सृजन के लिए
आगत विगत है
सृजन के लिए ।
जीवन का रथ है
सृजन के लिए।।
हृदय से शपथ
है सृजन के लिए ।
कलम श्वेतपथ है
सृजन के लिए ।।
उमड़ा ये घन है
सृजन के लिए ।
मन का वजन है
सृजन के लिए।।
जिया का अगन
है सृजन के लिए।
पीड़ा सघन सृजन
के लिए ।।
जगत आगमन है
सृजन के लिए ।
श्वासा हवन है
सृजन के लिए ।।
सुगंधित पवन
है सृजन के लिए ।
पुलकित गगन है
सृजन के लिए ।।
दिवाकर तपन है
सृजन के लिए ।
धरा का वसन है
सृजन के लिए ।।
विषय का छुअन
है सृजन के लिए ।
विचरता ये मन
है सृजन के लिए ।।
यह प्राण तन
है सृजन के लिए ।
सजन का भुवन
है सृजन के लिए।
सहे वह चुभन
है सृजन के लिए ।।
हँसन है रुदन
है सृजन के लिए ।
सकल उद्धरण
हैं सृजन के लिए ।।
रहे मन मगन है
सृजन के लिए ।
जीवन मरन है
सृजन के लिए ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
०४/१०/१०१०
राजिम
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