Monday, 13 March 2023

झाँक झरोखा खोल के

झाँक झरोखा खोल के।

हरि सिरजे जग सुंदर झाँकी,

झाँक झरोखा खोल के।
अनगिन चित्र बनत उझरत नभ,
पुरइया संग डोल के।।
खसकत मसकत बुलकत बेरा,
नीक खीख रस घोल के।।
रुँवा-रुँवा कुलकत पुलकत हे,
आभा बोली बोल के।।
उच्छलमंगल के घर दुनिया,
लेवना लूट खखोल के।।

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