Wednesday, 15 March 2023

एकावली छंद

 

एकावली छंद 5-5 पर यति

चार चरण दो-दो चरण सम तुकान्त।

एकावली छंद

तोर ले ,आस हे ।

दरस के, प्यास हे ।।

हाँस के, रो डरौ ।

भीतरी, मा चुरौं ।।

पूछहूँ, कोन ला ।

तोर घर, के पता ।।

तँय बता, दे पिया।

नानकुन, हे दिया।।

पुरोबे, ते नही ।

आस मैं, हौं बही ।।

शोभामोहन

30/09/19

 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...