बस आज जिन्दगी
है सबको यही बताना
यादों की हर
गली में देखो जिघर नमी है ।
आँसू के बहते
झरनों से काइयाँ जमी हैं ।।
फिसलन है पार
होकर फिर से इधर न जाना।
बस आज जिंदगी है
सबको यही बताना ।।
होकर उदासियों
से खुशियों की भी गली है ।
कुछ फूल हैं
कँवारी कुछ अनछुई कली है ।।
मरने में क्या
मजा है जीने में क्या बहाना ।।
बस आज जिंदगी
है सबको यही बताना ।।
यादों के इस
फसल को सींचों ना आँसुओं से।
फिसले न कसके
पकड़ो भींचों यूँ बजुओं से।।
भाता है सारे
जग को आसू भरा तराना ।
बस आज जिन्दगी
है सबको यही बताना ।।
रिश्ते नये
पुराने तोड़े न टूट पाते ।
अनुभूतियों के
आँगन को गंध से सजाते ।।
गीतो को
जिंदगी को, हर धुन में गुनगुनाना ।
बस आज जिंदगी
है, सबको यही बताना ।।
जब काल का
झरोखा कुछ नापसंद दिखाये।
ग्रहचाल में
हो विचलन कुछ भी समझ न आये।
जाये उसे विदा
दे आये उसे बुलाना ।
बस आज जिंदगी
है सबको यही बताना ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
११/०३/१६
राजिम
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