बादर डहर उड़ाहूँ मैं
पिंयर पिंयर शुभहरदी छिटके,
पतिया असन बटाहूँ मैं।
गमक धमक ला फूल गँवइहा,
दुनिया भर बगराहूँ मैं।।
तिरिन असन हौं संग पवन धर,
बादर डहर उड़ाहूँ मैं।
बाँही खोल बलात समुन्दर,
नदिया असन बोहाहूँ मैं।
भाग न सोधौं आस न ओधौं,
धरम करम ला बनाहूँ मैं।
सौ सौ सुरुज उवे रस सोंखत,
गगरी असन अँटाहूँ मैं।।
भीड़ गुदेलत बाट बेंझावत, जबर जोर धकियाहूँ मैं।
थकौं बिराजौं नहीं बाट में,
घर डीह-डोंगर जाहूँ मैं।।
खरासोन बिस्वास बिसरगे,
कइसे जग पतियाहूँ मैं।
शोभामोहन
१४/१०/२०२२
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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