भुजंगप्रयात/मुक्तिका
छंद
यमाता X ४ या ४ (लघु
गुरु गुरु)
122 122 122 122
गुनी डोकरी
छोकरी ला बताथे ।
करे काम बूता
लगाके सिखाथे।।
कलेवा पतेवा
बनाये चुरोये।
सधाये सबो के
सधौरा पुरोये।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
२०/११/२०२०
भवानी सुमरनी
(भुजंगप्रयात छंद)
महाकाल के
संगिनी तै पियारी।
महाजोगमाया
बिधाता अधारी।।
तँही वेद के
मंत्र माँझा लुकाये।
तँही ग्यान बिग्यान
थापे समाये।।
तँही वेद
विद्या अँजोरी कराये ।
तँही मोह
फाँसे तँही हा छुड़ाये ।।
तँही रागिनी
राग ग्यानी गवैया।
तँही मंत्र ले
तंत्र जम्मो जनैया ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
२९/०७/२०२०
No comments:
Post a Comment