Wednesday, 15 March 2023

हरिगीतिका

 

सरस्वती वंदना हरिगीतिका

बीना धरे हे हाथ मा,साजे मुकुट अउ माथ मा ।

गनपति बिराजे छेंव में,अउ माँझ लक्ष्मी साथ मा।

हे हाथ मा पुस्तक धरे,बइठे कमल के फूल हे

करधन सजे पैजन बजे, मोती जड़े अउ झूल हे ।

नथली फभे हे सोनहा, मुंँदरी सुघर अँगरी सजे

गर हार दुलरी तीलरी, चूरी सुघर कंगन बजे ।

अँधियार मनके टारथे,गुन ग्यान दियना बारथे।

संसार के दुख मेटके, मन कुंदरा ला झारथे।

सुर ला सजा धुन ला बजा, संगीत सिरजावै उही।

भव पार बर पतवार अउ,जग नाच नचवावै उही।

मननाद अनहत ला बजा,साधक सुजन ला तारथे।

बस मध्यमा अउ वैखरी, दुख ताप संकट टारथे ।

 

 

 

जूड़ चुल्हा ओकरे हे, जेन टोरत हाड़ हे

उवत बूड़त जे कमाथे,ओकरे सुख आड़ हे ।

का करे मनखे भला जब,भाग ब्रम्हा हे लिखे।

लागथे अँधियार जग हा, बाट कोनो नइ दिखे।।

शोभामोहन

 

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