अभिताप अभी
अभिधेय नहीं
अभिताप अभी
अभिधेय नहीं,
अभिधायिनी अभी
अभिधान न कर ।
अभिविश्रुत
अभी अनुबंध नहीं,
अभिपन्न न आशा
लिप्त लहर ।।
अभिज्ञान अभी
अभिमान नहीं,
अभिनंदित अभी
अभिसार प्रहर।
अभिज्ञान अभी
अभिकांक्षी नहीं,
अभिचार अभी
अभिमंत्र अधर।।
अभिनेय अभी
अभिपूर्ण नहीं,
अभिभूत अभी
अभिशप्त उमर ।
अभिदान अभी
अभी अभिग्रहण अभी,
अभिमंड़ित अभी
अभिमाद अजर।।
अभिसायं अभि
संबंध नहीं,
अभिलक्ष्य अभी
अभिलीन उदर।
अभीराम अभी
अभिकाम अभी,
अभिपूजित अभी
अभिव्यस्त विवर।।
अभिपठित अभी
हृदलेख नहीं,
अभिशून्य न
अभी अभिरमण जहर।
अभिनंद कहाँ
अभिसंधि बिना,
अभिधर्म कहे
अभिमत ईश्वर ।।
शोभामोहन
श्रीवास्तव
०८/०५/२०१७
झीट पाटन
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