एकावली छंद 5-5 पर यति
चार चरण दो-दो
चरण सम तुकान्त।
एकावली छंद
तोर ले ,आस हे ।
दरस के, प्यास हे ।।
हाँस के, रो डरौ ।
भीतरी, मा चुरौं ।।
पूछहूँ, कोन ला ।
तोर घर, के पता ।।
तँय बता, दे पिया।
नानकुन, हे दिया।।
पुरोबे, ते नही ।
आस मैं, हौं बही ।।
शोभामोहन
30/09/19
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