अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी,
मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना,
निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती,
तोर जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
आनी बानी, बाट बेंझानी,गोड़ अड़ानी,
झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
साध जगा मन, शोभामोहन, जीव उधारन,
अरज बर आय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय।
शोभामोहन
२७/०६/२०२१
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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