अलहन ठाढ़े।
खा अउ खेल महल
मा भइया।झन जा लाल चराये गइया ।।
नानुक मोर अरे
लरकइया ।कल न परै बिन तोर कन्हइया।।
आँखी मोर
अँजोर करइया। झन जा लाल चराये गइया।।
राजा लाल न
पहिन भँदइया। हे जसुदा के जीव रखइया।।
नंद बबा के मन
हरसइया। झन जा लाल चराये गइया।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
१०/०१/२०२१
कृष्न नाम गुन
सुमरनी
जय जय कृष्न
कन्हईया जयजय ।जय जय जगत रचईया जयजय।।
गोकुल धाम
रहईया जयजय ।जसुमति के लरिकईया जयजय।।
नंद हृदय
हरसईया जयजय।नर तन खेल रचईया जयजय।।
जय जय
कृष्ण...................
बन बन धेनु
चरईया जयजय।गोकुल ग्वाल खेलईया जयजय।।
गोबरधन उपकईया
जयजय।इन्दर ताप नवईया जयजय।।
जय जय कृष्ण
....................
चंदन तिलक
लगईया जयजय।मूँड़ मुकुट खपईया जयजय।।
बलदाऊ के भईया
जयजय।।तीनो तिलिक गोसईया जयजय।।
जय जय कृष्ण
....................
कालीदाह
कुदईया जयजय ।बिखहर नाग नथईया जयजय ।।
बंशी सुघर
बजईया जयजय।सबके चेत चोरईया जयजय।।
जय जय कृष्ण
....................
ग्वालिन चीर
लुकईया जयजय।अनगिन नाम धरईया जयजय।।
अनगिन रूप
सजईया जयजय।जगसुख जुद्ध लड़ईया जयजय।।
जय जय कृष्ण
....................
राधा नाम
रटईया जयजय।बंधन जीव कटईया जयजय ।।
मधुबन रास
रचईया जयजय ।भक्तन लाज बच ईया जयजय
जय जय कृष्ण
....................
घन अंँधियार
हरईया जयजय ।अजगुत करम करईया जयजय।।
रक्सा मार
गिरईया जयजय।।अंतस भुवन बसईया जयजय।।
जय जय
कृष्न.................
अमृत धार
बहईया जयजय ।गीता के सिरजइया जयजय।।
दुष्टन मार
गिर ईया जयजय।।भक्तन पमान बढ़ईया जयजय।
जय जय कृष्ण
....................
शोभामोहन
श्रीवास्तव
०१/११/२०२०
सुन्ना घर
पहुना झन बन
००००००००००००००००००
उजरा दे
माटी के मुहरन
गोड़ गड़े
काँटा झन गन
झन अँजोर
ले रख अनबन
बेरा ले झन धर झगरन
००००००००००००००००
सुन्ना घर
पहुना झन बन,
भिनसरहा ले
कर सुमरन।
छोड़ सबो
गिंजरन घुमरन ,
बेरा ले झन
धर झगरन ।।
०००००००००००००००००
गुरु पुन्नी
के दिन हे पबरित ।गुरु महिमा ले जग हे अचरित ।।
सबो प्रश्न कर देथे गुरु
हल ।बिपत बेर मा देथे गुरु बल।।
ज्ञान खजाना बाँटत
निर्मल।मन मस धो देथे अंतसबल।।
बाट बताके
सुघ्घर निछमल।चाल चलन करथे शुभमंगल।।
गुरु परमातम
रूप हे अटल ।।गुरु के शरण मा मन अब चल ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
०९/०७/२०२०
सूरुज खखाये हे
बिहान ले, काला खाँव बचाँव कहत हे ।
रुख राई मन तपसी
बनके,ओकर दे दुख ताप सहत हे ।।
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