Thursday, 16 March 2023

मत्तगयंद छंद

 

विरह सवैया

रात पहात न दिन सुहावत, हाँ बिन प्रीतम ये तन माटी।

कान घलो झुमका करलावत,पैजन गोड़ ल पारत पारत घाँटी।

नैन अगोरत आत पिया नइ, जोहत बाट उघार मुहाटी।

गोड़ महाउर माँग भरे चुक, खोर कती मन पारत पाटी।

शोभामोहन श्रीवास्तव

१७/१२/२०१९

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