Thursday, 16 March 2023

कोनजनी कोन कोती जाही रेंगत रेंगत पीरा मन

 

कोनजनी कोन कोती जाही

रेंगत रेंगत पीरा मन ।

कौंड़ी मोल बेचावै कइसे,

बइठ बजार मा हीरा मन ।।

कोनजनी कोन कोती...........................

धरे तमूरा राजमहल ले,

जीव निकलगे मीरा बन।

सुख के साध कहत बँसुरी बन,

पीरा कहत कबीरा बन ।।

कोनजनी कोन कोती...............................

अंतस जागै का कमती हें,

बाजै ढ़ोल मँजीरा झन ।

सब गँवाय के मोल हवय का,

खोज मया के सीरा झन ।।

कोनजनी कोन कोती.........................

कतका मीट्ठी कर डारे हस,

देख होय अब कीरा झन ।

फोरा बिक्कट टनटनात हे,

मोह कहत कर चीरा झन ।।

कोनजनी कोन कोती.........................

शोभामोहन

7/०६/२०१६

 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...