विरह सवैया
रात पहात न
दिन सुहावत, हाँ बिन प्रीतम ये तन माटी।
कान घलो झुमका
करलावत,पैजन गोड़ ल पारत पारत घाँटी।
नैन अगोरत आत
पिया नइ, जोहत बाट उघार मुहाटी।
गोड़ महाउर
माँग भरे चुक, खोर कती मन पारत पाटी।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
१७/१२/२०१९
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
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