सुख बरसाहू
जेती जाहू (अमृतध्वनि छंद )
जेती जाहू फूल
ला , बोंवत जाहू खार ।
काँटा खूँटी
बाट मा , दिखही तेला टार ।।
दिखही तेला,टारत आहू ,झन गोभाहू ।
फूल दसाहू, तब जब चाहू,सुख अमराहू।।
पुन पनकाहू ,भाग जगाहू,सुख परघाहू ।
हरि गुन गाहू ,सुख बरसाहू ,जेती जाहू ।।
शोभामोहन
[29/07, 12:05]
कतको बिखहर
साँप हो (अमृतध्वनि छंद)
कतको बिखहर साँप हो , दाँत दिये ले टोर।
जहर नही उगले सकय , हो जाथे कमजोर
।।
हो जाथे कमजोर
साँप हर ,कतको बिखहर ।
परथे अल्लर,तस चोला नर ,राम भजन कर ।
पाप जथे बर,होथे उज्जर, अंतस तलघर ।
अउ जाथे टर, इन्द्री के जर,कतको बिखहर ।
शोभामोहन
[01/08/19 ]
पाना पतझर मा झरे
पाना पतझर मा झरे,आवय तभे बहार ।
दुख पाछू सुख हे लगे,लहुटे पहुटे बार ।।
लहुटे पहुटे बार चलत नर ,लाख जतन कर ।
सुख के चक्कर,दुखद गली धर,कतको
मर मर।
छोड़ गाँव घर,कहूँ मेर टर,नइ
छोंड़य डर ।
बेरा हे खर,बोलत झरझर, पाना पतझर ।।
शोभामोहन
[01/08, 22:42]
कंकर कंकर मा बसे
कंकर कंकर मा बसे , भूतनाथ भगवान ।
शंकर शंकर जे कहे , तरे जगत ले जान ।।
तरे जगत ले, जान उही नर ,जपले
हर हर ।
जटा गंगधर ,लपटाये गर,डोमी बिखहर,
चंदा सिर पर,राख देंह भर,चुपरे
शंकर।
हर सबके जर, शिवमय सुंदर,कंकर
कंकर।।
डमडम डम कर नाचथे,डमरूधर कैलाश।
झनके ततका दूर के, होथे दुख के नाश।।
होथे दुख के, नाश भूत धर, परबत
ऊपर।
बइठे शंकर,पदवी अम्मर, देवय
किंकर।।
जोगनिया हर,लठर झुमर कर,नाचे
मन भर।
चिहुर भयंकर,हरहर हरहर,डमडम डमकर ।
भोले शंकर के नरी ,सोहत मूँड़ी माल ।
कनिहा छाला बाघ के,दिखथे जइसे काल।।
दिखथे जइसे , काल रूप हर ,लगथे
बड़ डर।
सरसर सरसर, साँप देंह पर, चलत
भयंकर।।
नंदी ऊपर, बइठे हर हर,परबतिया धर ।
जग के सुख बर,गिंजरे जगधर,भोले
शंकर।।
शोभामोहन
12/08/19
जेन आय हे ए जगत
जेन आय हे ए जगत ,तेला परथे जाय।
माया कतको हो जबर ,जीव बाँध नइ पाय ।।
जीव बाँध नइ,पाय काय हे,जे
लिखाय हे।
कब मिटाय हे,प्रभु भुलाय हे,जग
मताय हे।।
सुख सधाय हे,दुख
लिखाय हे,दिन
पहाय हे।
मन मड़ाय हे,सब हराय हे, जेन
आय हे ।।
शोभामोहन
[30/07, 21:17]
कतको बिखहर साँप हो
कतको बिखहर साँप हो , दाँत
दिये ले टोर।
जहर नही उगले सकय , हो
जाथे कमजोर ।।
हो जाथे कमजोर साँप हर ,कतको
बिखहर ।
परथे अल्लर,तस चोला नर ,राम
भजन कर ।
पाप जथे बर,होथे उज्जर, अंतस
तलघर
।
अउ जाथे टर, इन्द्री के जर,कतको बिखहर
।
शोभामोहन
[01/08/19 ]
अमृतध्वनि छंद
जेती जाहू फूल ला , बोंवत जाहू खार ।
काँटा खूँटी बाट मा , दिखही तेला टार ।।
दिखही तेला,टारत आहू ,झन गोभाहू ।
फूल दसाहू, तब जब चाहू,सुख अमराहू।।
पुन पनकाहू ,भाग जगाहू,सुख परघाहू ।
हरि गुन गाहू ,सुख बरसाहू
,जेती जाहू ।।
शोभामोहन
[29/07, 12:05]
जय जय काली मातु ला
जय जय काली मातु ला, सुमिरँव बारम्बार।
पाँव परँव डंडासरन, ड़ोगा कर दे पार ।।
ड़ोगा कर दे ,पार निराली, तँय बलशाली।
ओली खाली, भरने वाली, तँही उदाली।।
जय कंकाली,आँखी लाली,काल कराली।
जग उजियाली,मनगति चाली,जयजय काली।।
शोभामोहन
[29/07, 12:07]
कंकर कंकर मा
बसे (अमृतध्वनि छंद)
कंकर कंकर मा
बसे , भूतनाथ भगवान ।
शंकर शंकर जे
कहे , तरे जगत ले जान ।।
तरे जगत ले, जान उही नर ,जपले हर हर ।
जटा गंगधर ,लपटाये गर,डोमी बिखहर,
चंदा सिर पर,राख देंह भर,चुपरे शंकर।
हर सबके जर, शिवमय सुंदर,कंकर कंकर।।
डमडम डम कर नाचथे,डमरूधर कैलाश।
झनके ततका दूर
के, होथे दुख के नाश।।
होथे दुख के, नाश भूत धर, परबत ऊपर।
बइठे शंकर,पदवी अम्मर, देवय किंकर।।
जोगनिया हर,लठर झुमर कर,नाचे मन भर।
चिहुर भयंकर,हरहर हरहर,डमडम डमकर ।
भोले शंकर के
नरी ,सोहत मूँड़ी माल ।
कनिहा छाला
बाघ के,दिखथे जइसे काल।।
दिखथे जइसे , काल रूप हर ,लगथे बड़ डर।
सरसर सरसर, साँप देंह पर, चलत भयंकर।।
नंदी ऊपर, बइठे हर हर,परबतिया धर ।
जग के सुख बर,गिंजरे जगधर,भोले शंकर।।
शोभामोहन
12/08/19
जेन आय हे ए
जगत (अमृतध्वनि छंद )
जेन आय हे ए
जगत ,तेला परथे जाय।
माया कतको हो
जबर ,जीव बाँध नइ पाय ।।
जीव बाँध नइ,पाय काय हे,जे लिखाय हे।
कब मिटाय हे,प्रभु भुलाय
हे,जग मताय हे।।
सुख सधाय हे,दुख लिखाय हे,दिन पहाय हे।
मन मड़ाय हे,सब हराय हे, जेन आय हे ।।
शोभामोहन
[30/07, 21:17]
फागुन महिना कस संगी हर,
रंग भरे बर जिनगानी ।
गोंटी मारे लहर बियाये,
थीरथार तरिया पानी।।
रीतापन के राज सिरागे,
जगमग होगे हे आँखी।
नभ नापे बर मन हंसा हर,
पाय सोनहा अब पाँखी ।।
पग-पग अपटे गिरे झपाये,
सब दुख पीरा बिसरागे ।
अंतस निक्ता मोल करे बर,
कोनो पहुना बन आगे।।
ढ़ारत हे मकरंद मया के,
बेंझा के झन छलकाये ।
एक पेंड़वा दू खाँधी अन,
बेरा हर झन फलकाये।।
साँझर-मिंझरा सुख-दुख होवत,
लटपट जेकर सुख जागे।
आईजुई मनावत हावँय,
नजर काकरो झन लागे ।।
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